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भक्त नवरात्रि पर घट स्थापना कर करेंगे मां कि आराधना वही हनुमान जी मंदिरों पर होगा रामायण ,चालिसा पाठ

भक्त नवरात्रि पर घट स्थापना कर करेंगे मां कि आराधना वही हनुमान जी मंदिरों पर होगा रामायण ,चालिसा पाठ

सीतामऊ।नगर और अंचल में नवरात्रि को लेकर भक्तों में अपार उत्साह देखा गया है वहीं मंदिरों देवालयों में साफ सफाई के साथ विशेष साथ सजावट की जा रही है।

नवरात्रि के अवसर पर नगर में आराध्य देवी मोड़ी माताजी मंदिर पर भक्तों का सुबह से तांता लगा रहता है।ऐसी कहावत है कि मोड़ी माताजी का बहुत बहुत ही प्राचीन स्थान है। माताजी भक्तों को तीन रुपो में दर्शन देती है।प्रथम पहर में कन्या स्वरुप दुसरे पहर में युवा और तीसरे पहर में वृद्ध स्वरूप में दर्शन देती है। यहां पर समाज सेवको और भक्तों के सहयोग से मां के दरबार मंदिर को भव्य सुंदर बनाया जा रहा है। वहीं नगर कि स्थापना देवी जो कि सन् 1500 से 1600 ई के मध्य में नगर के मध्य विराजमान मां वैराई माताजी के मंदिर पर भी नवरात्र पर्व इस बार भी आदिशक्ति कि भव्य आराधना कि जाएगी। नगर के जबरिया हनुमान जी, वैद्यनाथ बालाजी हांडियां बाग, भगोर द्वार मनोकामना पूर्ण हनुमान जी, राधा बावड़ी हनुमान जी, नागराज खेड़ा हनुमान जी, बावड़ी हनुमान जी, मोती कुआ हनुमान जी कृष्णा कालोनी स्थित हटिले हनुमान जी, नांदिया बाबडी, पंचतीर्थ रामेश्वरं हनुमानजी मंदिर पर हवन पुजा अर्चना तथा कही अखंड रामायण पाठ हनुमान चालीसा का पाठ भक्तों द्वारा किया जाएगा। नगर के साथ अंचल क्षेत्र में नौ दिवसीय नवरात्र पर माताजी के घट स्थापना कर नौ रुपों कि भक्तों द्वारा आराधना कल से प्रारंभ हो जाएगी। बुधवार को अंचल के ग्राम सुर्याखेड़ा के धर्म प्रेमी जनों में नवरात्रि को लेकर उत्साह देखने को मिला धर्म प्रेमी जनों द्वारा नवरात्रि के पावन पर्व पर माताजी के घट स्थापना से पूर्व अंबे माताजी कि मूर्ति को बग्गी रथ में स्थापित कर सीतामऊ बस स्टैंड पर ढोल ढमाके बैंड बाजे के साथ मां कि भक्ति में नाचते थिरकते हुए अपने गांव तक जुलूस निकाला गया।

शास्त्रों के अनुसार इस बार चैत्र नवरात्र 2026 एक खास संयोग लेकर आ रहा है. लगभग 72 साल बाद ऐसा योग बन रहा है जब अमावस्या और नवरात्र की शुरुआत एक साथ होगी. 19 मार्च को सूर्योदय के समय अमावस्या तिथि रहेगी, जिसके कारण अमावस्या से जुड़े स्नान और दान के कार्य उसी दिन सुबह किए जाएंगे. इसके बाद प्रतिपदा शुरू होते ही नवरात्र का आरंभ माना जाएगा और मां दुर्गा का स्वागत भी इसी दिन किया जाएगा।चैत्र अमावस्या की शुरुआत 18 मार्च सुबह 8 बजकर 25 मिनट से हो गई और यह 19 मार्च सुबह 6 बजकर 52 मिनट तक रहेगी।इसके बाद प्रतिपदा तिथि लग जाएगी, जो 20 मार्च सुबह 4 बजकर 52 मिनट तक जारी रहेगी।नवरात्र के सबसे महत्वपूर्ण कार्य यानी कलश स्थापना की, तो इसका शुभ समय 19 मार्च को सुबह 6 बजकर 52 मिनट से 7 बजकर 43 मिनट तक रहेगा. इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त में भी घटस्थापना की जा सकती है, जिसका समय दोपहर 12 बजकर 05 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 53 मिनट तक रहेगा। इस तरह इस साल एक ही दिन अमावस्या का पुण्य और नवरात्र की शुभ शुरुआत दोनों का लाभ मिलेगा।

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