“कही अनकही” ने संवारा साहित्य जगत—चुन्नीलाल परमार

(कबीर) की रचना ‘आग में आशा और विश्वास’ बनी चर्चा का केंद्र
— अनुज, चुन्नीलाल परमार (कबीर)
कहते हैं कि कला और खुशबू को जितना दबाया जाए, उसकी महक उतनी ही दूर तक फैलती है। इसी कहावत को चरितार्थ करते हुए बुद्ध पथ समाचार पत्र के आधार स्तंभ, वरिष्ठ पत्रकार एवं ख्यातिप्राप्त लेखक चुन्नीलाल परमार (कबीर) आज साहित्य जगत में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुके हैं।
वर्तमान में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में अधिकारी के रूप में कार्यरत श्री परमार, जिला पंचायत उज्जैन अंतर्गत जनपद पंचायत खाचरौद में प्रभारी खंड पंचायत अधिकारी के पद पर सेवाएं दे रहे हैं। वे एक कुशल वक्ता, विधि विशेषज्ञ, मधुर गायक और संवेदनशील लेखक के रूप में भी जाने जाते हैं।
मृदुभाषी और मिलनसार व्यक्तित्व के धनी चुन्नीलाल परमार की सैकड़ों रचनाएं विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं एवं सोशल मीडिया पर प्रकाशित हो चुकी हैं। हाल ही में दिनांक 12 अप्रैल को जोरहाट में उनकी विशेष उपस्थिति में पुस्तक “कही अनकही” का भव्य विमोचन हुआ।
इस पुस्तक में प्रकाशित उनकी लघु कहानी “आग में आशा और विश्वास” ने पाठकों और साहित्यकारों के बीच विशेष स्थान बनाया है। यह रचना पारिवारिक रिश्तों और सामाजिक मूल्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करती है, जो पाठकों को गहराई से प्रभावित करती है।
पुस्तक का संपादन रूनू शर्मा (बरूवा) द्वारा किया गया है तथा इसका प्रकाशन साहित्य भूमि से हुआ है। 795 रुपये मूल्य की इस पुस्तक में देशभर के 50 प्रतिष्ठित लेखकों की उत्कृष्ट रचनाओं को स्थान दिया गया है।
मध्यप्रदेश के उज्जैन जिले की बड़नगर तहसील के ग्राम मलोड़ा निवासी चुन्नीलाल परमार (कबीर) की यह रचना न केवल साहित्य सृजन के क्षेत्र में प्रेरणादायक है, बल्कि पारिवारिक संस्कारों और सांस्कृतिक मूल्यों को भी सुदृढ़ करती है।
निश्चित ही, “कही अनकही” जैसी कृति साहित्य प्रेमियों के लिए पठनीय होने के साथ-साथ नवोदित रचनाकारों के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होगी।



