
शिक्षकों ने विभाग से शीघ्र समाधान कि रखी मांग
ताल ब्यूरो चीफ शिवशक्ति शर्मा
आलोट-ताल तहसील के शिक्षा विभाग में कार्यरत शिक्षकों एवं कर्मचारियों के वित्तीय कार्यों के आहरण एवं संवितरण (ड्रॉइंग एंड डिस्बर्सिंग) संबंधी अधिकार स्थानीय स्तर पर हस्तांतरित किए जाने की मांग उठने लगी है। लंबे समय से इन कार्यों की जिम्मेदारी जावरा तहसील के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय ढोढर की प्राचार्या को सौंपे जाने के कारण शिक्षकों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में नव नियुक्त विकासखंड शिक्षा अधिकारी विनोद कुमार शर्मा को आहरण एवं संवितरण के अधिकार सौंपने की मांग की जा रही है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आलोट-ताल क्षेत्र के शिक्षकों एवं कर्मचारियों के वित्तीय प्रकरणों का निराकरण जावरा में पदस्थ संबंधित अधिकारी एवं बाबू के माध्यम से किया जा रहा है। क्षेत्रीय शिक्षकों का कहना है कि दूरी और आपसी समन्वय के अभाव में उनके कार्यों में अनावश्यक विलंब की स्थिति बनती है, जिससे उन्हें बार-बार संबंधित कार्यालयों से संपर्क करना पड़ता है।
इस संबंध में आहरण एवं संवितरण अधिकारी तथा शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय ढोढर की प्राचार्या श्रीमती आरती सिसोदिया ने जानकारी देते हुए बताया कि उनके स्तर पर कोई कार्य लंबित नहीं है। उन्होंने संबंधित बाबू श्री पिटवा जी से संपर्क करने की बात कही।
वहीं, क्षेत्र के कुछ शिक्षकों ने आरोप लगाया है कि उनके वित्तीय प्रकरणों को लंबित रखा जाता है तथा उनके साथ अपेक्षित सहयोग नहीं मिल पाता। शिक्षकों का यह भी कहना है कि स्थानीय स्तर पर प्रभावी व्यवस्था होने से प्रकरणों का निराकरण समय पर हो सकेगा और अनावश्यक भागदौड़ से राहत मिलेगी। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
स्थानीय स्तर पर अधिकार मिलने से आसान होंगे कार्य
नव नियुक्त विकासखंड शिक्षा अधिकारी विनोद कुमार शर्मा के पदभार ग्रहण करने के बाद शिक्षकों को उम्मीद है कि उनकी समस्याओं का निराकरण अधिक सुगमता से हो सकेगा। शिक्षकों के अनुसार, स्थानीय स्तर पर अधिकारियों की उपलब्धता से वित्तीय प्रकरणों की निगरानी, आवश्यक दस्तावेजों की पूर्ति तथा लंबित मामलों के निराकरण में सुविधा होगी।
शिक्षा विभाग के समक्ष अब प्रमुख मांग यह है कि नियमानुसार आवश्यक प्रक्रिया पूरी करते हुए आहरण एवं संवितरण के अधिकार विकासखंड शिक्षा अधिकारी विनोद कुमार शर्मा को हस्तांतरित किए जाएं, ताकि आलोट-ताल क्षेत्र के शिक्षकों एवं कर्मचारियों को अपने वित्तीय कार्यों के लिए दूसरे तहसील मुख्यालय पर निर्भर न रहना पड़े।
विभागीय निर्णय पर टिकी शिक्षकों की निगाहें
शिक्षकों की इस मांग को देखते हुए संबंधित विभागीय अधिकारियों से अपेक्षा की जा रही है कि वे वर्तमान व्यवस्था की समीक्षा कर व्यावहारिक समाधान निकालें। यदि नियमानुसार स्थानीय स्तर पर अधिकार हस्तांतरित किए जाते हैं, तो इससे वित्तीय कार्यों के निष्पादन में सुगमता आने और शिक्षकों की परेशानियां कम होने की उम्मीद है।
अब देखना यह है कि शिक्षा विभाग शिक्षकों की मांग पर कितनी शीघ्रता से निर्णय लेता है और आलोट-ताल क्षेत्र के शिक्षकों एवं कर्मचारियों को वित्तीय कार्यों के संबंध में राहत मिल पाती है या नहीं।



