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मध्यप्रदेश के विकास में जागरूक सिविल सोसायटी जरूरी: कुलाधिपति  नाहटा


शिक्षा की गुणवत्ता, स्वास्थ्य सेवाएं और रोजगार योग्य कौशल पर जोर; प्रदेश को शैक्षणिक हब बनाने की बात

मंदसौर। देवी अहिल्या  विश्वविद्यालय इंदौर में आयोजित सेमिनार में पूर्व मंत्री एवं मंदसौर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति नरेंद्र नाहटा  ने कहा कि मध्यप्रदेश के समग्र विकास के लिए नए लक्ष्य निर्धारित करने के साथ-साथ एक जागरूक सिविल सोसायटी का होना अत्यंत आवश्यक है, जो इन लक्ष्यों की पूर्ति के लिए सकारात्मक वातावरण तैयार कर सके।
देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग एवं डेवलपमेंट फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में  आयोजित “मध्य प्रदेश का विकास और चुनौतियां” विषयक सेमिनार को संबोधित करते हुए श्री नाहटा ने नीति आयोग की राज्यों की रैंकिंग का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश का विकास मुख्यतः शिक्षा, स्वास्थ्य, इन्फ्रास्ट्रक्चर और आर्थिक स्थिति पर निर्भर करता है, जिन पर मध्यप्रदेश को अभी और गंभीरता से कार्य करने की आवश्यकता है।
श्री नाहटा ने कहा कि शालेय शिक्षा में संख्या आधारित उपलब्धियां उत्साहजनक हैं, लेकिन शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार अभी भी जरूरी है। व्यावसायिक शिक्षा में निजी भागीदारी की वकालत करते हुए उन्होंने कहा कि इससे छात्रों को उनकी रुचि के अनुरूप अवसर मिलेंगे और मध्यप्रदेश को उत्तर एवं मध्य भारत का शैक्षणिक केंद्र बनाने में मदद मिलेगी।
श्री नाहटा ने स्पष्ट कहा कि कॉलेजों और निजी विश्वविद्यालयों की संख्या बढ़ने के बावजूद रोजगार योग्य प्रोफेशनल्स की कमी बनी हुई है, जिसके कारण उद्योग प्रदेश में निवेश करने से हिचकते हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़ने के बावजूद बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए गुजरात और राजस्थान जा रहे हैं। उन्होंने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि मध्यप्रदेश सरकार लगभग 60 हजार करोड़ रुपये ब्याज और किश्तों के भुगतान में खर्च कर रही है।
हालांकि, उन्होंने प्रदेश में सड़कों और बुनियादी ढांचे में हो रहे निवेश की सराहना भी की। यह तीसरा अवसर रहा जब नाहटा विश्वविद्यालय परिसर में प्रदेश के विकास विषयक कार्यक्रम में प्रमुख अतिथि के रूप में शामिल हुए।
कार्यक्रम में देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. गणेश कशडीया, अम्बेडकर  विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर  वर्मा तथा विक्रम विश्वविद्यालय के समाज विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो.  सिसोदिया ने भी अपने विचार रखे।
अंत में अर्थशास्त्र विभाग के अध्यक्ष प्रो. आहूजा एवं डेवलपमेंट फाउंडेशन के श्री आलोक खरे ने आभार व्यक्त किया।

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