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मुंबई–अहमदाबाद उच्च गति रेल परियोजना (508 किलोमीटर) जापान सरकार के तकनीकी एवं वित्तीय सहयोग से निर्माण

मुंबई–अहमदाबाद उच्च गति रेल परियोजना (508 किलोमीटर)जापान सरकार के तकनीकी एवं वित्तीय सहयोग से निर्माण

मुंबई–अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना का अनुभव देश के भावी उच्च गति रेल नेटवर्क के लिए सशक्त आधार सिद्ध हो रहा है। इस परियोजना के माध्यम से विकसित हो रही तकनीकी दक्षता, स्वदेशीकरण और क्षमता निर्माण भविष्य में अन्य उच्च गति रेल गलियारों की योजना एवं क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे

परियोजना के प्रमुख विवरण:

  • टेक्नोलॉजी और सहयोग: जापान सरकार (JICA – जापान अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एजेंसी) तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है, जिसमें जापानी E5 शिंकानसेन ट्रेनें इस्तेमाल की जाएंगी।
  • मार्ग: 508 किमी के कॉरिडोर में 12 स्टेशन शामिल हैं: मुंबई, ठाणे, विरार, बोइसर, वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, वडोदरा, आनंद, अहमदाबाद और साबरमती।
  • विशेषता: इसमें ठाणे क्रीक के नीचे 7 किमी की समुद्री सुरंग सहित 21 किमी लंबी सुरंग का हिस्सा भी शामिल है।
  • प्रगति (फरवरी 2026 तक): संपूर्ण 1,389.5 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण पूरा हो चुका है। गुजरात के सभी 8 स्टेशनों पर काम चल रहा है और कई नदियां पार करने वाले पुलों का निर्माण भी पूरा हो चुका है।
  • उद्देश्य: “मेक इन इंडिया” के तहत स्वदेशी क्षमता विकसित करना और 2026 के अंत में परीक्षण शुरू करने का लक्ष्य है।
यह बुलेट ट्रेन परियोजना न केवल यात्रा को तेज़ और सुरक्षित बनाएगी, बल्कि महाराष्ट्र और गुजरात के बीच आर्थिक कनेक्टिविटी को भी बढ़ावा देगी

मुंबई–अहमदाबाद उच्च गति रेल (एमएएचएसआर) परियोजना (508 किलोमीटर) वर्तमान में जापान सरकार के तकनीकी एवं वित्तीय सहयोग से निर्माणाधीन है। यह परियोजना पूर्णतः ऊँचे वायाडक्ट (एलिवेटेड कॉरिडोर) पर विकसित की जा रही है। कॉरिडोर के स्टेशनों की रूपरेखा में नियंत्रित प्रवेश द्वार, सामान जांच स्कैनर, द्वार फ्रेम धातु अन्वेषक, सीसीटीवी निगरानी सहित उन्नत सुरक्षा व्यवस्थाएँ शामिल की गई हैं

स्वदेशीकरण एवं क्षमता निर्माण

परियोजना के अंतर्गत लंबी स्पैन की स्टील ट्रस गर्डरों का निर्माण भारतीय कार्यशालाओं में किया जा रहा है, जिससे देश की डिजाइन क्षमता सुदृढ़ हो रही है। फुल-स्पैन लॉन्चिंग हेतु प्रयुक्त भारी निर्माण मशीनरी का स्वदेशीकरण कर अब भारत में ही निर्माण किया जा रहा है। स्लैब ट्रैक की अधिकांश सामग्री तथा विशेष ट्रैक मशीनें भारतीय निर्माताओं द्वारा विकसित की जा रही हैं, जिससे घरेलू विनिर्माण क्षमता को बढ़ावा मिला है।

डायनेमिक विश्लेषण एवं डिजाइन में भारतीय एजेंसियाँ भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों के सहयोग से कार्य कर रही हैं तथा दीर्घकालिक विशेषज्ञता विकसित की जा रही है।

नवाचार

भारत में पहली बार 40 मीटर प्री-स्ट्रेस्ड बॉक्स गर्डर (लगभग 1000 मीट्रिक टन) की स्थापना के लिए फुल-स्पैन लॉन्चिंग पद्धति अपनाई गई है, जिससे 16 घंटे के भीतर तेज गति से स्थापना संभव हो सकी है।

एलिवेटेड कॉरिडोर के किनारे स्वदेशी ध्वनि अवरोधक लगाए जा रहे हैं ताकि आसपास के निवासियों को ध्वनि प्रदूषण से राहत मिल सके। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली के सहयोग से ओएचई-पैंटोग्राफ अंतःक्रिया तथा ट्रैक्शन विद्युत आपूर्ति के लिए उन्नत सिमुलेशन मॉडल विकसित किए गए हैं।

भूमिगत स्टेशन का निर्माण भविष्य में 90 मीटर ऊँची इमारत के प्रावधान के साथ किया जा रहा है। साथ ही रेल टर्नओवर प्रिवेंशन डिवाइस का स्वदेशी विकास कर पटरी से उतरने की स्थिति में अतिरिक्त सुरक्षा सुनिश्चित की गई है।

प्रशिक्षण

लगभग 1000 भारतीय इंजीनियरों एवं कुशल कर्मचारियों को जापानी पद्धति में प्रशिक्षित किया गया है और वर्तमान में ट्रैक कार्य उनके पर्यवेक्षण में संपन्न हो रहे हैं। सूरत में विशेष ट्रैक प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किया गया है, जहाँ नियमित प्रशिक्षण एवं पुनः प्रशिक्षण पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।

स्टेशन विकास

उच्च गति रेल स्टेशनों को शहरों के प्रवेश द्वार के रूप में स्थानीय पहचान के अनुरूप डिजाइन किया जा रहा है। यात्री सुविधा हेतु पर्याप्त पार्किंग, ड्रॉप-ऑफ क्षेत्र तथा बहु-माध्यमीय संपर्क व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। निर्माण में कंपन-रोधी उपाय, पवन दाब प्रबंधन और हरित भवन परिषद के प्लैटिनम मानकों के अनुरूप ऊर्जा दक्ष विशेषताओं को समाहित किया गया है।

भू-तकनीकी जांच एवं सुरक्षा

संरचनात्मक मजबूती सुनिश्चित करने के लिए विस्तृत भू-तकनीकी जांच 100 मीटर अथवा विशेष संरचनाओं के मामले में इससे भी कम अंतराल पर की गई है। एक नवीन भू-तकनीकी प्रयोगशाला भी स्थापित की गई है।

भूकंप सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए संरचनाओं का डिजाइन संबंधित भूकंपीय क्षेत्रों के अनुरूप किया गया है। वायाडक्ट एवं पुलों पर स्टील एवं डैम्पर स्टॉपर लगाए गए हैं तथा भूकंप प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली स्थापित की गई है।

परियोजना की प्रगति

यह परियोजना गुजरात, महाराष्ट्र तथा दादरा एवं नगर हवेली केंद्र शासित प्रदेश से होकर गुजर रही है, जिसमें मुंबई, ठाणे, विरार, बोइसर, वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, वडोदरा, आनंद, अहमदाबाद एवं साबरमती सहित 12 स्टेशन प्रस्तावित हैं।

परियोजना हेतु आवश्यक संपूर्ण 1389.5 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण पूर्ण हो चुका है तथा सभी वैधानिक स्वीकृतियाँ प्राप्त कर ली गई हैं। कुल 1651 उपयोगिताओं का स्थानांतरण किया जा चुका है।

गुजरात खंड में 352 किलोमीटर तक नींव एवं पियर कार्य, 342 किलोमीटर गर्डर ढलाई, 331 किलोमीटर गर्डर लॉन्चिंग तथा 152 किलोमीटर ट्रैक बेड निर्माण पूर्ण हो चुका है। महाराष्ट्र खंड में भी नींव, पियर एवं अन्य संरचनात्मक कार्य प्रगति पर हैं।

अब तक 17 नदी पुल पूर्ण हो चुके हैं तथा नर्मदा, माही, ताप्ती एवं साबरमती सहित प्रमुख पुलों का कार्य उन्नत अवस्था में है। ठाणे, सूरत एवं साबरमती डिपो में कार्य तीव्र गति से जारी है। बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स में निर्माण कार्य संतोषजनक प्रगति पर है तथा समुद्र के नीचे लगभग 21 किलोमीटर लंबी सुरंग का कार्य प्रारंभ हो चुका है, जिसमें 4.8 किलोमीटर सुरंग का निर्माण पूर्ण हो चुका है।

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम

‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के अंतर्गत उच्च गति रेल प्रणालियों के स्वदेशी निर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है। इंटीग्रल कोच फैक्टरी एवं भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड के सहयोग से 280 किलोमीटर प्रति घंटा डिजाइन गति वाली उच्च गति ट्रेन सेट का निर्माण कार्य प्रगति पर है।

आर्थिक एवं परिचालन दृष्टिकोण

एमएएचएसआर कॉरिडोर को उच्च आवृत्ति संचालन और अधिक यात्री क्षमता के अनुरूप डिजाइन किया गया है। प्रस्तावित किराया वर्तमान रेल एवं हवाई यात्रा विकल्पों के साथ प्रतिस्पर्धी रखने का विचार है। परियोजना की व्यवहार्यता का मूल्यांकन दीर्घकालिक यात्री मांग, आर्थिक लाभ, समय की बचत और क्षेत्रीय विकास को ध्यान में रखते हुए किया गया है।

31 दिसंबर 2025 तक इस परियोजना पर ₹ 86,939 करोड़ व्यय किए जा चुके हैं।

समर्पित माल गलियारे

रेल मंत्रालय द्वारा पूर्वी समर्पित माल गलियारा (लुधियाना से सोननगर, 1337 किमी) एवं पश्चिमी समर्पित माल गलियारा (जवाहरलाल नेहरू पोर्ट टर्मिनल से दादरी, 1506 किमी) का निर्माण किया गया है। पूर्वी गलियारा पूर्ण रूप से चालू हो चुका है तथा पश्चिमी गलियारे के 1404 किलोमीटर खंड पर परिचालन प्रारंभ हो चुका है।

इन गलियारों के माध्यम से मालगाड़ियों को पारंपरिक नेटवर्क से हटाकर अतिरिक्त पथ उपलब्ध कराए गए हैं। वर्तमान में इन दोनों गलियारों पर औसतन 406 ट्रेनें प्रतिदिन संचालित हो रही हैं, जिससे पारंपरिक रेल नेटवर्क पर यात्री सेवाओं के लिए अतिरिक्त क्षमता सृजित हुई है।

यह जानकारी रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव द्वारा लोकसभा में प्रश्नों के उत्तर में प्रदान की गई।

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