कार्रवाईझालावाड़पचपहाड़ (Pachpahar)

शादी में बुलाए तस्कर और अपराधी, कांस्टेबल को गंवानी पड़ी नौकरी

एसपी की सख्ती: “वर्दी की साख से समझौता नहीं”

भवानीमंडी, 14 फरवरी।

राजस्थान के झालावाड़ जिले में एक कांस्टेबल को अपनी शादी में तस्करों और सक्रिय अपराधियों को बुलाना भारी पड़ गया। पुलिस विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए उसे राज्य सेवा से बर्खास्त कर दिया। यह कार्रवाई जिला पुलिस अधीक्षक अमित कुमार के आदेश पर की गई।

बर्खास्त कांस्टेबल अशोक बिश्नोई, जो भालता थाने में तैनात थे, पर आरोप था कि 1 और 2 फरवरी 2026 को नागौर जिले में आयोजित उनके विवाह समारोह में झालावाड़ और मध्य प्रदेश के कई तस्कर और सक्रिय अपराधी शामिल हुए।

गोपनीय शिकायत से खुला मामला:-

कुछ दिन पूर्व पुलिस अधीक्षक को एक गोपनीय शिकायत प्राप्त हुई थी। शिकायत में दावा किया गया था कि शादी समारोह में अपराध जगत से जुड़े कई चेहरे खुलेआम मौजूद थे। आरोपों की गंभीरता को देखते हुए प्रकरण की जांच सीओ पिड़ावा को सौंपी गई।

जांच के दौरान तकनीकी साक्ष्यों और अन्य प्रमाणों से यह पुष्टि हुई कि समारोह में कुल आठ सक्रिय अपराधी शामिल थे। शादी नागौर में आयोजित हुई थी, जो झालावाड़ से लगभग 500 किलोमीटर दूर है।

बड़ा खुलासा: एनडीपीएस में फ्रीज संपत्ति वाला आरोपी भी पहुंचा :-

जांच में सबसे बड़ा खुलासा यह रहा कि समारोह में पप्पू तंवर नामक व्यक्ति भी शामिल था। पप्पू तंवर के खिलाफ पूर्व में वन विभाग द्वारा अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जा चुकी थी। इतना ही नहीं, उसकी अन्य संपत्तियों को नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सबस्टेंस (एनडीपीएस) अधिनियम की धारा 68 एफ के तहत अवैध अर्जित संपत्ति मानकर फ्रीज किया गया था।

जांच रिपोर्ट में साफ कहा गया कि कांस्टेबल का यह आचरण पुलिस सेवा की आचार संहिता, निष्पक्षता और नैतिक मूल्यों के प्रतिकूल है।

एसपी का स्पष्ट संदेश: “शून्य सहनशीलता”:-

एसपी अमित कुमार ने कहा कि पुलिस बल की साख, निष्पक्षता और जनता का विश्वास सर्वोपरि है। अपराधियों से किसी भी प्रकार की निकटता या संबंध बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। विभाग की शून्य सहनशीलता नीति के तहत यह कठोर कदम उठाया गया है। बर्खास्तगी का आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया।

इस घटना से मिलने वाले बड़े सबक:-

यह मामला केवल एक व्यक्ति की नौकरी जाने का नहीं, बल्कि वर्दी की जिम्मेदारी का आईना है।

🔹 वर्दी सम्मान है, व्यक्तिगत नहीं सार्वजनिक जिम्मेदारी है।

🔹 अपराधियों से निजी संबंध भी सेवा आचरण का उल्लंघन माने जा सकते हैं।

🔹 सोशल मीडिया और तकनीकी साक्ष्य के दौर में कुछ भी छुपा नहीं रहता।

🔹 व्यक्तिगत समारोह भी पेशेवर छवि को प्रभावित कर सकते हैं।

पुलिस सेवा केवल नौकरी नहीं, बल्कि एक नैतिक दायित्व है। एक क्षण की लापरवाही वर्षों की सेवा पर भारी पड़ सकती है।

संदेश साफ है:-

“कानून के रक्षक यदि अपराधियों से संबंध रखेंगे, तो कानून का भरोसा कमजोर होगा।”

झालावाड़ पुलिस की यह कार्रवाई साफ संकेत है कि विभाग अब छवि और अनुशासन के मामले में कोई समझौता नहीं करेगा।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
WhatsApp Icon
Whatsapp
ज्वॉइन करें
site-below-footer-wrap[data-section="section-below-footer-builder"] { margin-bottom: 40px;}