इस वर्ष तक कृषि प्रधान मंदसौर जिले की एक एक इंच कृषि भूमि हो जाएगी सिंचित

इस वर्ष तक कृषि प्रधान मंदसौर जिले की एक एक इंच कृषि भूमि हो जाएगी सिंचित
( महावीर अग्रवाल )
मंदसौर । कृषि प्रधान मंदसौर जिले की एक एक इंच कृषि भूमि इस वर्ष 2026 में हो जाएगी सिंचित। सिंचाई की यह स्थिति हो जाने पर मंदसौर जिला प्रदेश का शायद पहला जिला हो जाएगी जिसकी संपूर्ण कृषि भूमि सिंचित होगी। इस जिले में वर्तमान में तीन हजार करोड़ रु से अधिक लागत की सिंचाई योजनाओं पर तेजी से काम चल रहा है। जुलाई 26 तक या कुछ विलंब भी हुआ तो इस वर्ष के अंत तक लगभग सभी योजनाओं पर काम पूरा होने की संभावना है। एक योजना पर तो 91 प्रतिशत के काम पूरा हो गया है। जिले की सभी कृषि भूमि सिंचित हो जाएगी तब हरित क्रांति का यह जिला देश में एक उदाहरण पेश करेगा और इस जिले की खुशी का इतिहास प्रारंभ होगा।
कृषि प्रधान मंदसौर जिले का भू अभिलेख के आंकड़ों के अनुसार खरीफ का रकबा 3 लाख 63 हजार 459 हेक्टर और रबी का रकबा जिसमें सिंचाई होती है 3 लाख 42 हजार 792 हेक्टर है। आर आई लालचंद शेरपुरिया और पटवारी मनोज चंद्रावत ने बताया कि मंदसौर जिले में एक लाख 34 हजार 968 कुएं हैं जिनमें से 92 हजार 251 पर इलेक्ट्रिक पंप लगे हैं एवं 4782 पर डीजल पंप लगे हैं जिनसे सिंचाई हो रही है। 4115 नलकूप लगे हैं जिनसे 40 हजार हेक्टर से अधिक क्षेत्र में सिंचाई हो रही है। 12 नहरें हे जिनसे 15 हजार 950 हेक्टर में सिंचाई हो रही है।40 तालाबों से 2080हेक्टर कृषि भूमि में सिंचाई हो रही है। इस प्रकार इस जिले की 3 लाख 42 हजार हेक्टर से अधिक कृषि भूमि में कुएं, नलकूप,तालाब एवं नहरों आदि से वर्तमान में सिंचाई हो रही है।
सहायक संचालक कृषि श्री पप्पुसिंह कटारा ने बताया कि इस जिले में 3 लाख 30 हजार हेक्टर से अधिक कृषि भूमि में खरीफ में और 3 लाख हेक्टर में रबी में विभिन्न प्रकार की फसलें इस जिले के किसान बोते हैं।
मंदसौर जिले में सोयाबीन,गेहूं,मक्का,ज्वार, उड़द, तुअर,अफीम, गन्ना,मूंगफली,चना,मसूर,लहसुन, धनिया,मेथी,अलसी,सरसों,तारामीरा,ईसबगोल,प्याज,कलौंजी,चना डालर,तुलसीबीज,तिल्ली आदि कई प्रकार की फसलें होती हैं। कभी अविभाजित इस जिले के राष्ट्रीय स्तर पर गेहूं उत्पादन में पहला और तीसरा और गन्ना उत्पादन में प्रदेश में दूसरा पुरस्कार भी मिल चुका हे। अच्छा गन्ना उत्पादन होता था तब इस जिले में दलौदा में शुगर फैक्ट्री भी थी जिसमें शुगर का अच्छा उत्पादन होता था।
जल संसाधन विभाग के एसडीओ श्री सुरेश पंवार ने बताया कि मंदसौर जिले का कुल भौगोलिक क्षेत्रफल 5518 वर्ग किमी है। यह जिला चम्बल कछार के अंतर्गत आता है। जिले का वर्ष 2025- 2026 में निराबोया क्षेत्र 3 लाख 56 हजार 200 हेक्टर है। वर्ष 2025-2026 में मंदसौर जिले में कुल 131 योजनाएं जिनमें 4 वृहद , 2 मध्यम , एवं 125 लघु सिंचाई योजनाएं निर्मित हैं जानकी कुल वार्षिक रूपांकित सिंचाई क्षमता 1 लाख 75 हजार 365 हेक्टर ( 4007 हेक्टर खरीफ एवं 1 लाख 71 हजार 358 हेक्टर रबी है ) जिले में विभाग द्वारा निर्मित सिंचाई योजनाओं से इस वर्ष कुल 171217 हेक्टर का लक्ष्य रखा गया जो जिले का निराबोया क्षेत्र 356200 ( वर्ष 2025-2026 ) हेक्टर का लगभग 48 प्रतिशत है।
श्री पंवार ने बताया कि 237400 लाख रु लगत की कयामपुर -सीतामऊ दाबयुक्त उद्वहन वृहद सिंचाई परियोजना की 11अप्रैल 2022 को प्रशासकिय स्वीकृति मिलने के बाद इसका अभी तक 74 प्रतिशत काम पूरा हो गया है और मई 2026 तक इसका काम पूरा हो जाएगा। काम पूरा होने पर इससे 112000 हेक्टर क्षेत्र में सिंचाई हो सकेगी।
87662 लाख रु लागत की मल्हारगढ़ दाब युक्त सूक्ष्म वृहद सिंचाई परियोजना की प्रशासकीय स्वीकृति 13 फरवरी 2023 को मिली इसका 91 प्रतिशत काम पूरा हो गया है और अगस्त 2026 तक इसका कार्य पूरा हो जाएगा। काम पूरा होने पर इससे 46500 हेक्टर क्षेत्र में सिंचाई होगी।
741 लाख रु लगत की कोटेश्वर तालाब की क्षमता बढ़ाने की योजना की फरवरी 2022 में स्वीकृति मिलने के बाद अभी तक इस योजना का 75 प्रतिशत कम पूरा हो गया। जुलाई 2026 में इसका कार्य पूरा होने पर इससे 225 हेक्टर में सिंचाई हो सकेगी। 175.04 लाख रु लागत की रेतम बैराज-//का रिहैबिलिटेशन एवं इंप्रूवमेंट का कार्य की अगस्त 2020 में प्रशासकीय स्वीकृति मिलने के बाद इस पर कार्य प्रारंभ किया गया। अभी तक 65 प्रतिशत काम पूरा हो गया है।जून 2026 तक कार्य पूरा होने के बाद इससे 2450 हेक्टर क्षेत्र में सिंचाई हो सकेगी।
सिंचाई विभाग के आंकड़ों के अनुसार अभी 48 प्रतिशत कृषि भूमि में सिंचाई हो रही हे और इस वर्ष लगभग अगस्त 2026 तक सभी योजनाओं के पूरा होने पर जिले की 85 प्रतिशत कृषि भूमि में सिंचाई होगी।
कृषि विभाग की तो लगता है जिले की खेती किसानी की अद्यतन जानकारी का पूरा अभाव है।खरीफ और रबी के रकबे के आंकड़े भी ये किस आधार से देते हैं पता नहीं। इस विभाग के पास जिले में न कुओं की संख्या है और न तालाब , नहरों की संख्या इनके पास जिले में कृषि के सिंचाई के रकबे की जानकारी भी नहीं है। एक समय था जब इस विभाग के पास सिंचाई में लगे कुओं,नहरों ,तालाब कुओं पर लगे पंप आदि के साथ जिले के सिंचित क्षेत्र की संपूर्ण जानकारी रहती थी लेकिन अब इनके पास ऐसी कोई जानकारी नहीं है। दूसरी और भू अभिलेख वो सिंचाई विभाग के जिले में सिंचित क्षेत्र के रकबे में भी अंतर होने से जिला प्रशासन कब यह कह सकेगा कि पूरा जिला हरित क्रांति से सज गया है जिससे प्रदेश शासन जश्न मना सकेगा।
मंदसौर – मल्हारगढ़ तहसील की 293230 लाख रु लागत की मल्हारगढ़ ( शिवना )दाब युक्त सूक्ष्म सिंचाई परियोजना जिसकी अप्रैल 2025 में प्रशासकीय स्वीकृति मिल गई लेकिन केंद्रीय जल आयोग (CWC ) दिल्ली में परीक्षणाधीन है। इस योजना से 60000 हेक्टर में सिंचाई प्रस्तावित है।
अभी तो गांधीसागर जल संसाधन विभाग की 88 करोड़ रु लागत की योजना शासन के पास स्वीकृति के लिए लंबित हे कार्यपालन यंत्री श्री सी एस चंद्रवार ने बताया कि शासन यह योजना दो तीन माह में स्वीकृत होने की संभावना हे। स्वीकृति के बाद इससे 3500 हेक्टर में सिंचाई हो सकेगी।
कृषि प्रधान मंदसौर जिले में कृषि में हो रही सिंचाई और इस वर्ष सिंचाई योजनाओं के पूरा होने पर कृषि भूमि में होने वाली सिंचाई की स्थिति से तो लगता है पूरे जिले की भूमि हरित क्रांति में बदल जाएगा। एक एक इंच कृषि भूमि में किसान सिंचाई का लाभ लेना शुरू कर देंगे लेकिन विभागों के आपसी तालमेल के अभाव में विभागों के आंकड़ों में ही तालमेल नहीं है। सिंचाई के भरपूर साधन होने के बाद क्या जिले के किसान तीन फसल भी ले सकेंगे यह तो यह विभाग बता ही नहीं सकते क्योंकि जबकि इनके पास वर्तमान पर्याप्त आंकड़े ही नहीं हैं। कृषि विभाग की तो जानकारियों को लेकर बहुत ही पुअर स्थिति है ।



