समाचार मध्यप्रदेश रतलाम 13 फरवरी 2026 शुक्रवार

समाचार मध्यप्रदेश रतलाम 13 फरवरी 2026 शुक्रवार
2027 की जनगणना देश की प्रथम डिजिटल जनगणना होगी जनगणना 2027
प्रथम चरण मे 1 मई से 30 मई 2026 तक मकानों की गणना की जाएगी
कलेक्टर की अध्यक्षता में जिला जनगणना समन्वय समिति की बैठक आयोजित
रतलाम : गुरूवार, फरवरी 12, 2026

कलेक्टर श्रीमती मिशा सिंह की अध्यक्षता में कलेक्टर कार्यालय सभाकक्ष में जिला जनगणना समन्वय समिति की बैठक आयोजित हुई। बैठक में अपर कलेक्टर डॉ. शालिनी श्रीवास्तव,पीओ डूडा श्री अरूण पाठक,आयुक्त नगर निगम श्री अनिल भाना, जिला योजना एवं सांख्यिकी अधिकारी बालकृष्ण पाटीदार, जिला सूचना विज्ञान अधिकारी श्रेय भावसार, उपसंचालक जनसंपर्क श्रीमती अनुराधा गहरवाल, जिला जनगणना समन्वय समिति के सदस्य और संबंधित अधिकारी उपस्थित थे। कलेक्टर ने बैठक में सभी संबंधित अधिकारियों को आवश्यक संख्या में कर्मचारियों की जनगणना कार्य के लिए ड्यूटी लगाने और जनगणना निदेशालय भारत सरकार के निर्देशानुसार सभी आवश्यक तैयारियां पूर्ण करने के निर्देश दिए।
बैठक में जनगणना निदेशालय भारत सरकार द्वारा नियुक्त प्रभारी अधिकारी सुश्री ओजस्विनी सांख्यिकीय अन्वेषक ग्रेड दो ने जानकारी देते हुए बताया कि भारत की जनगणना 2027 दो चरणों मे की जाएगी। प्रथम चरण 01 मई 2026 से 30 मई 2026 तक आयोजित किया जाएगा। प्रथम चरण में मकान सूचीकरण और मकानों की गणना की जाएगी। जनगणना 2027 का दूसरा चरण फरवरी 2027 में आयोजित किया जाएगा। दूसरे चरण में जनसंख्या गणना की जाएगी।
प्रथम चरण में प्रगणक और पर्यवेक्षक द्वारा घर-घर दस्तक देकर मकान सूचीकरण का कार्य 01 मई 2026 से 30 मई 2026 तक किया जाएगा। मकान सूचीकरण के कार्य के लिए स्वगणना का विकल्प 16 अप्रैल से 30 अप्रैल 2026 तक प्रथम चरण के पूर्व 15 दिन तक उपलब्ध रहेगा। मकान सूचीकरण के कार्य में प्रगणक और पर्यवेक्षक द्वारा शासन द्वारा अधिसूचित 33 सवाल पूछे जाएगें।
दुसरे चरण में जनसंख्या की गणना का कार्य फरवरी, 2027 में होगा। जनसंख्या की गणना के दौरान प्रत्येक व्यक्ति की गणना की जाएगी साथ ही व्यक्तियों के सम्बन्ध में अन्य विभिन्न बिन्दुओं जैसे- आयु,लिंग,वैवाहिक स्थिति, धर्म, दिव्यांगता, मातृभाषा, साक्षरता, शैक्षणिक योग्यता, आर्थिक क्रियाकलाप, प्रवास, प्रजननता विवरण इत्यादि पर जानकारी एकत्रित की जाएगी।
जनगणना 2027 देश की प्रथम डिजिटल जनगणना होगी, जिसमें एच एल ओ एप्लीकेशन के माध्यम से आंकड़ो का संकलन किया जाएगा। जनगणना के समस्त कार्य की रियल टाइम मॉनिटरिंग सेन्सस् मेनेजमेन्ट एंड मॉनिटरिंग सिस्टम(सीएमएमएस) पोर्टल के माध्यम से की जाएगी। इसके अतिरिक्त, निवासियों को अपना जनगणना डेटा स्वयं ऑनलाइन भरने की सुविधा प्रदान करने के लिए स्वगणना वेब पोर्टल विकसित किया जाएगा।
जनगणना से संबंधिन विभिन्न कार्यकलापों का निष्पादन जनगणना अधिनियम 1948 एवं जनगणना नियम 1990 के प्रावधानों के तहत किया जाता है। जनगणना के दौरान संकलित व्यक्तिगत जानकारियाँ पूर्णतः गोपनीय होती हैं और इसे किसी अन्य के साथ साझा नहीं किया जाता है साथ ही एकत्रित की गई व्यक्तिगत जानकारी को कहीं पर भी साक्ष्य के लिए उपयोग नहीं किया जा सकता। जनगणना 2027 के प्रगणक, पर्यवेक्षक या कोई अन्य व्यक्ति द्वारा किसी भी प्रकार के ओटीपी या बैंक डिटेल्स की मांग नहीं की जाएगी। जनगणना 2027 के लिए मास्टर ट्रेनरों द्वारा फील्ड ट्रेनरों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। फील्ड ट्रेनरों द्वारा प्रगणक एवं पर्यवेक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। जनगणना 2027 में भाग लेने वाले प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों को शासन द्वारा मानदेय भी दिया जाएगा।
============
सफलता की कहानी रासायनिक खेती छोड़ प्राकृतिक अपनाकर प्राप्त किया तीन गुना मुनाफा-चंद्रभानू चौधरी
रतलाम : गुरूवार, फरवरी 12, 2026,

प्राकृतिक खेती अपनाने वाले रतलाम जिले के ग्राम धामनोद निवासी किसान चंद्रभानू चौधरी ने बताया कि पहले उन्होंने कुछ समय तक रसायन आधारित खेती की, लेकिन इससे कीट-पतंगों एवं रोगो की समस्या बढ़ी, फसलें खराब होने लगीं और लगातार केमिकल डालने के बावजूद भी सुधार नहीं हो पा रहा था। इससे उत्पादन घटने के साथ-साथ लागत लगातार बढ़ती चली गई। थक-हार कर उन्होंने पुनः अपनी पारंपरिक प्राकृतिक खेती को अपनाया। इस दौरान कृषि विभाग एवं आत्मा विभाग से उन्हें तकनीकी मार्गदर्शन मिला। विभागीय अधिकारियों द्वारा खेत पर आकर नियमित निरीक्षण और परामर्श दिया गया, जिससे प्राकृतिक खेती को वैज्ञानिक तरीके से अपनाने में मदद मिली।
किसान चंद्रभानू चौधरी ने बताया कि प्राकृतिक खेती अपनाने से केमिकल एवं फर्टिलाइजर पर होने वाला पूरा खर्च बच गया। पहले सभी खर्च काटने के बाद लगभग 5 लाख रुपए वार्षिक बचत होती थी, जबकि अब लगभग 15 से 20 लाख रुपए तक वार्षिक शुद्ध लाभ हो रहा है। उन्होने बताया कि हर रविवार को वे कस्तुरबा नगर रतलाम में स्वयं की दुकान अंबिका प्राकृतिक उत्पाद पर प्राकृतिक सब्जियां एवं फल लोगो को उपलब्ध कराते है। जिसका पूरा लाभ उन्हें ही प्राप्त होता है। मजदूरी खर्च निकालने के बाद भी करीब 15 लाख रुपए की बचत होती है। उन्होंने कहा कि यह खेती न केवल आर्थिक रूप से लाभदायक है, बल्कि इससे शुद्ध और स्वास्थ्यवर्धक सब्जियां उपभोक्ताओं तक पहुंचती हैं।
उन्होंने बताया कि वे जीवामृत, घनजीवामृत, दशपर्णी अर्क, वर्मी कम्पोस्ट स्वयं तैयार करते हैं, जिनमें गाय का गोबर, गोमूत्र, गुड़ और बेसन एवं आसानी से उपलब्ध पौधो की पत्तियों का उपयोग किया जाता है। साथ ही वैज्ञानिक पद्धति से ड्रिप इरीगेशन एवं फव्वारा पद्धति अपनाकर पानी की भी बचत की जिससे कम पानी मे भी ज्यादा फसलों का उत्पादन कर पाते है। यदि अधिक से अधिक किसान प्राकृतिक खेती को अपनाएं, तो न केवल उनकी आय बढ़ेगी, बल्कि सभी का स्वास्थ्य और पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा।



