नीमचमध्यप्रदेश

20 बच्चों की जान बचाकर कंचन बाई की मौत के मामले में नया मोड़: प्रशासन ने किया खंडन

-प्रशासन ने कहा – आंगनवाड़ी के बच्चों की जान बचाने में नहीं हुई कंचन बाई की मौत

मध्यप्रदेश के नीमच जिले में एक खबर पूरे भारत देश में सुर्खियों में है।वह है कंचन बाई की आंगनवाड़ी केंद्र पर 20 बच्चों की जान बचाने में ख़ुद मधुमक्खियों के डंक सहती रही और तिरपाल तथा दरी में छिपाकर बच्चों की जान बचाई और मधु मक्खियों के डंक से उसकी मौत हो गई। कंचन बाई के साहस और हिम्मत की यह खबर राष्ट्रीय स्तर की खबर बनी। आज तक सहित कई न्यूज़ चैनलों ने इस खबर को प्रमुखता से उठाया। पर बुधवार शाम को नीमच जिला प्रशासन ने एक प्रेस नोट जारी कर यह बताया कि कंचन बाई ने किसी बच्चें की जान नहीं बचाई, बल्कि वह ख़ुद मधुमक्खी के हमले से बचने के लिए आंगनवाड़ी केंद्र में घुस गई, इससे पहले ही अन्य आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ने बच्चो पर दरी व तिरपाल डाल दिया था। इससे स्पष्ट है कि कंचन बाई ने किसी बच्चें की जान नहीं बचाई।

जिला प्रशासन नेजारी किया  प्रेस नोट :- 02 फरवरी सोमवार को आंगनवाड़ी केंद्र रानपुर परियोजना जावद में स्व सहायता समूह की अध्यक्ष श्रीमती कंचन बाई की आंगनवाड़ी के बच्चों को मधुमक्खी के हमले से बचाने में हुई मृत्यु की घटना के सम्बन्ध में वस्तुस्थिति निम्नानुसार है:-

परियोजना अधिकारी जावद श्रीमती आभा पाटीदार से प्राप्त जानकारी अनुसार ग्राम रानपुर में एक आंगनवाड़ी केंद्र संचालित है और आंगनवाड़ी भवन के पास ही प्राथमिक शाला भवन है परंतु प्राथमिक शाला भवन बच्चों हेतु उपर्युक्त नहीं है और जर्जर स्थिति में है इस कारण आंगनवाड़ी भवन में ही प्राथमिक शाला संचालित होती है। दिनांक 02 फरवरी 26 सोमवार को दोपहर 03:30 बजे मृतका श्रीमती कंचनबाई अध्यक्ष जय माता दी स्व सहायता समूह एमडीएम आंगनवाड़ी भवन से लगभग 50 मीटर दूर बने हैंडपंप पर कपड़े धो रही थी और मृतका के दोनों बच्चे पास ही खेल रहे थे। उसी समय मधुमक्खियों ने मृतका पर हमला कर दिया। मधुमक्खी के हमले से बचने के लिए मृतका कंचनबाई ने आंगनवाड़ी भवन की ओर दौड़ लगाई इस कारण मधुमक्खियां भवन की ओर आने लगी। उस समय आंगनवाड़ी में प्रतिदिन की तरह प्राथमिक शाला संचालित हो रही थी तब शिक्षिका श्रीमती मंगला मालवीय द्वारा शाला में मधुमक्खियों को आता देख तत्काल मधुमक्खियों से शाला में पढ़ रहे 20 बच्चो को दरी व तिरपाल से ढंक दिया जिससे कि बच्चे सुरक्षित रहे। दोपहर 03:30 बजे कोई भी आंगनवाड़ी केंद्र का बच्चा वहां पर उपस्थित नहीं था बल्कि शाला संचालित हो रही थी। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता श्रीमती संगीता मेघवाल एवं सहायिका श्रीमती विद्या मेघवाल ग्राम में कुपोषित बच्चे के घर गृहभेंट के लिए गई हुई थी। घटना के बाद शिक्षिका श्रीमती मंगला मालवीय द्वारा मृतका के परिजन को घटना की सूचना दी और तत्पश्चात मृतका द्वारा वहां से घर की ओर प्रस्थान कर लिया गया। आंगनवाड़ी में बच्चों की उपस्थिति का समय दोपहर 01:00 बजे तक ही निर्धारित है और उक्त समय प्रतिदिन की तरह प्राथमिक शाला आंगनवाड़ी भवन में संचालित हो रही थी।

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