सरकारी चिकित्सालय में डॉक्टरो की पोस्टिंग को लेकर राजनीतिक इच्छा शक्ति की कमी

सरकारी चिकित्सालय में डॉक्टरो की पोस्टिंग को लेकर राजनीतिक इच्छा शक्ति की कमी
भवानीमंडी । ( जगदीश पोरवाल ) वाकय भवानीमंडी की राजनीति नगर के वाशिन्दो के लिए अनुकुल नही है । सरकारी चिकित्सा सेवा के क्षेत्र में तो और भी हालत दयनीय है ।सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भवानीमंडी पर आसपास के ग्रामीण क्षेत्र व इससे सटे मध्य प्रदेश के करीब 2 लाख की जनसंख्या के मरीजो के इलाज का भार है । लेकिन अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के कारण गंभीर बीमारियों के मरीजों को रेफर कर दिया जाता है ।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भवानीमंडी में कुल 22 डॉक्टरों की पोस्टिंग है जिसमें से मात्र 12 डॉक्टर ही मौजूद है ।गौरतलब तो यह है कि भवानीमंडी जैसे नगर के सरकारी अस्पताल में ना तो जनरल सर्जन है और ना ही स्त्री और प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉक्टर है , अस्पताल में आने वाले मरीजों में सबसे ज्यादा मरीजों की संख्या भी इन दोनों विशेषज्ञ डॉक्टरों की रहती है । इन दोनों से संबंधित अस्पताल में आने वाले मरीजों को झालावाड़ रेफर कर दिया जाता है ।चिकित्सा प्रभारी डॉक्टर रोहिताश ने बताया कि विगत एक वर्ष से स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ व जनरल सर्जन का पद रिक्त है ।
इसके लिए दोषी है तो राजनीति करने वाले नेताओ की इच्छा शक्ति का अभाव ।
झालावाड़ जिले में नियुक्त हुए 28 विशेषज्ञ डॉक्टर :-
बुधवार को डॉक्टर की जो सूची जारी हुई है उसके अंतर्गत 28 विशेषज्ञ डॉक्टरों को झालावाड़ जिले में नियुक्त किया गया है ।झालावाड़ में मेडिकल कॉलेज के साथ-साथ जिला चिकित्सालय भी है जहां डॉक्टर का पूरा पावर हाउस मौजूद है ,उसके बावजूद भी पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर अपने विधानसभा क्षेत्र झालरापाटन में 28 में से 17 विशेषज्ञ डॉक्टरों को लगवाया है । झालावाड़ में पांच, झालरापाटन में पांच ,पिड़ावा में चार , सुनेल में तीन विशेषज्ञ डॉक्टर को नियुक्त किया गया है ।
डग विधानसभा क्षेत्र के भवानीमंडी में चार डॉक्टर को नियुक्त किया गया लेकिन इन चारों में भी स्त्री रोग विशेषज्ञ और जनरल सर्जन को नियुक्त नहीं किया गया है । डग में चार और चौमहला में दो विशेषज्ञ डॉक्टरों को लगाया गया है ।जबकि खानपुर और मनोहरथाना विधानसभा क्षेत्र के चिकित्सालय में एक-एक विशेषज्ञ डॉक्टर को लगाया गया है ।
भवानीमंडी में मरीजके इलाज की निर्भरता निजी चिकित्सालय पर :-
भवानीमंडी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर सर्जन और स्त्री रोग विशेषज्ञ नहीं होने के कारण गरीब मरीजों के लिए आफत खड़ी हो जाती है । या तो उन्हें इलाज के लिए झालावाड़ रैफर कर दिया जाता है या फिर उन्हें भारी भरकम राशि का भुगतान कर निजी चिकित्सालय में जाना पड़ता है । हांलकि निजी चिकित्सालय में मरीजों को तत्कालिक रूप से यह सुविधा मिल जाती है ।करीब एक दर्जन से ज्यादा निजी अस्पतालों में स्थानीय ,आसपास ग्रामीण क्षेत्रो व मध्यप्रदेश के मरीजों की काफी भीड़ रहती है ।
पिछले बजट में घोषित उप जिला चिकित्सालय का मामला अभी भी जमीन आवंटन के अधर झूल में है :-
भवानीमंडी में उप जिला चिकित्सालय खोलने के लिए प्रशासन द्वारा पांच किलोमीटर दूर मांडवी में 15 बीघा जमीन आवंटित की गई थी, लेकिन भवानीमंडी से ज्यादा दूर होने के कारण उस जमीन का मामला भी अधर झूल में लटक गया है,अब नए सिरे से भवानीमंडी क्षेत्र में ही उप जिला चिकित्सालय खोलने के लिए जमीन देखी जा रही है लेकिन फिलहाल अन्य जगहों पर अभी तक जमीन फाइनल नहीं हुई है ।



