दलौदामंदसौर

22 जनवरी भारत के आत्म-सम्मान और सांस्कृतिक पुनरुत्थान का वार्षिक उत्सव बन गया है – झाला

22 जनवरी भारत के आत्म-सम्मान और सांस्कृतिक पुनरुत्थान का वार्षिक उत्सव बन गया है – झाला

22 जनवरी बुधवार साल 2026 में हम अयोध्या में प्रभु श्री राम की प्राण प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ मना रहे हैं। 22 जनवरी का दिन भारतीय इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो चुका है। यह अवसर केवल एक मंदिर के निर्माण का नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक पुनर्जागरण के एक नए युग का प्रतीक है। यह कहना है विश्व हिंदू परिषद के विभाग मंत्री अनुपाल सिंह झाला का उन्होंने कहा कि, रामलला विराजमान द्वितीय स्थापना दिवस आस्था, उल्लास और गौरव का प्रतीक पर्व है ।
22 जनवरी 2024 को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या के भव्य मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की थी, तब पूरा विश्व श्री राममय हो गया था। आज, दो साल बाद, उस ऐतिहासिक क्षण की स्मृति हमारे हृदय में और भी गहरी हो गई है। द्वितीय स्थापना दिवस हमें याद दिलाता है कि संकल्प जब अडिग हो, तो सदियों का सपना भी साकार होता है।
एकता और समरसता का प्रतीक
रामलला का यह मंदिर केवल पत्थरों और नक्काशी से बना ढांचा नहीं है, बल्कि यह करोड़ों भारतीयों के धैर्य और न्याय की जीत का प्रतीक है। भगवान राम के मर्यादा पुरुषोत्तम रूप का अनुसरण करते हुए यह मंदिर समाज में जाति, संप्रदाय और भेदभाव से ऊपर उठकर राम राज्य की परिकल्पना को साकार करने का संदेश देता है।
द्वितीय स्थापना दिवस पर हमें भगवान राम के आदर्शों – सत्य, न्याय और सेवा – को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लेना चाहिए। 22 जनवरी अब एक तिथि मात्र नहीं है यह भारत के आत्म-सम्मान और सांस्कृतिक पुनरुत्थान का वार्षिक उत्सव बन गया है।
500 वर्षों की प्रतीक्षा का फल आज साक्षात दिव्य दर्शन के रूप में हमारे सामने है,  22 जनवरी को अयोध्या धाम में प्रभु श्री रामलला के प्राण प्रतिष्ठा के द्वितीय स्थापना दिवस की आप सभी को कोटि-कोटि बधाई। आइए, आज फिर अपने घरों में दीये जलाएं और राम राज्य की परिकल्पना को साकार करने का संकल्प लें। रामलला के विराजमान होने के सफल 2 वर्ष यह कोई सामान्य तिथि नहीं है। वह दिन है जिसने भारत के मस्तक पर गौरव का तिलक लगाया था। आज से ठीक दो वर्ष पहले, हमने अपनी आंखों से इतिहास रचते देखा था जब राम लला अपने भव्य महल में विराजमान हुए थे।
भगवान राम का मंदिर केवल ईंट-पत्थरों से नहीं बना है; इसमें करोड़ों भारतीयों की श्रद्धा और सदियों का धैर्य लगा है। इन दो वर्षों में हमने देखा है कि कैसे अयोध्या ने पूरी दुनिया को शांति और सद्भाव का मार्ग दिखाया है।
राम जी का मंदिर बनने का अर्थ केवल दर्शन करना नहीं है, बल्कि उनके मर्यादा पुरुषोत्तम स्वरूप को अपने आचरण में उतारना है। हमें संकल्प लेना चाहिए कि हम एक ऐसे समाज का निर्माण करेंगे जहाँ न्याय, प्रेम और समरसता हो। श्री झाला ने बताया कि 22 जनवरी 2024 को मुझे यह सौभाग्य मिला था कि मैं प्राण प्रतिष्ठा के वक्त अयोध्या में संत सेवा में लगा हुआ था ।
अवध में फिर दीप जलेंगे
लौट आए हैं राघव, अपने भव्य धाम में,
गूंज रहा है विश्व अब, बस राम-राम के नाम में।
दो वर्ष हुए उस पल को, जब इतिहास बदल गया… सदियों का वह लंबा सूरज, सुनहरी भोर में ढल गया…वही तिथि है, वही समय, वही हर्ष का उल्लास है… अब अयोध्या नगरी में, फिर खुशियों का वास है… जो सपना देखा था पुरखों ने, उसे साकार होते देखा है… हमने न्याय की चौखट पर, खिंची अमित रेखा है… नूतन विग्रह, दिव्य रूप, मस्तक पर चन्दन सोहे, मंद- मंद वह मुस्कान मधुर, हर भक्त का मन मोहे… पाँच सौ वर्षों की पीड़ा, अब दर्शन बनकर खिलती है, राम की कृपा से ही तो, जन-जन को शक्ति मिलती है… न धर्म छोटा, न जाति बड़ी, ‘राम’ सबके आधार हैं… वही मर्यादा, वही त्याग, वही जीवन का सार हैं… शबरी के फल, केवट की नाव, जैसा प्रेम जगाना है… रामलला के चरणों में, अब शीश हमें झुकाना है… आओ मिलकर दीप जलाएं, खुशियों का त्यौहार मनाएं… द्वितीय स्थापना दिवस पर, नीमच को स्वर्ग बनाएं।

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