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सिन्धी समाज को संगठित रहना चाहिए- आचार्य श्री रामानुज


तीन कन्याओं के विवाह हेतु 3 लाख रू. देने की घोषणा की
मन्दसौर। दुबई( यू ए ई ) के नीचे फारस की खाड़ी से सिन्धी समाज के इतिहास का आरंभ होता है, वेदों में भगवान श्री वरूणदेवजी के स्वभाव में अत्यन्त ही सरलता के दर्शन होते है। शास्त्रों  एवं शुक्ल यजुर्वेद वेदों में भी भगवान श्री वरूणदेवजी के सरलता एवं सहजता के दर्शन होते है। जहां पर जल यानी पानी है वहां से वरूणदेव का अवतार प्रारंभ होता है।
भगवान श्री झूलेलाल जी एवं ‌सिन्धु‌ सभ्यता पर उक्त दुर्लभ जानकारी श्री झूलेलाल सिन्धु महल में आयोजित एक सम्मान समारोह में आचार्य मर्मज्ञ रामानुज महाराज ने सिन्धी समाज की उपस्थित संगत को अपने मुखारविंद से अमृतमयी वर्खा में कही।
इस आशय की जानकारी सिन्धु महल के उपाध्यक्ष नन्दू आडवानी ने देते हुए बताया कि आचार्य श्री ने कहा कि वेदों में रावण के वरुण लोक में जाने का उल्लेख मिलता है, आपने अपने प्रवचनों में कहा कि सिन्धी समाज को संगठित रहकर अनुशासन की मर्यादा में जीवन जीना चाहिए।
आपने नगर में चलरही विशाल रामकथा का उल्लेख करते हुए 21 कन्याओं के सामूहिक विवाह के आयोजन की जानकारी देते हुए इस महायज्ञ में सिन्धी समाज से आहूति की अपेक्षा की तो पूज्य सिंधी जनरल पंचायत के अध्यक्ष वासुदेव सेवानी ने उनकी माता स्व. श्रीमती जेटी बाई आसनदास सेवानी की पुण्य स्मृति में उनके सुपुत्रो सुन्दर दास, जयकुमार, वासुदेव सेवानी परिवार, पूज्य सिन्धी भाई बंध पंचायत सामूहिक विवाह समिति की ओर से एक कन्या के विवाह एवं स्व. सेठ दुलहानामल (दरबार) ककनानी, स्व.श्रीमती सीताबाई शितलप्रसाद ककनानी, स्व. हिना ककनानी की पावन स्मृति में प्रमोद एवं शौकि ककनानी ने एक कन्या हेतु एक-एक- लाख रू. याने 3 कन्याओं के विवाह हेतु 3 लाख रुपये कन्याओं के विवाह हेतु को देने की घोषणा की।
प्रारंभ में आचार्यश्री ने भगवान श्री झूलेलाल की प्रतीमा की पूजा अर्चना संस्कार सम्पन्न कर‌ दीप प्रज्वलित किया। आपश्री का स्वागत सत्कार सिंधु महल परिवार के दृष्टानन्द नैनवानी, वासुदेव खैमानी, नन्दू आडवानी, पुरूषोत्तम शिवानी, काऊ जजवानी, वासुदेव सेवानी, गिरीश भगतानी, मनोहर नैनवानी, डॉ. सुरेश पमनानी, ताराचन्द जेठवानी, दयाराम जैसवानी, रमेश लवाणी, सिन्धी समाज के राम कल्याणी , रुपचंद होतवानी,नरेश जजवानी,प्रमोद ककनानी, राजेश चाहूजा, प्रीतम खैमानी, सुंदर सेवानी, रूपचद होतवानी, शौंकी ककनानी, राजेश ज्ञानानी, सुरेश बाबानी एवं मातृ शक्ति आदि ने कर आशीर्वाद प्राप्त किया। कार्यक्रम का संचालन पुरुषोत्तम शिवानी ने किया व कन्या विवाह के प्रसंग के सम्बन्ध में कहा‌‌ कि सिन्धी समाज में किसी भि‌ शुभ कार्य में सर्व प्रथम कन्या कि पूजा कि जाती है व परिवार में कन्या द्वारा पुरुष सदस्य के चरण छूना‌ वर्जित है ।
आभार प्रदर्शन संयोजक दृष्टानन्द नैनवानी एवं गिरधारी लाल (काऊ) जजवानी ने प्रकट किया।

पुरुषोत्तम शिवानी ने आचार्य श्री रामानुज जी के लिए ‘मर्मज्ञ- शब्द संबोधन की व्याख्या करते हुए कहा कि -मर्मज्ञ एक ऐसा शब्द है जो किसी व्यक्ति की गहरी समझ और अंतर्दृष्टि को दर्शाता है। यह शब्द अक्सर किसी ऐसे व्यक्ति के लिए प्रयोग किया जाता है जो जीवन की जटिलताओं को गहराई से समझता है और जो अपने विचारों और भावनाओं को स्पष्ट रूप से व्यक्त कर सकता है। मर्मज्ञ व्यक्ति अक्सर अपने आसपास के लोगों को प्रेरित और मार्गदर्शन करते हैं, क्योंकि वे जीवन की समस्याओं का समाधान निकालने में सक्षम होते हैं।

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