नशीले पदार्थों के रोकथाम एवं मानसिक स्वास्थ्य विषय पर जागरूकता कार्यक्रम एवं कवि सम्मेलन का आयोजन

नशीले पदार्थों के रोकथाम एवं मानसिक स्वास्थ्य विषय पर जागरूकता कार्यक्रम एवं कवि सम्मेलन का आयोजन
गोरखपुर नशीले पदार्थों की रोकथाम और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित कार्यक्रम एक सराहनीय पहल है। यह आयोजन वासुदेव तिवारी सेवा संस्थान और राष्ट्रीय सामाजिक रक्षा संस्थान के संयुक्त प्रयासों से जिला कारागार गोरखपुर में संपन्न हुआ, जिसमें समाज के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।कार्यक्रम में मुख्य अतिथि वशिष्ठ नारायण सिंह, जिला समाज कल्याण अधिकारी, ने नशे को एक गंभीर सामाजिक समस्या बताते हुए इसे समाज में फैलती गंदगी से जोड़ा। उन्होंने नशे के कारण बढ़ती हिंसा, शोषण और दुर्घटनाओं पर चिंता जताई तथा इस तरह के जागरूकता कार्यक्रमों की आवश्यकता पर बल दिया। विशिष्ट अतिथि धराधाम प्रमुख डॉ. सौरभ पाण्डेय ने नशे को जीवन को समय से पहले नष्ट करने वाली बुराई करार दिया और इसे समाज के लिए अभिशाप बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन नशे से प्रभावित लोगों को मुख्यधारा में लाने में मददगार हो सकते हैं।वरिष्ठ जिला कारागार अधीक्षक बी.के. पाण्डेय ने इस पहल की प्रशंसा की और सामाजिक संस्थाओं के योगदान को समाज को सही दिशा देने में महत्वपूर्ण बताया। कार्यक्रम की आयोजक डॉ. रीना मालवीय, जो वासुदेव तिवारी सेवा संस्थान की सचिव और मनोविज्ञान की प्रोफेसर हैं, ने नशे से पीड़ित व्यक्तियों के लिए मनोवैज्ञानिक उपचार की सुविधा पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि उनका केंद्र नशे की लत से मुक्ति दिलाने और पीड़ितों को समाज में पुनर्स्थापित करने के लिए कार्यरत है।कार्यक्रम में सांस्कृतिक रंग भी देखने को मिला, जब युवा शायर मिन्नत गोरखपुरी ने अपनी शायरी से बंदियों का मन मोह लिया। उनकी पंक्तियों ने उपस्थित लोगों को भावुक कर दिया और तालियों की गड़गड़ाहट से माहौल जीवंत हो उठा। इसके साथ ही, बंदियों के बीच फल वितरण कर मानवीय संवेदना का परिचय दिया गया।यह आयोजन न केवल नशे की रोकथाम और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने में सफल रहा, बल्कि यह भी दर्शाता है कि समाज और प्रशासन के संयुक्त प्रयासों से इस समस्या का समाधान संभव है। ऐसे कार्यक्रम नशे के खिलाफ लड़ाई में एक सकारात्मक कदम हैं, जो युवाओं और समाज को बेहतर भविष्य की ओर ले जा सकते हैं।