धर्म संस्कृतिदलौदामंदसौर जिला

यहां तो देरानी जेठानी भी साल भर तक नहीं बोलती पर राजा दशरथ की तीनों बहन की तरह रहती थी- पंडित महेश पांडे

==============0000=================

कुचड़ौद । (दिनेश हाबरिया) धर्म की धूरी को राजा दशरथ ने धारण किया था। राजा दशरथ अयोध्या के वासियों को पुत्र की तरह मानते थे। पुत्र जैसा ही व्यवहार करते थे। राजा दशरथ जी महाराज का नाम ले लिया, तो कोटि यज्ञ का फल मिलता है। क्योंकि इनके घर साक्षात नारायण ने जन्म लिया। यह बात भोलिया में पंडित महेश पांडे ने 5 मंदिरों के स्वर्ण कलश स्थापना के अवसर पर नौ दिवसीय रामकथा के दौरान कही।

आपने कहा जब तक इंसान सुखी रहता है। उसे कुछ नहीं दिखता है। जब दुख आता है। तब प्रभु को याद करता है। अगर सुख के समय ही भगवान का नाम लिया होता, तो दुख नहीं आता। संकट में सब भगवान को याद करते हैं। मंदिर जाते हैं। जो प्रभु की शरण में गया, प्रभु सब पर कृपा करता है। भगवान सज्जन के साथ दुष्ट पर भी कृपा करते हैं।

आपने बताया गुरु ही एक ऐसा व्यक्ति है, जो जीवन का मार्ग बताता है। राजा दशरथ की तीन रानियां थी। तीनों बहन की तरह रहती थी। पर यहां तो देरानी जेठानी भी साल भर तक नहीं बोलती है। रिश्तो में अपनापन लाना है, तो राम कथा सुनो। जहां एक पति की तीन पत्नियां होते हुए भी, बहनों की तरह रहती। पर यहां तो सास बहू, देरानी जेठानी, कि रिश्ते ही खराब है। पिता पुत्र, सास बहू, भाई भाई के रिश्ते मैं अपनापन सीखना है, तो रामायण सुनो। राम कथा सुनो।

कथा प्रतिदिन 12:00 से 5:00 तक हो रही। 30 मई को गांव के पांचों मंदिर पर स्वर्ण कलश स्थापना के साथ यज्ञ पूर्णाहुति एवं रामकथा विश्राम के साथ महा आरती पश्चात महाप्रसादी स्वरुप भंडारा होगा। कथा में अंचल के सैकड़ों भक्तजन उपस्थित रहे।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
site-below-footer-wrap[data-section="section-below-footer-builder"] { margin-bottom: 40px;}