परमात्मा से मिलने का माध्यम है श्री मद् भागवत कथा – स्वामी यज्ञमणी महाराज

परमात्मा से मिलने का माध्यम है श्रीमद् भागवत कथा – स्वामी यज्ञमणी महाराज
नीमच-कलश यात्रा के साथ हुआ श्रीमद् भागवत कथा का श्री गणेश मंडफिया धाम सांवलिया जी में आज से सप्त दिवसीय श्रीमद् भागवत महापुराण कथा का भव्य शुभारंभ 51 कलश व गाजे बाजे के साथ कलश यात्रा सांवलिया सेठ जी के मन्दिर से आरंभ होकर शहर की विभिन्न गलियों से होते हुए गोवर्धन बस स्टैंड स्थित कथा स्थल तक पहुंची।विधि विधान से पुजन कर गुरुदेव के द्वारा कथा का शुभारंभ किया गया। गुरुदेव, नारद जी ने भक्ति देवी के कष्ट की निवृत्ति के लिए श्रीमद् भागवत कथा का साप्ताहिक अनुष्ठान किया था। जहां संत कुमारों ने भागवत का प्रवचन करते हुए नारद के मन का संशय दूर किया। इसी कथा को धुंधकारी प्रेत ने अपने अग्रज से श्रवण किया और प्रेत योनि से मुक्ति पाकर विष्णु लोक को प्राप्त हुआ। गुरुदेव ने कहा कि भगवत कथा के श्रवण करने से जीव के सभी पाप कर्म मिट जाते हैं। अंत में सामूहिक आरती और प्रसाद वितरण किया गया। जैसा कि सभी को विदित है। की दुनिया में परमात्मा के सिवा और कोई नहीं है। हर जीव और आत्मा परमात्मा से मिलना चाहती है। और जब तक परमात्मा की प्राप्ति नहीं होती तब तक यह जीव अशांत होकर छटपटाता रहता है। परमात्मा से मिलने का सिर्फ एक ही माध्यम है। और वह है श्री मद् भागवत कथा कीर्तन सत्संग इसके द्वारा मनुष्य ईश्वर को प्राप्त करता है। और सुख की अनुभूति प्राप्त करता है। उक्त विचार मध्य प्रदेश नीमच जिले से पधारे गुरुवर स्वामी यज्ञ मणि जी महाराज के द्वारा कथा में व्यक्त किए गए गुरुदेव का बड़ा पवित्र भाव है अभी तक 316 कथाएं गुरुदेव के द्वारा अलग अलग जगह की गई है। और इन कथाओं के माध्यम से कई मंदिरों का जीर्णोद्धार और नवनिर्माण करवाया है। यह जो कथा मंडफिया में चल रही है इस कथा में क्षेत्र के सभी भक्त श्रद्धालुओं का सहयोग दान प्राप्त है भव्य कलश यात्रा के साथ आज कथा का प्रथम दिन हुआ कथा समय 25 जनवरी से 31 जनवरी तक गोवर्धन सत्संग भवन मंडफिया में चलेगी जो की प्रतिदिन 11 से 3:00 बजे तक कथा रहेगी यहां पर आगंतुक श्रद्धालुओं का रात्रि विश्राम और भोजन की पूर्ण व्यवस्था की गई है। अतः सभी भक्तों से निवेदन अधिक से अधिक संख्या में पधार कर कथा श्रवण का लाभ लें और मंडफिया के सरकार सेठों के सेठ। सांवलिया के दर्शन करें और जीवन को धन्य बनावे कृपा रघुनाथ जी।