
जन सुराज पार्टी का स्थापना दिवस: प्रशांत किशोर का संकल्प, “शराबबंदी हटाकर बिहार में लाएंगे बहार”
पटना :-
बिहार की राजनीति में बड़ा कदम उठाते हुए, प्रशांत किशोर ने अपनी नई पार्टी “जनसुराज पार्टी” का गठन 2 अक्टूबर 2024 को पटना के वेटनरी कॉलेज मैदान में किया। इस अवसर पर उन्होंने एक विशाल रैली को संबोधित किया और राज्य के लोगों को एक नई उम्मीद दी।
प्रशांत किशोर ने रैली में जोरदार तरीके से “जै जै बिहार” के नारे लगाए और कहा कि यह आवाज केवल बिहार में ही नहीं, बल्कि बंगाल, तमिलनाडु और दिल्ली तक गूंजनी चाहिए। उन्होंने इस नारे के जरिए लोगों को बिहार की अस्मिता और सम्मान की लड़ाई लड़ने का आह्वान किया। किशोर ने कहा, “यह आवाज वहां तक पहुंचे जहां हमारे बच्चों को बिहारी कहकर अपमानित किया जाता है।”
किसानों की दुर्दशा पर चिंता और सुधार का वादा
प्रशांत किशोर ने अपने भाषण में बिहार के किसानों की खराब हालत पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा, “जनसुराज की सोच भूमि सुधार की है, सर्वे की नहीं।” उनका कहना था कि बिहार में बड़ी संख्या में लोगों के पास जमीन नहीं है और इसलिए भूमि सुधार के माध्यम से किसानों की स्थिति में सुधार लाना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि बिहार में खेती को केवल खाने का साधन नहीं, बल्कि कमाई का साधन बनाना होगा।
मानवता पर आधारित विचारधारा
प्रशांत किशोर ने जनसुराज पार्टी की विचारधारा को स्पष्ट करते हुए कहा, “हमारी पार्टी की विचारधारा मानवता पर आधारित है। हमारी सोच ‘ह्यूमन फर्स्ट’ है।” उन्होंने बिहार को एक ऐसा राज्य बनाने का संकल्प लिया जहां लोग गर्व से बिहारी कहलाएं और उन्हें किसी अन्य राज्य में अपमानित न होना पड़े।
शराबबंदी हटाने का वादा और शिक्षा पर जोर
शराबबंदी के मुद्दे पर प्रशांत किशोर ने बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि अगर उनकी सरकार बनी तो वे एक घंटे के भीतर शराबबंदी को खत्म कर देंगे। उन्होंने कहा कि शराब से होने वाली टैक्स की कमाई को अगले 20 वर्षों तक बिहार के बच्चों की शिक्षा पर खर्च किया जाएगा।
उन्होंने रोजगार और पेंशन योजनाओं का भी जिक्र किया। उनकी योजना है कि हर व्यक्ति को 10 से 12 हजार रुपये की रोजी-रोटी मिले और बुजुर्गों को 2000 रुपये की मासिक पेंशन दी जाए।
बिहार के लोगों का आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता
प्रशांत किशोर ने अपने भाषण के अंत में जोर देकर कहा कि बिहार के लोग भिखारी नहीं हैं और उन्हें विशेष राज्य के दर्जे की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने बिहार को आत्मनिर्भर और गर्वशाली राज्य बनाने का वादा किया, जहां लोग सम्मान के साथ जीवनयापन कर सकें।