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सरवानिया महाराज में सावन के चौथे सोमवार को धूमधाम से निकली बाबा महाकाल की शाही सवारी,

 जगह-जगह हुआ स्वागत, शिवमय हुआ पूरा नगर …. धूमधाम से निकली बाबा महाकाल की शाही सवारी

 

नीमच । 12 अगस्त 2024 सरवानिया महाराज :- सावन मास के चौथे सोमवार को श्री महाकाल मित्र मंडल के नेतृत्व में बाबा महाकाल की शाही सवारी बड़ी धूमधाम से निकली। प्रतिवर्ष अनुसार इस वर्ष भी बाबा महाकाल की शाही सवारी ने सरवानिया के लोगों को शिवमय कर दिया. इस दौरान पालकी में सवार बाबा महाकाल के दर्शन और पालकी को छूने के लिए हर कोई आतुर था. शाही सवारी सोमवार दोपहर 3 बजे शहर के बीच स्थित शिव मंदिर से प्रारंभ हुई जो शहर के हरिया भेरू चौक बस स्टैंड मिडिल स्कूल जावी चौराया दरवाजा सदर बाजार होते हुवे नीमच सिंगोली रोड काल भैरव मुक्ति धाम स्थित श्री भोलानाथ स्टेच्यू परिसर पहुंची, जहां पर बाबा महाकाल की आरती के पश्चात् प्रसाद का वितरण किया गया। शाही सवारी में हर-हर महादेव और जय महाकाल के उद्घोष से पूरा माहौल शिवमय हो गया. बैंड बाजे एवं डीजे की धुन में बाबा महाकाल के श्रद्धालु भक्ति में झूमते दिखे। शाही पालकी सहित झांकियां, डीजे, युवाओं की टोली, ढोल-ढमाका, ताशे, नगाड़े आदि आकर्षण का केंद्र रहे। बाबा महाकाल की भव्य शाही सवारी का स्वागत सभी आम जनों से लेकर खास जनों ने भक्तिमय होकर किया जिसमे राजनीतिक दल सामाजिक दल सहित 50 से अधिक स्थानों पर फूलों की बारिश कर शाही सवारी का स्वागत किया गया। मुक्ति धाम में पहुची शाही सवारी – कुछ सालो पहले यहां केवल मुक्तिधाम ही बना हुआ था लेकिन फिर यहां एक समिति का गठन किया गया जिसमे सो से अधिक लोगो को जोड़कर सभी के सहयोग से पूरे परिसर में गार्डन बनाया ओर उसकी देखभाल कर पूरे गार्डन में बाउंड्री वॉल बनाकर पोधो को बड़ा किया। लेकिन तीन चार साल पहले समिति ने सभी शहर वासियो के सहयोग से मंदिर परिसर में बड़ा स्टेचू बनाकर भगवान भोलेनाथ की मूर्ति स्थापित करने का निर्णय लेकर मूर्ति स्थापित की जो आज पूरे नगर के लिए एक धार्मिक स्थल बन गया। शहर में युवाओं ने महाकाल मित्र मंडल बनाकर प्रतिवर्ष सावन महीने में भगवान भोलेनाथ की शाही सवारी निकलना प्रारंभ जो धीरे-धीरे बड़ा रूप लेते लेते तीसरे वर्ष में ऐतिहासिक बन गई जिसमें हजारों लोग भगवान भोलेनाथ के दर्शन करने पहुचने लगे। इस पूरी शाही सवारी के दौरान पुलिस चौकी प्रभारी असलम पठान अपनी टीम के साथ सुरक्षा व्यवस्था का प्रबंधन करने में लगे हुए थे।

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