
ताल ब्यूरो चीफ –शिवशक्ति शर्मा
स्थानीय ठिकाना ताल के भानेज भेरूसिंह सिसौदिया जो अरनोद राजस्थान ठिकाने से संबंधित थे।ताल महाराज ने जागीर देकर ताल में ही बसा लिया था।
भेरुसिंह सिसौदिया के चार पुत्रों में से एक कृष्ण सिंह सिसौदिया शिक्षक पद से सेवा निवृत्त होकर पहले निजी विद्यालय प्रारंभ करने की ठानी और आलोट रोड़ संपवेल के समीप आर्यवीर अकेडमी हायर सेकंडरी स्कूल की स्थापना की एवं योग्य शिक्षकों को नियुक्ति देकर अध्यापन कार्य करवाया और कुछ ही अर्से में स्कूल ने काफी प्रगति प्राप्त कर अपना झंडा फहराया ओर श्रेष्ठ परीक्षा परिणाम दिया। परिणाम स्वरूप विद्यालय ने काफी प्रगति की व छात्र छात्राओं की संख्या में काफी इजाफा हुआ। इसके साथ ही कई प्रकार की गतिविधियों का संचालन भी प्रारंभ किया व विद्यार्थियों को लाने ले जाने हेतु बसों की भी व्यवस्था की।आज विद्यालय में सेंकड़ों विद्यार्थी अध्ययनरत होकर चरमोत्कर्ष पर है।
विद्यालय व प्रबंधन की सफलता के बाद कृष्ण सिंह सिसौदिया की महत्वकांक्षा जागृत होकर कृष्ण गढ़ बनाने का बीड़ा उठाया जो विद्यालय के समीप ही भूमि उपलब्ध हो जाने पर विगत वर्ष से गढ़ी निर्माण का कार्य चल रहा ओर नवनिर्मित भवन को गढ़ी जो का स्वरूप दिया गया जो पूर्ण हो चुका।अभी मात्र रंग रोगन का कार्य शेष रहते श्रेष्ठ मुहूर्त आ जाने से आज क्षेत्र के ठिकानेदारों, रिश्तेदारों व समाजजनों तथा नगर के गणमान्य नागरिकों की गरिमामयी उपस्थिति में विद्वान पंडितों ने नवीन गृह प्रवेश की रस्म पूरी की।इस नव निर्माण कार्य में इनके पुत्र विरेन्द्र सिंह सिसौदिया का कठोर परिश्रम काफी सराहनीय रहा।गृह प्रवेश की रस्म अदायगी पश्चात सामुहिक भोजन आयोजित किया गया। जिसमें बड़ी संख्या में मेहमानों ने एवं आमंत्रित महानुभावों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई एवं नवनिर्मित गढ़ी की प्रसंशा की।इस प्रकार कृष्ण सिंह सिसौदिया का गढ़ी निर्माण का सपना मूर्तरूप में साकार हुआ।