
महावीर जिनालय विकास नगर श्री संघ में साध्वी सोम्यरेखा श्रीजी साध्वी वृंद का चातुर्मासिक धर्म सभा प्रवाहित,
नीमच,25जुलाई (केबीसी न्यूज़) मां के धार्मिक संस्कारों के कारण ही संतान महान बनती है। मां के संस्कार ही है कि जो स्वयं गिले में सोती है लेकिन बच्चे को सुखे में सुलाती है स्वयं के सुख चैन की चिंता नहीं करती है लेकिन बच्चे को सुखी रखती है ।यदि हम दूसरों के कल्याण की भावना रखते हैं तो हमारा कल्याण परमात्मा करते हैं। संसार में इसीलिए परमार्थ सेवा ही सर्वोपरि आत्मा का धर्म बताया गया है। शिक्षक के संस्कारों से व्यक्ति एक जन्म में रोजगार के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सकता है लेकिन मां के संस्कारों से व्यक्ति सात जन्म तक संस्कारवान रहता है।यह बात साध्वी
सोम्यरेखा श्री जी महाराज साहब की सुशिष्या साध्वी सुचिता श्रीजी मसा ने कही।वे जैन श्वेतांबर महावीर जिनालय ट्रस्ट विकास नगर श्री संघ के तत्वाधान में श्री महावीर जिनालय विकास नगर आराधना भवन नीमच में आयोजित धर्म सभा में बोल रही थी। उन्होंने कहा कि शिवाजी ,महाराणा प्रताप और महावीर स्वामी उनकी माता के संस्कारों के कारण ही महान बने थे। दूसरों की आलोचना करने से पाप बढ़ता है इसलिए सदैव दूसरों के अच्छे गुणों को ही देखना चाहिए उनके अवगुणों को नहीं देखना चाहिए। बच्चों के पूर्व जन्म के ही संस्कार होते हैं कि बच्चों को साधु साध्वी के संस्कार अच्छे लगते हैं। संयम जीवन का पालन करने से मानव जीवन का कल्याण होता है। मनुष्य को संयम जीवन अपनाना है तो विवाह को पहले ही त्याग देना चाहिए।इस वर्षावास में सागर समुदाय वर्तिनी सरल स्वभावी दीर्घ संयमी प.पू. शील रेखा श्री जी म.सा. की सुशिष्या प.पू.सौम्य रेखा श्री जी म सा, प.पू. सूचिता श्री जी म सा, प.पू.सत्वरेखा श्री जी म साआदि ठाणा 3 का चातुर्मासिक तपस्या उपवास जप व विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों के साथ प्रारंभ हो गया है।
श्री संघ अध्यक्ष राकेश आंचलिया जैन, सचिव राजेंद्र बंबोरिया ने बताया कि प्रतिदिन 9:15 बजे चातुर्मास में विभिन्न धार्मिक विषयों पर विशेष अमृत प्रवचन श्रृंखला का आयोजन होगा । समस्त समाज जनअधिक से अधिक संख्या में पधार कर धर्म लाभ लेवें एवं जिन शासन की शोभा बढ़ावे।