विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष का भी आयकर भर रही मध्य प्रदेश सरकार

भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार पिछले तीस वर्षों से मुख्यमंत्री और मंत्रियों के भत्ते सहित परिलब्धियों पर जनता के पैसों से आयकर भर रही है। इस पर सरकार ने अब निर्णय ले लिया है कि मंत्रियों का कर सरकार नहीं भरेगी, लेकिन प्रदेश में अभी भी विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष का आयकर राज्य सरकार ही भर रही है। यही नहीं, इनको मिलने वाली अन्य सुविधाएं, जैसे उनको दिए गए आवास के किराए को भी आयकर छूट के दायरे में रखा गया है। इन्हें भी 1994 से ही आयकर नहीं देना पड़ रहा है।गौरतलब है कि डा. मोहन यादव सरकारी खजाने से मुख्यमंत्री और मंत्रियों का आयकर जमा नहीं करने की परंपरा को मंगलवार को समाप्त कर दिया लेकिन उस निर्णय में विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष शामिल नहीं हैं क्योंकि इनके लिए अलग से मध्य प्रदेश विधानसभा द्वारा कानून बनाया गया है।
विधेयक का नहीं किया विरोध
विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष को यह छूट भी इन्हें 1997 में अध्यादेश के जरिए दी गई थी और बाद में विधानसभा में विधेयक लाकर मध्य प्रदेश अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष (वेतन और भत्ते) अधिनियम 1972 की धारा 8 (क) में संशोधन करके इसे एक जनवरी 1994 की तिथि से लागू किया था।
जब यह विधेयक विधानसभा में लाया गया था, तब भाजपा विपक्ष में थी, लेकिन किसी भी सदस्य ने इसका विरोध नहीं किया था। 2003 के बाद से यह सारे लाभ भाजपा सरकार के मंत्री, मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष व नेता प्रतिपक्ष पा रहे हैं।
श्रीनिवास तिवारी थे विधानसभा अध्यक्ष
विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष को भत्ते व अन्य परिलब्धियों पर लगने वाला आयकर जब विधानसभा सचिवालय ने भरने का निर्णय लिया था, तब मप्र विधानसभा के अध्यक्ष श्रीनिवास तिवारी थे और भेरूलाल पाटीदार उपाध्यक्ष थे। नेता प्रतिपक्ष विक्रम वर्मा थे। सभी ने इस पर सहमति जताई थी। साथ ही यह बात भी चर्चा में आयी थी कि विधायकों के लिए भी यह सुविधा लागू की जाए।
क्या है प्रविधान
मध्य प्रदेश अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष (वेतन और भत्ते) अधिनियम 1972 की धारा 8 (क) में संशोधन करके प्रविधान किया गया कि मप्र विधानसभा के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष को मिलने वाले भत्ते सहित परिलब्धियों पर आयकर नहीं लिया जाएगा। इस व्यवस्था को बंद करने की मांग समय-समय पर उठती रही है पर कभी निर्णय नहीं हुआ। अब इसमें संशोधन करना होगा तो इसकी पहल विधानसभा को ही करना होगी।