आध्यात्ममंदसौरमध्यप्रदेश

पं. दशरथभाईजी के मुखारविन्द से श्रीकृष्ण रूकमणी विवाह का प्रसंग श्रवण कर आनंदित हुए धर्मालुजन

 

मन्दसौर। पं. श्री दशरथभाईजी के मुखारविन्द से प्रतिदिन दोप. 1 से सायं 5 बजे तक नयापुरा रोड़ स्थित माहेश्वरी धर्मशाला में श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन हो रहा है। श्री शांतिलालजी नानालालजी एकलिंगजी सोनी (कुलथिया) परिवार के द्वारा 25 से 31 दिसम्बर तक सात दिवसीय भागवत कथा अपने पितृजनों की स्मृति में कराई जा रही है। इस कथा को श्रवण करने मंदसौर ही नहीं अपितु पूरे अंचल के धर्मालुजन कथा स्थल पहुंचकर कथा श्रवण का धर्मलाभ ले रहे है।
श्रीमद् भागवत कथा के षष्टम दिवस पं. दशरथभाईजी ने भगवान श्री कृष्णजी के मथुरा आगमन, उनके द्वारा कंस का वध, श्री कृष्णजी का शिक्षा हेतु उज्जैनी प्रस्थान, श्री कृष्ण के द्वारिका आगमन एवं श्री कृष्ण रूकमणी विवाह की कथा श्रवण कराई। पं. दशरथभाईजी ने भागवत कथा में कहा कि प्रभुजी का जन्म मथुरा वासियों को कंस के अत्याचारों से छूटकारा दिलाने व पृथ्वी पर धर्म की पुनर्स्थापना के लिये हुआ था। प्रभु श्री कृष्ण की ख्याति जब कंस तक पहुंची तो उसने कृष्ण की हत्या की योजना बनाई और नंदजी के यहां अपने दूत भेजकर कृष्ण और बलरामजी को बुलाया लेकिन उसे यह ज्ञात नहीं था कि वह स्वयं अपने काल को आमंत्रण दे रहा है। श्री कृष्ण ने मथुरा के अखाड़े के बड़े-बड़े पहलवानों को पराजित कर दिया और कंस की छाती पर बैठकर उसका वध किया। कंस के वध के बाद श्री कृष्ण ने अपने माता-पिता देवकी वासुदेव एवं नाना उग्रसेन को मथुरा के कारागृह से मुक्त कराया। कंस वधन की कथा प्रेरणा देती है कि अहंकार में आकर पापकर्म मत करो यदि करोगे तो उसका फल भुगतना पड़ेगा।
श्री कृष्ण-रूकमणी विवाह का प्रसंग सुन आनंदित हुए धर्मालुजन- पं. दशरथभाईजी ने जब कृष्ण रूकमणी विवाह का प्रसंग श्रवण कराया तो धर्मालुजन आनंदित होकर नृत्य करने लगे। पं. दशरथभाईजी ने कथा में कहा कि विदर्भ राज्य की राजकुमारी रुक्मणी मन ही मन कृष्ण से प्रेम करती थी लेकिन उसका भाई रूकमी कृष्ण से बैर रखता था। वह अपनी बहन का विवाह दुष्ट प्रवृत्ति के शिशुपाल से कराना चाहता था। यह बात रूकमणी को ज्ञात हुई तो उसने श्री कृष्ण को पत्र भेजा और उनसे आग्रह किया कि वे उनका हरण कर द्वारका ले जाये। श्री कृष्ण ने रूकमणी की इच्छानुसार उसका हरण कर विवाह किया। रूकमी ने कृष्ण को रोकने की कोशिश की लेकिन वह श्री कृष्ण के हाथों पराजित हुआ। श्री कृष्ण ने विदर्भ की पुरी सेना का अकेले ही सामना कर उन्हें पराजित किया। श्री कृष्ण रूकमणी विवाह की कथा से प्रेरणा ले और यदि वर उत्तम हो तो कन्या की इच्छा का सम्मान करते हुंए विवाह करे।
श्वासानंदजी महाराज का हुआ आगमन-भागवत कथा में बर्डियाखेड़ी के संत श्री श्वासानंदजी महाराज व वेद आश्रम के कपिलजी का भी आगमन हुआ। आपका स्वागत कथा आयोजक परिवार के की ओर से स्वर्णकार समाज जिलाध्यक्ष व स्वर्णकला बोर्ड के सदस्य श्री अजय सोनी कॉलोनाईजर, हेमंत सोनी, अशोक सोनी, मनीष सोनी लाला, पवन सोनी, मयंक सोनी, गिरीश सोनी आदि ने किया।
इन्होनंे किया पोथी पूजन- भागवत कथा में कल राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के विभाग कार्यवाही दशरथसिंह झाला, संघ के वरिष्ठ दायित्ववान पदाधिकारी दिलीप चावड़ा, सुखदेवजी, पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष प्रकाश रातड़िया, वरिष्ठ पत्रकार डॉ. प्रीतिपालसिंह राणा, सुरेश भाटी, समाजसेवी बाबूलाल अठानावाला, शांतिलाल पालीवाल पूर्व जिला भाजपा महामंत्री अजयसिंह चौहान, कृष्णकांत नारायणगढ़वाला, जितेन्द्र सोनी धुंधड़का ने भागवत पौथी का पूजन किया और आरतीकी।
पूर्व विधायक श्री सिसौदिया सहित कई अतिथियों ने आरती की-  शनिवार को पूर्व विधायक श्री यशपालसिंह सिसौदिया ने भी पहुंचकर पौधा का पूजन किया और आरती की। इस अवसर पर उन्होंने अपने विचार भी रखे। शनिवार की दोपहर में मिराज ग्रुप के योगेश पालीवाल, विकास बागोरा अभिनंदन,  संगीत महाविद्यालय जनभागीदारी समिति अध्यक्ष  नरेन्द्र त्रिवेदी, साहित्य परिषद के नरेन्द्र भावसार, वरिष्ठ पत्रकार डॉ. घनश्याम बटवाल, पार्षद विनय दुबेला ने पौथी पूजन किया। इस अवसर पर जिला धार्मिक उत्सव समिति एवं मेढ़ क्षत्रीय स्वर्णकार समाज जनकूपुरा पंचायत के पदाधिकारियों  व सदस्यों ने भी पोथी पूजन किया। इन सभी का स्वागत कथा आयोजक परिवार की ओर से स्वर्णकार समाज जिलाध्यक्ष व स्वर्णकला बोर्ड के सदस्य श्री अजय सोनी कॉलोनाईजर, हेमंत सोनी, अशोक सोनी, मनीष सोनी लाला, पवन सोनी, मयंक सोनी, गिरीश सोनी आदि ने दुपट्टा ओढ़ाकर किया। संचालन अशोक सोनी मेलखेड़ा ने किया।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
site-below-footer-wrap[data-section="section-below-footer-builder"] { margin-bottom: 40px;}