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संभाग के कुपोषित बच्चों में उज्जैन जिला अव्वल ,उज्जैन जिले में 3451 बच्चे कुपोषण की चपेट में 

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सबसे कम आगर जिले में मात्र 617 पर असर

-कैलाश सनोलिया

नागदा, 12 फरवरी। कुषोषित बच्चों की संख्या के मामले में उज्जैन संभाग में उज्जैन जिला अव्वल हैं। उज्जैन संभाग में कुल 7 जिले शामिल है। उज्जैन संभाग में अति कुपोषित एवं कुपोषित कुल 14,156 बच्चे कुपोषण के शिकार है। यह आंकड़ा एक अधिकृत जानकारी में उजागर हुआ।जिला उज्जैन में सर्वाधिक कुपोषण के शिकार 3451 बच्चे सामने आए हैं। उज्जैन संभाग में शाजापूर, आगर, देवास, मंदसौर, नीमच, रतलाम एवं उज्जैन जिले शामिल हैं।

शासकीय परिभाषित जानकारी में कुपोषित बच्चों की दो श्रेणियां है। एक अतिपोषित (एसएएम) तथा दूसरी कुपोषित (एमएएम) है। इन दोनों वर्गा में से पहले वर्ग में उज्जैन जिले में 571 बच्चे तथा दूसरी कुपोषित श्रेणी में 2880 बच्चे कुपोषण की गिरफ्त में हैं। दोनों वर्ग के योग का आकंड़ा 3451 संभाग उज्जैन के सभी जिलों में सर्वाधिक है। जबकि उज्जैन संभाग में सबसे कम पोषित बच्चों में आगर जिला है। इस जिले में मात्र 617 बच्चें हैं। आगर जिले में अति कुपोषित 78 तथा कुपोषित 530 बच्चें है। शासकीय जानकारी की यह संख्या 30 जनवरी 2024 की स्थिति में आंकी गई है, जोकि मुख्यमंत्री बाल आरोग्य संवर्धन कार्यक्रम में दर्ज आंकड़ों से संधारित है।

दस्तावेज प्रमाण सुरक्षित-

जानकारी में मप्र के 52 जिलों की पृथक-पृथक संख्या दर्शायी गई है। इस जानकारी के मुताबिक समूचे मप्र स्तर पर दोनों वर्ग अतिकुपोषित एवं कुपोषित बच्चों की संख्या एक लाख 36 हजार 252 प्रकट है। जिसमें अतिकुपोषित वर्ग में 29, 830 तथा कुपोषित वर्ग में 1लाख 6 हजार 422 की संख्या शामिल है। उक्त तथ्य की जानकारी अनुविभाग अधिकारी मप्र शासन महिला एवं विकास विभाग मंत्रालय भोपाल के हस्ताक्षर से प्रदत्त है। इस अभिलेख पर संयुक्त संचालक महिला एवं के हस्ताक्षर भी है। इस दस्तावेज की प्रतिलिपि हिंदुस्थान समाचार संवाददाता नागदा के पास सुरक्षित है। यह जानकारी 9 फरवरी 2024 को महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने विधानसभा में एक अतांराकित प्रश्न के जवाब में उपलब्ध कराई है। एमएलए आतिफ आरिफ अकील के सवाल पर समूचे प्रदेश की जिलेवार सूची प्रस्तुत की है।

मप्र में धार, छिंदवाड़ा शीर्ष-

आकड़ों को समूचे मप्र की कसौटी पर आंका जाए तो प्रदेश के कुल एक लाख 36 हजार 252 कुपोषित बच्चों में से धार जिला प्रदेश में अव्वल है। इस जिले में दोनों वर्ग के कुपोषित बच्चों की संख्या 9724 सामने आई है। जिसमें अति कुपोषित 2411 तथा कुपोषित 7313 बच्चे शूमार हैं। मप्र में दूसरे क्रम पर छिंदवाडा जिला नजर आ रहा है। इस जिले का आंकड़ा कुल 9627 बच्चों का है। जिसमें अति कुपोषित 1864 तथा कुपोषित 7763 बच्चें है। मप्र में तीसरे क्रम पर कुपोषित बच्चों में बड़वानी जिला है। इस जिले में दोनो वर्ग का योग 6608 है। जिसमें अतिपोषित 1553 तथा 5095 बच्चों पर कुपोषण का प्रकोप है।

सबसे कम निमाड़ी जिला-

समूचे प्रदेश में सबसे कम की संख्या को देखा जाए तो निमाड़ी जिले का स्थान है। यहां पर कुपोषित बच्चों की संख्या 403 बच्चों तक सिमटी है। जिसमें अति कुपोषित मात्र 99 तथा कूपोषित का आंकड़ा 304 है। प्रदेश में सबसे कम की दूसरी पायदान में दतियां जिले का नाम शामिल किया जा सकता है। यहां पर आंकड़ा दोनों वर्ग का 427 है। जिसमें से अति कुपोषित 113 तथा कुपोषित 314 है। इसी प्रकार से कम की तीसरी पायदान पर हरदा जिला है। यहां पर कुल 480 बच्चों पर कुपोषण का प्रकोप हैं। जिसमें 78 अतिकुपोषित एवं 402 कुपोषण की श्रेणी में हैं। इस जिले के आंकडे की खासियत यह है कि मात्र अति कुूपोषित बच्चों की श्रेणी का अध्ययन किया जाए तो इस जिले में मात्र 78 का आंकड़ा सबसे कम बच्चों का है। अति कुपोषण की सबसे कम संख्या में आगर जिला दूसरे क्रम पर है जहां मात्र 87 बच्चे अतिकुपोषित है। इस वर्ग में निमाड़ी का नाम तीसरी क्रम पर है। यहां पर आकड़ा 99 पर टिका हुआ है।

अन्य जिलों की स्थिति-

अन्य जिलों में दोनों वर्ग के कुल पोषित बच्चों की संख्या इस प्रकार -बैतुल- 4555, नर्मदापुरम- 3206, रीवा-5439, सतना-5027,सीधी-2515, सिंगरोली-3101, छतरपुर 1756, दमोह- 2926, पन्ना-1610, टीकमगढ- 1454, अनूपपुर-2080, शहडोल-2697, उमरिया-877, देवास-3263, मंदसौर-2316, नीमच- 1021, रतलाम 2603, शाजापूर-805, भोपाल-3257, रायसेन-1358, राजगढ़-1912, सिहोर-1217, विदिशा-2107, भिंड-2814, मुरैना-2910, श्योपुर- 991, अशोेक नगर-1611, दतिया- 427, गुना-3198, ग्वालियर- 2663, शवपुरी-2775, अलिराजपुर-1275, बुरहानपुर- 751, इंदौर-3602, झाबुआ- 3028, खंडवा-1915, खरगोन-2658, बालाघाट- 2515 डिडोरी-1398, जबलपुर-3089, कटनी-1530, मंडला-2162, नरसिंहपुर-1981 एवं सिवनी में 1993 बच्चे दोनों वर्ग के कुपोषित है।

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