शुभ कार्यों पर लगीं एक माह तक रोक 14 मार्च से खरमास प्रारम्भ, भगवान विष्णु कि आराधना से होगी लक्ष्मी प्रसन्न

ज्योतिष दर्शन
शुभ कार्यों पर लगीं एक माह तक रोक 14 मार्च से खरमास प्रारम्भ, भगवान विष्णु कि आराधना से होगी लक्ष्मी प्रसन्न
-ज्योतिषाचार्य पंडित यशवंत जोशी
जय दुर्गा ज्योतिष सेवा संस्थान
एवं अनुष्ठान केंद्र मंदसौर
7024667840,8085381720
हिंदी माह में हर माह संक्रांति अलग अलग राशियों पर आती है इस बार 14 मार्च 2024 फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष चतुर्थी को मीन संक्रांति दोपहर 3.12 मिनट पर सूर्य के कुंभ से मीन राशि में प्रवेश के साथ ही खरमास शुरू हो जाएंगे. सूर्य यहां 13 अप्रैल रात 09.03 तक रहेंगे. इसके बाद खरमास की समाप्ति होगी।खरमास के दौरान भूलकर कोई शुभ काम शुरू नहीं किए जाते. जैसे इस दौरान नई सम्पत्ति, नया वाहन, गृह प्रवेष, विवाह समेत कोई भी मंगल कार्य करने की मनाही होती है।
पूजा,सेवा, दान कर्म, मंत्र जाप का माह खरमास
17 मार्च से होलाष्टक लग जाएंगे, 25 मार्च को चंद्र ग्रहण, होली और 9 अप्रैल से चैत्र नवरात्रि का पर्व भी खरमास के दौरान ही पड़ रहा है. देवी-देवताओं की पूजा के लिए खर मास श्रेष्ठ दिन होते हैं। इस दौरान सूर्य की पूजा, गाय की सेवा, दान कर्म, मंत्र जाप जरुर करें. मान्यता है इसके फलस्वरूप व्यक्ति को कभी न खत्म होने वाला वरदान प्राप्त होता है, उसकी आयु लंबी होती है. जीवन सुख-समृद्धि से भर जाता है. खरमास में करियर की उन्नति के लिए ॐ ब्रं बृहस्पति नमः मंत्र का जाप रोजाना करें।
खरमास विष्णु जी को समर्पित है.ऐसे में एक माह तक रोजाना विष्णुसहस्त्रनाम का पाठ, गीता पाठ आदि करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं. एक समय खाना खाएं. बिस्तर का त्याग करें. मन में किसी के लिए बुरे विचार न लाएं। ब्राह्मण को दान दें।इससे ग्रहों के दुष्प्रभाव खत्म हो जाते हैं।
पौराणिक कथा के अनुसार भगवान सूर्य अपने वाहन घोड़ों पर दया करके उन्हें कुछ समय विश्राम देते हैं और उन्हें पानी पिलाने के लिए तालाब लेकर जाते हैं. किंतु सूर्य भगवान एक बार थम जाएं तो सृष्टि कैसे चलेगी. इसलिए वह तालाब किनारे खड़े खरों यानि गधों को उन्होंने अपने रथ के आगे लगा दिया. चूंकि घोड़ों के मुकाबले गधों की गति काफी धीमी होती है इसलिए ये मान्यता है कि चाहे व्यापार हो या कोई मंगल कार्य यदि इस कालावधि में किया तो वह फलीभूत नहीं होता. इसलिए खरमास में कोई शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं. इन शुभ कार्यों में बच्चे का मुंडन और नामकरण, गृह प्रवेश, विवाह समारोह, नए प्रतिष्ठान का उद्घाटन आदि को खरमास के पूर्ण होने तक टालना ही बेहतर होता है।