रीवामध्यप्रदेशराजनीति

विंध्य के पास सत्ता की चाबी, बघेलखंड को साधने भाजपा-कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व का फोकस

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अंचल की 30 विधानसभा सीटों पर भाजपा-कांग्रेस की विशेष नजर है। प्रधानमंत्री मोदी विंध्य में तीन बार दौरा कर चुके हैं।

✍🏻विकास तिवारी

रीवा। मध्यप्रदेश के विंध्य क्षेत्र पर पार्टियों की विशेष नजर है। राजनैतिक विद्वान मानते हैं कि विंध्य में विजय पताका फहराने वाला दल सत्ता तक पहुंच जाते हैं। माना यहां तक जाता है कि सत्ता की चाबी विंध्य के पास है। यही कारण है कि अंचल की 30 विधानसभा सीटों पर भाजपा-कांग्रेस की विशेष नजर है, दोनों दल यहां अपने कुनबे को बढ़ाना चाहती है। समाजवादी विचारधारा, कांग्रेस आदि दलों से आए नेता भाजपा की ताकत बढ़ा रहे हैं। चाहे वह 2008 का चुनाव हो, या 2013 का।

विंध्य ने थामे रखा भाजपा का भगवा ध्वज

चुनावी वर्ष बदले, राजनैतिक समीकरण भी उलझे। लेकिन नहीं कुछ बदला तो वह था विंध्य की सीटों पर भगवाकरण का होना। महाकोशल की 38 सीटों पर कांग्रेस ने जोरदार मुकाबला करते हुए न केवल 24 सीट हासिल कर ली थी, बल्कि भाजपा को 13 सीटों पर समेट दिया था। पूरे प्रदेश में विंध्य ही था जिसने भाजपा के भगवा ध्वज को थामे रखा था। रीवा कुल 8 विधानसभा सीटों पर भाजपा ने कांग्रेस का क्लीन स्वीप कर दि है।

प्रदेश कार्यकारिणी से लेकर केंद्रीय चुनाव समिति तक विंध्य की चर्चा

चुनावी वर्ष में जहां लगातार देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के दौरे आचार संहिता लगने के पूर्व और बाद में होते रहे। प्रधानमंत्री मोदी विंध्य में तीन बार दौरा कर चुके हैं। विंध्य में चुनावी मुद्दों के उलट जाति व सम्प्रदाय के बलबूते पर भी चुनाव परिणाम देती रही है। यही कारण है कि बीच-बीच में छोटे दल जैसे बसपा, कम्युनिस्ट, सपा व लोक जनशक्ति पार्टी अपना वजूद खोजती नजर आती हैं।

चर्चा यह भी..

अंचल में जहां विधायकों के टिकट काट लिए गए हैं, वहीं नए लोगों को मौका दिया गया है और भाजपा का शीर्ष नेतृत्व इन सीटों पर विशेष जोर लगा रहा है। जिन विधायकों की टिकट काटी गई है, उनमें त्योंथर से भाजपा विधायक श्यामलाल द्विवेदी, मनगवां विधानसभा क्षेत्र से पंचूलाल प्रजापति, सीधी विधानसभा सीट से केदार शुक्ला और सिंगरौली रामलल्लू वैश्य हैं। विंध्य के दो सांसद भी चुनाव मैदान में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। उनमें सतना सांसद गणेश सिंह एवं सीधी सांसद रीति पाठक शामिल है।

राजनीति में स्थानीय भाषा का तड़का

विंध्य क्षेत्र में आने वाली 30 विधानसभा सीटों पर स्थानीय स्तर पर बघेली भाषा, बघेली व्यंजन और जातीय समीकरण का असर देखने को मिलता है।

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