आलेख/ विचारमंदसौरमध्यप्रदेश

सनातन संस्कृति विश्व का प्राचीनतम धर्म है, इसे कोई नहीं मिटा पायेगा-रविन्द्र पाण्डेय

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सनातन ही सत्य है और सत्य ही सनातन है सनातन धर्मही सर्वश्रेष्ठ है श्रीमद् भागवत गीता में भगवान को ही सनातन कहा है इसलिए सनातन अक्षर है सनातन कभी नहीं मिट सकता । चाहे कितने ही उदय निधि स्टालिन जैस मानसिक बिमारियों  से ग्रसित लोग आजाये सनातन धर्म को मिटाने की सोच रखने वाले कालनेमी रूपी राजनेताओं उनकी औकात दिखाने का समय हैं।
यह उद्घोष केवल सनातन संस्कृति के देवालयों से ही होता है
धर्म की जय हो अधर्म का नाश हो प्राणियों में सद्भावना हो विश्व का कल्याण हो सनातन शाश्वत है सनातन ही सत्य है सत्य सनातन धर्म है
भारत मे कई विदेशी आक्रांता आए  हुंण चिनी डच  मुगल अंग्रेज आए , पुर्तगाली आए कोई सनातन को नहीं मिटा पाया , वो खुद मिट गए। इसी तरह जो आज सनातन को खत्म करने की बात कर रहे हैं वो खुद खत्म हो जाएंगे।
वैदिक या सनातन धर्म को हिंदू धर्म के नाम से जाना जाता है। वेद पर आधारित यह दुनिया का सबसे प्राचीन धर्म माना जाता है। ऋग्वेद संसार की प्रथम पुस्तक है।वैदिक या सनातन धर्म को हिंदू धर्म के नाम से जाना जाता है।
यह पथ सनातन है। समस्त देवता और मनुष्य इसी मार्ग से प्रकट हुए हैं तथा प्रगति की है। सनातन धर्म जिसे हिन्दू धर्म अथवा वैदिक धर्म भी कहा जाता है, का 1960843110 साल का इतिहास हैं। भारत की सिन्धु घाटी सभ्यता में हिन्दू धर्म के कई चिह्न मिलते है।
मत्स्यपुराण के अनुसार इस पृथ्वी पर प्रथम पुरुष मनु हैं। संस्कृत शब्द मानव का अर्थ है एक मनुष्य, मनु नाम से लिया गया है जो उनके बच्चों को दर्शाता है। मनु प्रजापति (ब्रह्मा का दूसरा नाम) और शतरूपा (सरस्वती का दूसरा नाम) के पुत्र थे। भगवान ने अनंती को मनु की पत्नी के रूप में बनाया। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार इन दोनों को इस संसार का माता-पिता कहा जाता है। मनु और मन्वंतर।
मनु को प्राचीन संस्कृत कानून संहिता, जिसे मनु स्मृति कहा जाता है, का रचयिता माना जाता है। मनु प्रत्येक कल्प (कल्प) के मुखिया हैं, जिसमें चौदह मन्वंतर होते हैं। प्रत्येक मन्वंतर एक मनु के जीवनकाल तक रहता है और इसलिए 14 अलग-अलग मनु हैं जैसे स्वायंभु मनु, स्वारोचिष मनु, उत्तम मनु, तपस मनु, रैवत मनु, चाक्षुष मनु, वैवस्वत मनु, सावर्णि मनु, दक्ष सावर्णि मनु, ब्रह्मा सावर्णि मनु, धर्म सावर्णि मनु, रुद्र सावर्णि मनु, देव सावर्णि मनु और इन्द्र सावर्णि मनु क्रमशः 14 मन्वन्तरों के प्रमुख थे।
प्रत्येक मन्वंतर में लगभग 306,720,000 वर्ष होते हैं। इन 14 मन्वन्तरों के बाद वह कल्प समाप्त हो जाता है। प्रत्येक कल्प लगभग 4.32 अरब वर्ष के बराबर होता है। कई कल्प हैं जबकि वर्तमान कल्प का नाम भाद्र कल्प है, पिछला कल्प व्यूहकल्प है और अगला कल्प नक्षत्रकल्प होगा।
कहने का तात्पर्य यह है कि सनातन संस्कृति विश्व का प्राचीनतम धर्म है। इसका गौरवशाली ऐतिहासिक समृद्ध सभ्यता और संस्कृति ही सनातन धर्म का परिचायक है। समय के साथ होते बदलाव में आज सनातन संस्कृति को धर्म के आधार पर विभाजित कर दिया गया है। जबकि, मनुष्य के प्रादुर्भाव के साथ ही सनातन संस्कृति की उत्पत्ति हुई है जिसे कभी मिटाया नहीं जा सकता।

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