देशनई दिल्ली

भारत की गौरवमयी सांस्कृतिक विरासत, गीता प्रेस गोरखपुर

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गीता प्रेस विश्व की ऐसी इकलौती प्रिंटिंग प्रेस है जो सिर्फ एक संस्था नहीं है बल्कि एक जीवंत
आस्था है। 1923 में स्थापित गीता प्रेस का कार्यालय, करोड़ों लोगों के लिए किसी मंदिर से कम नहीं
है और यह विश्व में सबसे बड़े प्रकाशकों में से एक है। इसने 14 भाषाओं में 41.7 करोड़ पुस्तकों का
प्रकाशन किया है, जिनमें 16.21 करोड़ श्रीमद् भगवद गीता शामिल हैं। भारत की सभ्यता, संस्कृति को
महत्वपूर्ण ऊंचाई देने वाले ऐतिहासिक गीता प्रेस की शताब्दी समापन समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र
मोदी 7 जुलाई को शामिल हुए और चित्रमय शिव पुराण ग्रंथ का किया विमोचन… …

गीता प्रेस के नाम में भी गीता है और इसके काम में भी गीता है। और जहां गीता है- वहां साक्षात
कृष्ण हैं और जहां कृष्ण हैं- वहां करुणा भी है, कर्म भी है। वहां ज्ञान का बोध भी है और विज्ञान का
शोध भी है। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में गीता प्रेस की शताब्दी समापन समारोह को संबोधित करते
हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “1923 में गीता प्रेस के रूप में यहां जो आध्यात्मिक ज्योति
प्रज्वलित हुई, आज उसका प्रकाश पूरी मानवता का मार्गदर्शन कर रहा है। हमारा सौभाग्य है कि हम
सभी इस मानवीय मिशन की शताब्दी के साक्षी बन रहे हैं। इस ऐतिहासिक अवसर पर ही हमारी
सरकार ने गीता प्रेस को गांधी शांति पुरस्कार भी दिया है।” महात्मा गांधी का गीता प्रेस से
भावनात्मक जुड़ाव था। एक समय में, महात्मा गांधी कल्याण पत्रिका के माध्यम से गीता प्रेस के लिए
लिखा करते थे।
महात्मा गांधी ने सुझाव दिया था कि कल्याण पत्रिका में विज्ञापन न छापे जाएं। इस संस्था ने
राजस्व के लिए कभी भी विज्ञापन का सहारा नहीं लिया। गीता प्रेस अपने संबद्ध संगठनों के माध्यम
से लोगों के जीवन के उत्तरोत्तर विकास और
सर्वजन-कल्याण के लिए प्रयास कर रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने कार्यक्रम में कहा, “गीताप्रेस जैसी
संस्था सिर्फ धर्म और कर्म से ही नहीं जुड़ी है, बल्कि इसका एक राष्ट्रीय चरित्र भी है। देशभर में
इसकी 20 शाखाएं हैं। देश के हर कोने में रेलवे स्टेशनों पर हमें गीता प्रेस का स्टॉल देखने को
मिलता है।” गीता प्रेस से 15 अलग-अलग भाषाओं में करीब 1600 प्रकाशन होते हैं और यह भारत के
मूल चिंतन को जन-जन तक पहुंचाती है। प्रधानमंत्री मोदी गीता प्रेस परिसर के लीला चित्र मंदिर भी
गए और भगवान श्री राम के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। गीता प्रेस एक तरह से ‘एक भारत, श्रेष्ठ
भारत’ की भावना का प्रतिनिधित्व करती है। गीता प्रेस इस बात का भी प्रमाण है कि जब आपके
उद्देश्य पवित्र होते हैं, आपके मूल्य पवित्र होते हैं तो सफलता आपका पर्याय बन जाती है। n

गीता प्रेस को गांधी शांति पुरस्कार

वर्ष 2021 का गांधी शांति पुरस्कार गीता प्रेस, गोरखपुर को दिया गया है। गांधी शांति पुरस्कार भारत
सरकार द्वारा स्थापित एक वार्षिक पुरस्कार है। वर्ष 1995 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 125वीं
जयंती के अवसर पर उनके आदर्शों के प्रति श्रद्धांजलि स्वरूप इस पुरस्कार की स्थापना की गई थी।

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