मध्य प्रदेश में जब-जब आए चुनाव, तब-तब बने जिले, 20 सालों से नहीं टूटी परंपरा

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मध्य प्रदेश में साल 2000 के बाद से अब तक हर विधानसभा चुनाव से पूर्व जिलों का गठन हुआ
भोपाल। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नागदा को जिला बनाने की घोषणा की। नागदा को उज्जैन से अलग कर नया जिला बनाया जाएगा। इसके अलावा सीएम शिवराज इसी साल मार्च माह में मऊगंज को जिला बनाने की घोषणा कर चुके हैं। यह मध्य प्रदेश का 53वां जिला है। बीते 15 सालों से मऊगंज को जिला बनाने की मांग की जा रही थी। हालांकि यह पहली बार नहीं है, जब विधानसभा चुनाव न हो और प्रदेश में कोई नया जिला न बना हो।
साल 2000 में हुए मध्य प्रदेश के पुर्नगठन के बाद जैसे-जैसे चुनाव आए वैसे-वैसे नए जिले भी बने। प्रदेश में साल 2000 के बाद से चार बार विधानसभा चुनाव हुए हैं और चारों चुनाव से पूर्व सरकार ने नए जिले बनाए हैं। हाल ही में नागदा जिला बनाने की घोषणा पूरी होते ही प्रदेश में जिलों की संख्या बढ़कर 54 तक पहुंच जाएगी। बता दें कि मध्य प्रदेश के पुर्नगठन के बाद 45 जिले थे, अब यह संख्या बढ़कर 54 तक पहुंच गई है (नागदा को शामिल करने पर) यानी पिछले 23 सालों में प्रदेश में 9 नए जिले बने हैं। मध्य प्रदेश में कब-कब और कितने जिले बने हैं आपको इस खबर में बताते हैं।
साल 2003
साल 2003 मध्य प्रदेश का चुनावी साल था चुनाव से अनुपपूर, बुरहानपुर और अशोकगर को जिला बनाया गया। इन तीनों जिलों का गठन 15 अगस्त 2003 को किया गया। इस तरह प्रदेश में जिलों की संख्या 45 से बढ़कर 48 तक पहुंच गई।
साल 2008
2008 में फिर चुनाव हुए। इस समय शिवराज सिंह चौहान की सरकार थी। चुनाव से पूर्व मध्य प्रदेश में दो नए जिले और बनाए गए। जिसमें 49वां जिला अलीराजपुर था, इसका गठन 17 मई 2008 को किया गया। इसे झाबुआ जिले से अलग कर बनाया गया।
वहीं, मध्य प्रदेश का 50वां जिला सिंगरौली बना। जिसे सीधी से अलग कर 24 मई 2008 को गठित किया गया। सिंगरौली को खनिज पदार्थों की बहुलता को देखते हुए बनाया गया था।
साल 2013
साल 2013 में विधानसभा चुनाव हुए। यानी नए जिले का फिर गठन। 16 अगस्त 2013 को आगर-मालवा मध्य प्रदेश के 51वें जिले के रूप में अस्तित्व में आया। शाजापुर जिले से आगर, बडोद, सुसनेर और नलखेड़ा तहसीलों को हटाकर आगर-मालवा का गठन किया गया।
साल 2018
साल 2018 में हुए विधानसभा चुनाव से पूर्व एक और नया जिला गठित हुआ। अक्टूबर 2018 में निवाड़ी को नया जिला बनाया गया। यह मध्य प्रदेश का 52वां जिला बना।
साल 2023
साल 2023 के अंत में फिर चुनाव होने हैं और पुरानी चुनावी परंपरा के अनुसार जिले बनाने की घोषणा हो चुकी है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसी साल मार्च में मऊगंज को जिला बनाने की घोषणा की थी। सीएम की घोषणा के तहत 15 अगस्त को मऊगंज मुख्यालय पर तिरंगा फहराया जाएगा। यह मध्य प्रदेश का 53वां जिला होगा।
वहीं पिछले सप्ताह उज्जैन पहुंचे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नागदा को जिला बनाने की घोषणा की है। सभी शासकीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसके गठन की प्रकिया तेज हो जाएगी। नागदा मध्य प्रदेश का 54वां जिला होगा।
तीन नए जिले प्रस्तावित, एक पर अमल
इन सभी जिलों के अलावा मध्य प्रदेश में तीन नए जिले और प्रस्तावित हैं, जिनमें से एक जिले को अमल में लाया जा चुका है। दरअसल, कमल नाथ ने अपनी सरकार के दौरान चाचौड़ा, नागदा और मैहर को मार्च में 2020 जिला बनाने के फैसले को मंजूरी दी थी, लेकिन कुछ ही दिनों बाद कमल नाथ सरकार गिर गई और इस फैसले पर आगे कोई निर्णय नहीं हो पाया। हालांकि सीएम शिवराज ने नागदा को जिला बनाने की घोषणा की है। लेकिन चाचौड़ा और मैहर पर कोई फैसला नहीं हो पाया है।
और कितने जिले बनाने की मांग?
खातेगांव, बागली, खुरई, जावरा, खाचरौद, गरोठ इसके अलावा अन्य क्षेत्रों से भी जिला बनाने की मांग उठती रही है।
जिला बनने के यह है फायदे
मुख्यालयों तक सीधी पहुंच-
जिला बनने के बाद लोगों की मुख्यालयों तक सीधी पहुंच हो जाती है। अधिकारी उनके ही क्षेत्र में मौजूद रहते हैं। बड़े जिलों में मुख्यालयों की दूरी अधिक होने के कारण लोगों को लंबे चक्कर काटना पड़ते हैं। जिला बनने से लोगों को इस समस्या से निजात मिलती है।
शिक्षा के स्तर में सुधार-
जिला बनने से मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी क्षेत्र में ही मौजूद रहता है। जिससे शासकीय स्कूलों और उनकी गतिविधियों तक पहुंच आसान हो जाती है।
योजनाओं का लाभ-
छोटे जिले होने के कारण लोगों तक योजनाओं की पहुंच आसान हो जाती है। प्रशासन और लोगों के बीच दूरी कम होती है और बेहतर संवाद स्थापित होता है।