आध्यात्ममंदसौरमंदसौर जिला

शिव के प्रति श्रद्धा, भक्ति व समर्पण भाव रखो- पं. श्री भीमाशंकरजी शर्मा

******************************
मन्दसौर। नरसिंहपुरा स्थित चारभुजा कुमावत धर्मशाला में सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। प्रतिदिन दोप. 12.15 से 4 बजे तक भागवत कथा प्रवक्ता प.पू. श्री भीमाशंकरजी शर्मा (धारियाखेड़ी वाले) व्यास पीठ पर विराजित होकर धर्मालुजनों को श्रीमद् भागवत कथा श्रवण करा रहे है। इस कथा में हजारों की संख्या में पहुंचकर धर्मालुजन कथा का  रसपान कर रहे है। कथा के चतुर्थ दिवस शनिवार को  पं. श्री भीमाशंकरजी शर्मा ने कहा कि भगवान शिव की कृपा  पाना है तो उनके प्रति सच्ची श्रद्धा भक्ति व समर्पण भाव रखो। शिव की जो भी प्राणी सच्चे मन से भक्ति करता है उनकी सब मनोकामनायें पुरी होती है। अभी सावन मास एवं अधिक मास दोनों है इस वर्ष हमें दो सा वन मास भगवान सबकी कृपा से मिले है। हमें इस समय को भगवान शिव की उपासना में लगाना चाहिये। आपने शिव सती की कथा श्रवण कराते हुए कहा कि प्रजापति दक्ष ने अपनी कन्या सति का विवाह शिव से किया था। दक्ष ने भले ही कन्या का विवाह किया हो लेकिन वह शिव के प्रति शत्रुता  का भाव रखता था शिव के प्रति शत्रुता के भाव के कारण ही उसने अपने यहां होने वाले यज्ञ में अपनी पुत्री सती व शिव दोनों को आमंत्रित नहीं यिा और सती के वहां पहुंचन पर शिव के बारे में अपमान जनक शब्द कहे। शिव का अपमान करने वाला कभी भी संसार में ब्रह्मा, विष्णु की कृपा नहीं पा सकता है। दक्ष के इसी निंदनीय कार्य के कारण सती जो कि दक्ष की ही पुत्री थी उसने स्वयं ही योग अग्नि से अपना शरीर नष्ट कर दिया। दक्ष जो कि शिवजी के ससुर थे लेकिन वे शिव के प्रति श्रद्धा भक्ति व समर्पण नहीं होने के कारण उनकी कृपा नहीं प्राप्त कर सके और इस संसार  में निंदा के पात्र बने, हम कभी भी किसी की भी निंदा नहीं करे।
कथा में सभी समान है- पं. श्री भीमाशंकरजी शर्मा ने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा जहां भी हो वहां हमें उसे श्रवण करने का धर्मलाभ लेना ही चाहिये। कथा में सभी समान है इसलिये जब भी कथा में जाओं समर्पण भाव से जाओ ज्यादा आतिथ्य सत्कार की उम्मीद मत रखो। कथा में सभी समान होते है, इसलिये वी.आई.पी. कल्चर की अपेक्षा किसी को नहीं करना चाहिये। कथा को मन से विचारों समर्पण भाव से ही श्रवण करना चाहिये।
विश्वकर्मा की कृपा है कुमावत समाज पर- पं. भीमाशकरजी ने कहा कि नरसिंहपुरा क्षेत्र में जो कुमावत समाज के धर्मालुजन है उन पर भगवान विश्वकर्मा की विशेष कृपा है। कुमावत समाज के धर्मालुजन भवन निर्माण कला में निपुण है मंदसौर अंचल में इस समाज की विशिष्ट पहचान है।
नमो शिवाय का जाप करने से पाप घटना है पुण्य बड़ता है- पं. भीमाशंकरजी ने ओम नमो शिवाय शब्द का महत्व बताते हुए कहा कि मात्र इन तीन शब्दों के उच्चारण से मनुष्य के पाप कम होते है। तथा पुण्य कर्म बड़ता है जो भी धर्मालुजन इसका नित्य जाप करता है उसे शिव की कृपा मिलती है साथ ही ब्रह्मा विष्णु का आशीर्वाद भी मिलता है।
समर्पण व भक्तिपूर्वक माला जपो- भीमाशंकर जी ने कहा कि दिन व रात्रि दोनों मिलाकर 24 घण्टे होते है क्या हम 24 घण्टे में मात्र एक घण्टा प्रभु भक्ति के लिये माला जपने मंें नहीं निकाल सकते है हमारे पास इधर उधर की बातें करने के लिये समय है लेकिन माला करने के लिये नहीं। जरा विचार करे और प्रतिदिन प्रभु भक्ति के लिये माला करे।
इन्होनें की भागवत पौथी की आरती-भागवत कथा के चतुर्थ दिवस व्यापारी नरेन्द्र अन्ना, योगेश भट्ट, गोपाल अन्यावड़ा, लक्की पाटनी, राकेश जैन, पं. सदाशिव शर्मा धारियाखेड़ी, मदनलाल बाथरा, रूपलाल बाथरा, कांजी पटेल, नटवर बाथरा, पुनमचंद अडानिया एवं अडानिया परिवार के सदस्यगण गेंदमल अडानिया, सत्यनारायण अडानिया, अर्जुन अडानिया, कोमल अडानिया, जितेन्द्र अडानिया, विजय अडानिया, चिराग अडानिया, दीपेश अडानिया, उदय अडानिया, धर्मेन्द्र अडानिया, ने भागवत पौथी की आरती की।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
site-below-footer-wrap[data-section="section-below-footer-builder"] { margin-bottom: 40px;}