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भगवान शंकर की साधना भक्ति का सर्वोकृष्ट है श्रावण मास-पू. वेदपाठी पं. विष्णुप्रसाद ज्ञानी

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भगवान श्री पशुपतिनाथ अभिषेक के छठवें दिवस लगभग 100 अभिषेकार्थियों ने अभिषेक किया
मन्दसौर। श्री पशुपतिनाथ मंदिर प्रबंध समिति द्वारा आयोजित विश्व विख्यात अष्टमूर्ति भगवान पशुपतिनाथ के आराधना भवन में आयोजित मनोकामना अभिषेक में छठवें दिन 35 जोड़ों और अन्य व्यक्तिगत अभिषेकार्थियों सहित लगभग 100 अभिषेकार्थियों ने अभिषेक किया।
प्रारंभ में भगवान पशुपतिनाथ की रजत प्रतिमा का पूजन अभिषेक डॉ. रविन्द्र पाण्डेय, योग गुरू बंशीलाल टांक, अनिल राजपुरोहित, मुकेश माहेश्वरी, ओमप्रकाश पाण्डेय, अजयकुमार विजय, श्रवण कुमार भोपाल, राजेन्द्र गोड़ आदि अभिषेकार्थियों ने किया।
श्री पशुपतिनाथ संस्कृत पाठशाला के आचार्य वेदपाठी विष्णुप्रसाद ज्ञानी के नेतृत्व में 40 बटूकों द्वारा अभिषेक कराया जा रहा है।
अभिषेकार्थियों को संबोधित करते हुए श्री ज्ञानी ने कहा कि भगवान शंकर की साधना भक्ति का सर्वोकृष्ट मास श्रावण मास है। श्रावण मास शिव का प्रिय मास है। चातुर्मास का प्रथम मास भी है। इस महिने में भगवान शिव की सेवा अनन्त पुण्यप्रद मानी गई है।
बंशीलाल टांक ने बताया कि अभिषेक में सम्मिलित होने वालों को प्रातः 8.30 बजे आराधना भवन में उपस्थित होना होता है। 8.45 बजे से रजत प्रतिमा का पूजन होकर ठीक 9 से 10 बजे अभिषेक होता है।
प्रारंभ में भगवान पशुपतिनाथ की रजत प्रतिमा का पूजन अभिषेक डॉ. रविन्द्र पाण्डेय, योग गुरू बंशीलाल टांक, अनिल राजपुरोहित, मुकेश माहेश्वरी, ओमप्रकाश पाण्डेय, अजयकुमार विजय, श्रवण कुमार भोपाल, राजेन्द्र गोड़ आदि अभिषेकार्थियों ने किया।
श्री पशुपतिनाथ संस्कृत पाठशाला के आचार्य वेदपाठी विष्णुप्रसाद ज्ञानी के नेतृत्व में 40 बटूकों द्वारा अभिषेक कराया जा रहा है।
अभिषेकार्थियों को संबोधित करते हुए श्री ज्ञानी ने कहा कि भगवान शंकर की साधना भक्ति का सर्वोकृष्ट मास श्रावण मास है। श्रावण मास शिव का प्रिय मास है। चातुर्मास का प्रथम मास भी है। इस महिने में भगवान शिव की सेवा अनन्त पुण्यप्रद मानी गई है।
बंशीलाल टांक ने बताया कि अभिषेक में सम्मिलित होने वालों को प्रातः 8.30 बजे आराधना भवन में उपस्थित होना होता है। 8.45 बजे से रजत प्रतिमा का पूजन होकर ठीक 9 से 10 बजे अभिषेक होता है।