भगवान भोले की भक्ति का अनुपम अनुष्ठान है ,मनोकामना पूर्ण करते भगवान पशुपतिनाथ

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मन्दसौर। विश्व विख्यात अष्टमूर्ति भगवान पशुपतिनाथ का सावन मास में उनके सानिध्य में किया गया मनोकामना अभिषेक का भगवान भोलेनाथ की भक्ति में श्रावण मास में किये जाने वाले अनुष्ठानों में एक दिव्य ऐतिहासिक स्थान बनाया है।
उल्लेखनीय है कि कोरोना से पहले गायत्री परिवार द्वारा निरंतर 11 वर्षों तक जो मनोकामना अभिषेक किया था उसमें 1 मास तक हजारों शिवभक्तों ने समूह रूप में एक साथ भगवान भोलेनाथ का प्रातः 8.30 बजे से 10.15 तक आराधना भवन में बैठकर जो अभिषेक किया था उसमें भारत के दूर-दूर तक के प्रांतों से कई दर्शनार्थियों ने भाग लेकर अपने को धन्य-धन्य ही माना बल्कि जिस मनोकामना को लेकर अभिषेक में बैठे थे उनकी वह मनोकामना पूर्ण हो जाने से दूसरे वर्ष फिर अभिषेक में परिवार सहित सम्मिलित हुए। प्रति सोमवार-रविवार प्रदोष पर दो-दो पारियों में आराधना भवन के नीचे दोनों परिसर अभिषार्थियों से पूरे भर जाते थे। इस वर्ष एक और विशेषता यह है कि अधिक मास के अंतर्गत भगवान शिव की भक्ति के 2 श्रावण मास होने से भगवान पशुपतिनाथ के आराधना भवन में आयोजित 2 माह तक के मनोकामना अभिषेक जिसकी वर्ष भर से श्रद्धालु शिवभक्त प्रतिक्षा करते हजारों की संख्या में अभिषेकार्थियों के सम्मिलित होने की संभावना है।
बंशीलाल टांक ने बताया कि कोरोना के पश्चात् अभिषेक से जुड़े गत वर्ष से मनोकामना अभिषेक मंदिर प्रबंध समिति द्वारा संचालित किया जा रहा है। अभिषेक पशुपतिनाथ संस्कृत पाठशाला के पूज्य विद्वान संस्कृत आचार्य पं. विष्णु प्रसाद ज्ञानी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में पाठशाला के बटूकों (ब्रह्मचारियों) द्वारा वैदिक विधी विधान से कराया जा रहा है। अभिषेक के पहले अभिषेक मंच पर विराजित भगवान पशुपतिनाथ की रजत प्रतिमूर्ति का पूजन अभिषेक किया जाता है। द्वितीय दिवस अभिषेक में दीप प्रज्जवलन के पश्चात पूजन अभिषेक पतंजलि योग गुरू बंशीलाल टांक, समाजसेवी डॉ. रविन्द्र पाण्डेय, प्रद्युम्न शर्मा ने किया।
उपस्थित रहे- मंदिर प्रबंधक राहुल रूनवाल, सहायक प्रबंधक ओमप्रकाश शर्मा, दिनेश बैरागी, दिनेश परमार आदि।
श्री पशुपतिनाथ मंदिर प्रबंध समिति ने प्रातः 8.30 बजे से 10 बजे तक आयोजित अभिषेक में समस्त शिवभक्तों को परिवार सहित अधिक से अधिक संख्या में सम्मिलित होकर अभिषेक के लिये आमंत्रित किया है।