मऊगंज में मानवता शर्मसार: दरिंदगी की शिकार हुई 8वीं की छात्रा; नए जिले में अपराधियों का ‘जंगलराज’, कहाँ है खाकी का खौफ?

महिला एसडीओपी के इलाके में सुरक्षित नहीं बेटियां; परीक्षा देने निकली छात्रा से गैंगरेप, बेसुध हालत में जंगल में मिली मासूम!
मऊगंज। मध्य प्रदेश का नया जिला मऊगंज आज एक ऐसी खबर से दहल उठा है जिसे सुनकर किसी भी संवेदनशील व्यक्ति की रूह कांप जाए। क्या मऊगंज को नया जिला इसलिए बनाया गया था कि यहाँ बेटियां घर से परीक्षा देने भी न निकल सकें? गुरुवार की सुबह 10:30 बजे, जब एक 14 साल की मासूम छात्रा अपनी सहेली के साथ आठवीं की प्री-बोर्ड परीक्षा देने निकली थी, तब उसे क्या पता था कि रास्ते में ‘इंसानी भेड़िए’ उसका इंतज़ार कर रहे हैं। रास्ते में दो बाइकों पर सवार चार युवकों ने दोनों छात्राओं को अगवा किया और जंगल ले गए। एक सहेली को दूर छोड़कर, आरोपियों ने दूसरी छात्रा के साथ सामूहिक दुष्कर्म (गैंगरेप) की घिनौनी वारदात को अंजाम दिया। दरिंदगी की इंतहा तो देखिए, दरिंदों ने छात्रा को कोई नशीला पदार्थ खिलाया जिससे वह बेहोश हो गई। शाम को जब वह घर नहीं पहुंची, तब परिजनों की खोजबीन के बाद वह जंगल में बेसुध हालत में मिली। सबसे बड़ा सवाल मऊगंज की सुरक्षा व्यवस्था पर उठता है। जिस क्षेत्र की कमान एक महिला एसडीओपी (सची पाठक) के हाथों में हो, वहां एक बेटी के साथ ऐसी दरिंदगी हो जाना प्रशासन के मुंह पर तमाचा है। क्या जिले में पुलिस का पेट्रोलिंग सिस्टम फेल हो चुका है? क्या नए जिले की पुलिस सिर्फ कागजों और राजनीति में सिमट कर रह गई है? जब एक छात्रा दिनदहाड़े अगवा कर ली जाती है, तब पुलिस की ‘मुस्तैदी’ कहाँ सो रही होती है? पीड़िता अभी भी अस्पताल में बेहोशी और सदमे की हालत में है। पीड़ित मां का कहना है कि तीन से चार लोगों ने मिलकर इस कृत्य को अंजाम दिया है।
हालांकि एसपी दिलीप सिंह सोनी और एसडीओपी सची पाठक मौके पर पहुंचे हैं और एक आरोपी की गिरफ्तारी की बात कही जा रही है, लेकिन सवाल वही है बाकी दरिंदे अभी तक बाहर क्यों हैं ?



