प्रगति लेखक संघ मंदसौर इकाई ने याद किया श्री चिडार को

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मंदसौर।केसरी सिंह चिडार के असामयिक निधन ने कला व साहित्य के क्षेत्र को वीरान सा कर दिया है। शुक्रवार को इंदौर में उन्हें अंतिम विदाई दी गई। मंदसौर में श्री चिड़ार के बिताए समय को याद करते हुए प्रगतिशील लेखक संघ से संबद्ध अनेक लेखकों, कलाकारों, रंग कर्मियों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
प्रलेसं इंदौर इकाई के सचिव मंदसौर निवासी हरनाम सिंह ने उन्हें अपने मार्गदर्शक मित्र के रूप में याद करते हुए उनकी वैचारिक प्रतिबद्धता की प्रशंसा की। उन्होंने बताया कि श्री चिड़ार वर्षों तक प्रलेसं मंदसौर इकाई के अध्यक्ष पद पर रहे थे। मंदसौर में प्रलेसं के राज्य सम्मेलन में उनकी महती भूमिका को याद करते हुए इंदौर में उनके नेतृत्व में काम करने के अनुभव को साझा किया।
वरिष्ठ छायाचित्र कार सुवासरा निवासी बंशीलाल परमार ने वर्ष 2010 में अपने पुत्र के विद्यालय में के वार्षिकोत्सव में मुख्य अतिथि के रूप में श्री चिड़ार के शामिल होने का उल्लेख करते हुए उन्हें याद किया। प्रलेसं राज्य सचिव मंडल के सदस्य असअद अंसारी ने अनूपपुर राज्य सम्मेलन में श्री चिड़ार के साथ बिताए समय को अविस्मरणीय बताते हुए उनके द्वारा मुंह से तबला बजाने की कला का उल्लेख किया। श्री अंसारी ने कहा कि उनमें विद्यार्थियों जैसी सीखने की ललक थी।
मंदसौर इकाई की हूर बानो सैफी के अनुसार प्रलेसं ने एक अनमोल हीरा खो दिया। इकाई अध्यक्ष कैलाश जोशी ने मंदसौर में उनके साथ बिताए वक्त को याद किया। उपाध्यक्ष कीर्ति नारायण कश्यप ने कहा कि सहज, सरल, मुस्कुराता उनका चेहरा हमेशा स्मृति में रहेगा।इकाई सचिव दिनेश बसेर ने कहा कि चिडार साहब हर उम्र के साथियों में घुल मिल कर उनका उत्साहवर्धन करते थे। प्रकाश गुप्ता के अनुसार समाज ने एक महत्वपूर्ण साहित्य प्रेमी को खो दिया है।
श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए ईश्वरलाल भारतीय, नरेंद्र अरोड़ा, कैलाश जैन, एम यू अंसारी, निखिलेश शर्मा, मनमोहन द्विवेदी, शैलेंद्र गुप्ता, प्रदीप शर्मा, हेमंत कच्छावा, डॉ अमित राय, डॉ स्वप्निल ओझा, मधुर द्विवेदी, ललिका द्विवेदी, चित्रा माली, डा .यू मीन मा, बृजेश आर्य, महेश मिश्रा,शैलेन्द्र गुप्ता,हस्तीमल सांखला ने सार्वजनिक जीवन में श्री चिड़ार की सेवाओं को याद किया।