सेवामंदसौर जिलासीतामऊ

एक दिन फुर्सत निकालो अपने काम से, मोह माया त्याग प्रेम कर लो राम से

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सीतामऊ-शिक्षा अगर स्तम्भ है तो नींव है संस्कार।
सद्गुण सुख की खान है जिसपर टिका संसार।।

सीतामऊ । मनुष्य का यह जीवन सिर्फ जीवन के स्वर्णिम दिन बिताने के लिए नहीं है। कहा जाता है कि जिस जीवन में आनंद नहीं वो जीवन पशु जीवन है। मनुष्य जीवन जीने है तो हमारे महाग्रंथ गीता के उपदेश खाली हाथ आए, खाली हाथ चले जाओगे। जो आज तुम्हारा है, कल और किसी का था, परसों किसी और का होगा। तुम इसे अपना समझ कर मग्न हो रहे हो, बस यही प्रसन्नता तुम्हारे दु:खों का कारण है।, यही बात हम सबको समझना है कि अपने दायित्व फर्ज निभाते हुए जीवन के आंनद के पल के साथ आगे बढ़ना है। हमें अपने परिवार मोहल्ला गांव नगर क्षेत्र के साथ जुड़ते हुए प्रभु दर्शन के साथ आनंद से सेवा भाव से जुड़ना और जोड़ना है।

चंदन है इस देश कि माटी, तपों भूमि हर ग्राम है हर बाला देवी कि प्रतिमा बच्चा-बच्चा राम है। इसी आनंदमय भाव को लेकर इन पंक्तियों के साथ नगर के विद्यालय बच्चों से नगर परिषद सभापति श्री विवेक सोनगरा ने आज सुबह शिक्षा संस्कार के विषयों पर संवाद किया, शिक्षा और संस्कार एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। शिक्षा विद्यार्थियों के जीवन का अनमोल उपहार है जो व्यक्ति के जीवन की दिशा और दशा दोनों बदल देती है और संस्कार जीवन का सार है जिसके माध्यम से मनुष्य के व्यक्तित्व का निर्माण और विकास होता है। जब मनुष्य में शिक्षा और संस्कार दोनों का विकास होगा तभी वह परिवार, समाज और देश के विकास की ओर अग्रसर होगा। शिक्षा का तात्पर्य सिर्फ किताबी ज्ञान ही नहीं बल्कि चारित्रिक ज्ञान भी होता है । शिक्षा का अंतिम लक्ष्य सुंदर चरित्र है। शिक्षा मनुष्य विद्यार्थियों के व्यक्तित्व के सभी पहलुओं का पूर्ण और संतुलित विकास करता है। बच्चों में सांसारिक और आध्यात्मिक शिक्षा दोनों की नितांत आवश्यता है क्योंकि शिक्षा हमें जीविका देती है और संस्कार जीवन को मूल्यवान बनाती है। शिक्षा में ही संस्कार का समावेश है। अगर हम अपने बच्चों में भारतीय संस्कृति, भारतीय परम्पराएं, भाईचारा, एकता आदि का बीजारोपण करतें हैं तो उसमें खुद व खुद के संस्कार आ जाते हैं जिसकी जिम्मेदारी माता-पिता, परिवार और शिक्षक की होती है। बच्चे देश के भविष्य हैं इन्हें कुशल नागरिक बनाना हमारा भी परम कर्तव्य बनता है। विद्यार्थियों के लिए जैसे–सदा सत्य बोलें, दूसरों की मदद के लिए तत्पर रहें , माता-पिता, शिक्षक और बड़ों का सम्मान करें, ईश्वर पर विश्वास रखें, सहनशील बनें, कर्तव्यनिष्ठ बनें, सभी से प्रेमपूर्वक व्यवहार करें।

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