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प्रसिद्ध लोक गायिका शारदा सिन्हा का निधन, दिल्ली एम्स में ली अंतिम सांस

प्रसिद्ध लोक गायिका शारदा सिन्हा का निधन, दिल्ली एम्स में ली अंतिम सांस

 

 

संगीत जगत में शोक की लहर, कालजयी छठ गीतों की स्मृतियां हुईं अमर

 

 

दिल्ली/पटना: लोक संगीत की महान हस्ती और बिहार की स्वर कोकिला शारदा सिन्हा का मंगलवार को दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में निधन हो गया। वे पिछले कुछ समय से गंभीर स्थिति में थीं और वेंटिलेटर सपोर्ट पर थीं। उनके निधन की पुष्टि उनके बेटे अंशुमन सिन्हा ने सोशल मीडिया के माध्यम से की। शारदा सिन्हा को 22 अक्टूबर से दिल्ली एम्स में भर्ती कराया गया था, जहां वे विशेष डॉक्टरों की देखरेख में आईसीयू में इलाजरत थीं।

अंतिम छठ गीत बना आखिरी भेंट

4 अक्टूबर को शारदा सिन्हा का अंतिम छठ गीत यूट्यूब पर रिलीज किया गया था। यह गीत उनके प्रशंसकों के लिए एक अनमोल तोहफा साबित हुआ, क्योंकि इसके बाद उनका स्वास्थ्य लगातार बिगड़ता गया। लोकगीतों को अपनी सुरीली आवाज़ देने वाली शारदा सिन्हा के गीत आज भी बिहार और देशभर के लोगों के दिलों में बसी हुई यादें हैं।

मुस्कुराती तस्वीर से बंधी थी उम्मीदें

कुछ दिन पहले शारदा सिन्हा की एक मुस्कुराती हुई तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी, जिसने उनके चाहने वालों को यह उम्मीद दी कि वे जल्द स्वस्थ होकर वापस लौट आएंगी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक ने उनकी सेहत की जानकारी ली थी। लेकिन मंगलवार को आई खबर ने संगीत प्रेमियों को गहरे शोक में डाल दिया।

संगीत जगत ने खोई अमूल्य धरोहर

शारदा सिन्हा को उनके अद्वितीय योगदान के लिए पद्म भूषण समेत कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। उनकी आवाज़ में बसे छठ के गीत ‘पावन छठी मइया’ और ‘कांच ही बांस के बहंगिया’ जैसे गीत हर वर्ष पर्वों में गूंजते हैं। उनके बेटे अंशुमन सिन्हा लगातार उनकी सेहत से जुड़ी जानकारी मीडिया को देते रहे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।

अमर हो गए कालजयी गीत

शारदा सिन्हा की आवाज़ ने लोक संस्कृति को एक नई पहचान दी थी। उनके छठ गीत जहां हर बिहारी के लिए पर्वों की पहचान बने, वहीं उनकी अन्य रचनाओं ने देशभर में लोक संगीत को समृद्ध किया। उनके निधन से संगीत जगत में एक ऐसा खालीपन आ गया है, जिसे भर पाना मुश्किल होगा।

संगीत प्रेमी और शारदा सिन्हा के प्रशंसक उनके गीतों को सुनकर उनके योगदान को याद करेंगे और उनकी अमर आवाज़ को श्रद्धांजलि देंगे।

 

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