मध्यप्रदेश प्रगतिशील लेखक संघ (प्रलेस) के 13 वें दो दिवसीय राज्य सम्मेलन का संपन्न

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अनूपपुर में 19-20 नवंबर को मध्यप्रदेश प्रगतिशील लेखक संघ (प्रलेस) के 13 वें दो दिवसीय राज्य सम्मेलन का समापन हुआ। सांगठनिक सत्र में संगठन से संबद्ध विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श करने के बाद महान व्यंग्यकार हरिशंकर परसाई के जन्मशताब्दी वर्ष मनाए जाने का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया। इस सम्मेलन में मध्यप्रदेश प्रलेस की 19 इकाइयों के 140 से अधिक प्रतिनिधि सम्मिलित हुए। मंदसौर से असअद अंसारी,दिनेश बसेर, हूर बानो सैफी,ईश्वरलाल भारती सम्मिलित हुवे।
प्रथम वैचारिक सत्र चंद्रकांत देवताले की स्मृति में “प्रगतिशील लेखन आंदोलन : चुनौतियां और दायित्व” विषय पर सम्मलित लेखकों ने अपनी बात कही । इस सत्र का संचालन विनीत तिवारी ने किया। डॉ. परमानंद तिवारी ने संगठन की चुनौतियों और लेखकों के दायित्व पर चर्चा की। राजीव कुमार ने कहा कि झूठ भले तेजी से फैलता हो लेकिन साहित्य और जीवन की परंपराओं को देखें तो हमेशा सच की जीत हुई है। इस बात को नहीं भूलना चाहिए। बघेली कवि बाबूलाल दाहिया ने गांवों की मिली-जुली संस्कृति का उदाहरण दिया। आरती मिश्रा ने सन दो हजार के बाद सोशल मीडिया के विस्फोट से आई लेखन की चुनौतियों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि सृजनात्मकता समाज और विचारों से आती है। उन्होंने लेखन में कदम रखने वाली नई पीढ़ी के आगमन और उनका संगठन के प्रति रुझान के मुद्दे पर बात की। शैलेंद्र शैली ने स्वतंत्रता, समानता और सृजन तीन प्रमुख मूल्यों पर केंद्रित अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि लेखकों के सामने तमाम चुनौतियां हैं लेकिन उन्हें इनसे जूझते हुए राजनीतिक समझ और वैज्ञानिक सोच के साथ अभिव्यक्ति के खतरे उठाकर अपने दायित्वों का निर्वाहन करना होगा। कवि कुमार अंबुज ने समय के साथ आने वाली चुनौतियों से प्रलेस को आगाह किया। उन्होंने कहा कि सामाजिक और राजनीतिक चुनौतियां लेखकों की चुनौतियों से अलग नहीं है। एक कवि से ज्यादा लेखकों के दायित्व ज्यादा हैं। समाज के ठीक बीच में बैठकर उससे जुड़ने की कार्यवाही एक लेखक ही कर सकता है। युवा कवि अरबाज ख़ान ने सुझाव देते हुए कहा कि संगठन में जुड़ने वाले नए लोगों को ध्यान में रखकर कार्यशालाएं आयोजित की जाएं और उनको किताबें उपलब्ध कराई जाएं। प्रलेस के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष विभूति नारायण राय ने लेखकों और कवियों के संकटों पर टिप्पणी करते हुए उनसे निपटने के लिए रचनात्मक औजारों का उपयोग करने को कहा। उन्होंने कहा कि आज संगठन की जरूरत है कि वह आत्मविश्लेषण करे और अपनी कमियों को चिन्हित करके उसमें सुधार करे। कवि रमाकांत श्रीवास्तव ने कहा कि हमारी भाषा और साहित्य को समृद्ध करने में परसाई और प्रेमचंद का योगदान अविस्मरणीय है।
दूसरा सत्र केदारनाथ सिंह की स्मृति में “बदलती राजनीतिक परिस्थितियों में लेखकों की भूमिका” पर आधारित था। जिसमें प्रलेस के राष्ट्रीय महासचिव डॉ सुखदेव सिंह सिरसा ने कहा कि आज प्रतिबद्धता को भी कट्टरता के साथ देखा जा रहा। लेखकों को चयन करना होगा कि वे क्या, क्यों, और किसके लिए लिखें। उन्होंने कहा कि सत्ता और लेखकों का हमेशा से छत्तीस का आंकड़ा रहा है। लेकिन आज बदलते राजनीतिक परिदृश्य में विरोधियों की पहचान करके सत्ता के प्रलोभनों से बचे रहकर अपने संगठन की विशेष पहचान स्थापित करनी होगी। उन्होंने कहा कि लेखकों को सांप्रदायिकता और कॉरपोरेट के खिलाफ़ बोलने का जोखिम उठाना होगा। विनीत तिवारी ने साम्राज्यवाद के बदलते स्वरूप के बारे में बताते हुए कहा कि आज हमने गहराई से झुठलाना सीख लिया है। हमें समझना चाहिए कि दक्षिणपंथ का दूसरा नाम ही पूंजीवाद है। हमें दुनिया की तरफ भी देखना होगा जहां फासीवाद अलग-अलग रूपों में आया है। इस सत्र की अध्यक्षता कर रहे राजेंद्र शर्मा ने प्रेमचंद और उनके दौर की विसंगतियों की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि हमें एक्टिविज्म के तरीके खोजने होंगे और सामूहिकता के साथ आगे बढ़ना होगा।
सम्मेलन के अंतिम भाग में सज्जाद ज़हीर की स्मृति में सांगठनिक सत्र रखा गया। इस सत्र की अध्यक्षता प्रलेस मध्यप्रदेश के अध्यक्ष राजेंद्र शर्मा और संचालन महासचिव शैलेंद्र शैली ने किया। इस सत्र में मध्यप्रदेश प्रगतिशील लेखक संघ के अध्यक्ष मंडल और सचिव मंडल के सदस्यों की बैठक हुई जिसमें संगठन के विभिन्न मुद्दों पर परिचर्चा करके राज्य सम्मेलन में सम्मिलित प्रतिनिधियों द्वारा प्रगतिशील लेखक संघ की नई कार्यकारिणी का गठन किया गया।अध्यक्ष सेवाराम त्रिपाठी तथा महा सचिव तरुण गुहा नियोगी निर्वाचित हुवे।मंदसौर से कार्यकारिणी में दिनेश बसेर तथा सचिव मंडल में असअद अंसारी निर्वाचित हुवे।
उल्लेखनीय है कि प्रलेस के इस दो दिवसीय सम्मेलन में आयोजित वैचारिक सत्रों के परिणामस्वरूप विभिन्न मुद्दों पर प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए। जिसमें अगले वर्ष 2023 में 22अगस्त को हरिशंकर परसाई के सौवें जन्म के साथ जन्मशताब्दी वर्ष मनाए जाने की घोषणा की गई। विनीत तिवारी ने एक और प्रस्ताव की घोषणा करते हुए कहा कि वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कट्टरपंथी और दक्षिणपंथी शक्ति बढ़ी है और इनको शासकीय समर्थन भी मिल रहा है।वैश्विक संदर्भ की बात करते हुए कहा कि हम अमरीकी साम्राज्यवाद की भर्त्सना करते हैं जो अपने हितों और स्वार्थ के लिए तमाम देशों में युद्धों को भड़का कर आम जनता को घोर संकट में डाल रहा है। प्रतिक्रियावादी ताकतों के प्रतिरोध में शांति और अमन की अपील करते हुए यह मांग करते हैं कि झूठे आरोपों में गिरफ्तार किए गए लेखक, पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ताओं को अतिशीघ्र रिहा किया जाए।
लोकतांत्रिक और मानवीय मूल्यों के साथ वैज्ञानिक चेतना और राजनीतिक समझ के साथ एक बेहतर और सुंदर दुनिया के सपने को साकार करने के लिए प्रतिबद्ध “प्रगतिशील लेखक संघ” (प्रलेस) का यह 13 वां राज्य सम्मेलन अनूपपुर में संपन्न हुआ।