मुख्यमंत्री आरोग्य मेला में आयुर्वेद केंद्र बंद, मरीजों को लौटना पड़ा खाली हाथ
नवनिर्माण के नव वर्ष में बस्ती की तस्वीर बदली, योगी सरकार के 9 वर्षों में जिले को मिली नई पहचान बस्ती उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार के 9 वर्ष पूरे होने के साथ ही जनपद बस्ती में विकास की गति ने नया आयाम लिया है। पहले पिछड़ेपन की छवि से जुड़े इस जिले की तस्वीर अब तेजी से बदल रही है। “नवनिर्माण के 9 वर्ष” के थीम पर केंद्रित राज्य स्तर के कार्यक्रमों का असर स्थानीय स्तर पर भी दिख रहा है, जहां बुनियादी सुविधाओं, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, रोजगार और सुरक्षा में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।योगी सरकार के नेतृत्व में पिछले 9 वर्षों में बस्ती जिले को नई पहचान मिली है। सड़कों का जाल बिछाया गया, गांवों को मुख्य मार्गों से जोड़ा गया और शहर में यातायात व्यवस्था को मजबूत बनाया गया। स्वास्थ्य सेवाओं में अस्पतालों का विस्तार, नई सुविधाओं की उपलब्धता और बेहतर चिकित्सा व्यवस्था ने आमजन का जीवन आसान बनाया है। शिक्षा के क्षेत्र में नए विद्यालयों का निर्माण, पुराने स्कूलों का कायाकल्प और डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने से छात्रों को आधुनिक माहौल मिल रहा है। युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए विभिन्न योजनाओं के जरिए रोजगार के अवसर बढ़े हैं। कृषि क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, आधुनिक तकनीकों का उपयोग और किसान कल्याण योजनाओं से किसानों की आय में इजाफा हुआ है।सुरक्षा व्यवस्था में सुधार से जनता में विश्वास बढ़ा है, जिससे निवेश के नए अवसर पैदा हुए हैं। साथ ही धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों के विकास पर फोकस से जिले की सांस्कृतिक पहचान मजबूत हुई है।बस्ती कलेक्ट्रेट में आयोजित कार्यक्रमों में इन उपलब्धियों को सराहा गया, जहां जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और लाभार्थियों ने सरकार की नीतियों की प्रशंसा की। योगी सरकार का यह दौर बस्ती के लिए “नवनिर्माण का नव वर्ष” साबित हो रहा है, जहां प्रगति की नई इबारत लिखी जा रही है।

गोरखपुर पीपीगंज स्थित नए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर आयोजित मुख्यमंत्री आरोग्य मेले में आज आयुर्वेद केंद्र के बंद रहने से मरीजों को काफी परेशानी हुई। सुबह से ही आयुर्वेदिक इलाज की उम्मीद लेकर आए मरीजों को निराश होकर वापस लौटना पड़ा।
इस संबंध में दूरभाष पर डीओ डॉ. मीनू सोनी ने बताया कि फार्मासिस्ट के अवकाश पर होने के कारण केंद्र को बंद रखना पड़ा। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद केंद्र के संचालन के लिए कम से कम दो लोगों की उपस्थिति अनिवार्य है।मौके पर मौजूद कुछ मरीजों ने बताया कि वे सुबह 10 बजे से ही आयुर्वेद केंद्र पर पहुंच गए थे, लेकिन वहां ताला लगा हुआ है।रोशन ने कहा कि सरकार आयुर्वेद को बढ़ावा दे रही है, लेकिन हकीकत में ऐसा नहीं है।