आपातकाल की त्रासदी में पूर्व विधायक स्व. नानालाल जी पाटीदार का धैर्य अभिनंदनीय रहा

— रमेशचन्द्र चन्द्रे
शिक्षाविद एवं समाजसेवी मंदसौर
भारत के महान लोकतंत्र पर कलंक ‘आपातकाल’ वर्ष 1975 में आज ही के दिन कांग्रेस पार्टी द्वारा देश पर थोपा गया था।
उस अंधकार युग में तमाम अमानवीय यातनाओं को सहते हुए लोकतंत्र की पुनर्स्थापना हेतु संघर्ष करने वाले सभी पुण्यात्मा सत्याग्रहियों को नमन!
आपातकाल की त्रासदी में( पूर्व विधायक) नानालाल जी पाटीदार का धैर्य अभिनंदनीय रहा।
सन 1975 में श्रीमती इंदिरा गांधी के द्वारा आपातकाल लागू होने के बाद अंधाधुंध गिरफ्तारियां शुरू हो गई थी।
उन दिनों सुवासरा के निकट ग्राम गुराडिया प्रताप में श्री नानालाल जी पाटीदार निवास करते थे। उनके विरुद्ध गिरफ्तारी का वारंट था। किंतु संगठन ने उन्हें भूमिगत रहकर काम करने के निर्देश दिए थे। उनकी सक्रियता पुलिस के लिए सिर दर्द बनी हुई थी, अनेक प्रयासों के बाद भी वे पुलिस के हाथ नहीं आ पा रहे थे। उन्हें गिरफ्तार करने के लिए कांग्रेसी नेताओं का दबाव बढ़ रहा था किंतु पुलिस को असफलता ही हाथ लगी। हारकर पुलिस ने उनके वारंट को उनके घर पर चस्पा कर दिया और घर वालों को धमकाया कि, यदि नानालाल स्वयं गिरफ्तार नहीं हुआ तो तुम्हारा घर तोड़ दिया जाएगा। इसकी सूचना घर वालों ने नानालाल जी को देदी, किंतु वे इस धमकी से बिल्कुल भी नहीं घबराए। इधर पुलिस ने अतिक्रमण के बहाने उनके कानूनी रूप से वैध मकान को ध्वस्त कर अपनी धमकी पूरी कर दी। बच्चे घर से बेघर हो गए किंतु नानालाल जी पाटीदार ने अपना धैर्य नहीं खोया। वह गिरफ्तार नहीं हुए।
आपातकाल में कोई देखने सुनने वाला नहीं था प्रशासन और पुलिस का नंगा नाच देश भर में चालू था किंतु नानालाल जी इस जुल्म के आगे झुके बिना अपने दायित्व को निभाते रहे। आपातकाल समाप्त होने के बाद उन्हें अपना मकान फिर बनाना पड़ा।
श्री नानालाल जी पाटीदार के धैर्य को हम प्रणाम करते हैं। क्योंकि देश की रक्षा के लिए अपने सिद्धांतों से समझौता न करके अपने परिवार के सुखों को दांव पर लगा देना मामूली बात नहीं है।