मंदसौरमंदसौर जिला

मानव अधिकार आयोग भोपाल के आदेश पर भी नही हुई प्रशासन की औऱ कोई मदद

 

मन्दसौर-मध्यप्रदेश के मन्दसौर जिले के नाहरगढ थाना क्षेत्र के गाँव भिल्या खेड़ी मे मेट्रो फाइनेंस कम्पनी के कर्मचारियों पर नही हुई कोई कार्रवाई भिल्या खेड़ी गाँव मे राम मंदिर पुजारी गोविंद दास बैरागी द्वारा 3 लाख का लोन लिया गया था औऱ कोरान काल मे क़िस्त नही भरने से अब लोन कम्पनी के कर्मचारियों द्वारा 13 लाख रुपये की अवैध वसूली कर रहे है ,,मानव अधिकार आयोग भोपाल के आदेश पर भी नही हुई प्रशासन की औऱ कोई मदद गोविंद दास बैरागी से दूरभाष पर चर्चा के दौरान बताया कि लोन कम्पनी के कर्मचारि 2 लाख फिर भी मांग रहे

मेने अभी तक 1लाख 75 हजार चुका!

मौत हुई मेरे पिता की लोन फाइनेंस कम्पनी के कर्मचारियों की वजह से मेरे पिता को लौटा दो पैसा ले जाओ

’’09 मामलों में संज्ञान’’

मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग के माननीय अध्यक्ष श्री मनोहर ममतानी ने विगत दिवस के विभिन्न समाचारो पत्रों में प्रकाशित प्रथम दृष्टया मानव अधिकार उल्लंघन के ’09 मामलों में संज्ञान’ लेकर संबंधितों से जवाब मांगा है।

लोन बकाया होने पर वृद्ध को घर से निकाला, सदमे से मौत!

MP_मन्दसौर जिले के नाहरगढ थाना क्षेत्र के गांव भील्याखेड़ी में एक वृद्ध की सदमे से मृत्यु होने की घटना सामने आई है। लोन की किस्ते जमा नहीं होने पर वृद्ध को पलंग सहित घर से बाहर निकाल दिया था। घर से बाहर निकालने के बाद वृद्ध सदमे में थें। जिसके बाद बीते रविवार को उनकी मृत्यु हो गई। मामलेे में संज्ञान लेकर मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने मन्दसौर कलेक्टर औऱ पुलिस अधीक्षक, मन्दसौर से घटना की जांच कराकर की गई कार्यवाही का प्रतिवेदन तीन सप्ताह में मांगा है। क्या था पूरा मामला बताते है आपको ,दरअसल

मध्यप्रदेश के मन्दसौर जिले के गाँव भिल्या खेड़ी में बुजुर्ग 100 वर्सिय औऱ परिवार को घर से बेदखल करने के इस मामले ने बड़ा तूल पकड़ लिया मानव अधिकार आयोग ने फिर लिया संज्ञान आपको बता दें कि नायब तहसीलदार कमल सुनहरे ने बताया कि पुजारी को घर की चाबी सौंप दी गई है। पुजारी को किश्तें जमा करनी होंगी या नहीं ? इस सवाल पर सुनहरे ने कहा कि यह तो उच्च अधिकारी ही बता सकते हैं।

मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले के भील्याखेड़ी गांव में फायनेंस कंपनी द्वारा पुजारी को घर से बाहर निकालकर ताला लगाने के 14 दिन बाद जिला प्रशासन ने पुजारी को घर में प्रवेश करा दिया है। राम मंदिर के पुजारी के 100 वर्षीय पिता की मौत के बाद मामला बढ़ा तो इस पर मानव मानव अधिकार आयोग ने भी संज्ञान लिया था। मामले को लेकर कलेक्टर और एसपी से तीन सप्ताह के भीतर रिपोर्ट मांगी गई थी। इसी बीच जिला प्रशासन ने टीम भेजकर पुजारी को उसके घर की चाबी वापस दिलाकर घर में प्रवेश करा दिया है। लेकिन, अब तक इस मामले के दोषियों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

जानें क्या था मामला?

नाहरगढ़ थाना क्षेत्र के भील्याखेड़ी गांव में रहने वाले गोविन्ददास बैरागी ने 2015 में मेंटोर फायनेंस कंपनी जयपुर से मकान बनाने के लिए 3 लाख का लोन लिया था। पुजारी गोविंद दास ने बताया कि लोन देने के दौरान 20 हजार बीमे और 50 हजार रुपये अन्य खर्च के काट लिए गए थे। पुरानी ने किस्त के रूप में 70 हजार रुपए भरे। लेकिन, कोरोनाकाल में लॉकडाउन लगने और फिर पिता व पत्नी की तबीयत खराब होने के कारण पुजारी गोविंद किस्त जमा नहीं कर पाया।

1 फरवरी 2024 मेंटोर होम फायनेंस कंपनी के अधिकारी पुलिस के साथ पुजारी के घर पहुंचे और सारा सामान बाहर निकाल लिया। पुजारी के 100 वर्षीय बीमार पिता रुपदास को पलंग समेत घर से बाहर निकालकर ताला लगा दिया गया। घर से बाहर निकालने के बाद पुजारी खेत पर झोपड़ी बनाकर रहने लगे, 11 फरवरी को उनके पिता रुपदास की सदमे में मौत हो गई।

मानवाधिकार आयोग के हस्तक्षेप के बाद प्रशासन ने खुलवाया घर का ताला

बुजुर्ग की मौत के बाद मामले ने तूल पकड़ा तो मानव अधिकार आयोग ने संज्ञान लिया। नोटिस जारी कर कलेक्टर और एसपी से मामले की जांच कर 3 सप्ताह में रिपोर्ट मांगी गई। इसके बाद जिला प्रशासन हरकत में आया और कयामपुर नायब तहसीलदार कमल सुनहरे समेत अन्य अधिकारियों ने भील्याखेड़ी गांव पहुंचकर पीड़ित परिवार से मुलाकात की। इस दौरान उन्हें चाबी सौंपकर घर में प्रवेश कराया।

दोषियों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की

किसान नेता श्यामलाल जोकचन्द ने कहा कि विरोध के बाद प्रशासन ने पुजारी गोविन्दास को घर की चाबी सौंप दी है। लेकिन उन्हें जलील करने वाले फायनेंस कंपनी के अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई? पुजारी के पिता की सदमे में जान चली गई, इसका जिम्मेदार कौन? उन्होंने कहा कि पुजारी को न्याय तभी मिलेगा जब दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने मांग करते हुए कहा कि पीड़ित को उचित सहायता भी दी जाए।

किस्तें भरनी पड़ेंगी या नहीं? यह साफ नहीं

नायब तहसीलदार कमल सुनहरे से बताया कि पुजारी को घर की चाबी सौंप दी गई है। पुजारी को अब किश्तें भरना पड़ेगी या नहीं? इस सवाल पर उन्होंने कहा कि यह तो उच्च अधिकारी ही बता सकते हैं

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