मंदसौरमंदसौर जिला
महारानी लक्ष्मीबाई संजीत रोड पर छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती बड़ी धूमधाम से मनाई

छत्रपति शिवाजी महाराज ने स्वराज्य का सपना देखा और उसे साकार भी किया- रविन्द्र पाण्डेय
मन्दसौर। महारानी लक्ष्मीबाई चोराहे संजीत रोड पर छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती बड़ी धूमधाम से मनाई गई। इस अवसर पर छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन पर प्रकाश डालते हुए रविंद्र पाण्डेय ने कहा शिवाजी महाराज मे आंधियों को सांसों में रोकने वाला साहस, आंखों में ज्वाल थी छत्रपति शिवाजी महाराज ने स्वराज्य का सपना देखा और उसे साकार भी किया,हिंदवी स्वराज्य (हिन्दुओं का अपना राज्य) छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा 17वीं शताब्दी में स्थापित एक स्वतंत्र, संप्रभु और समावेशी राज्य जिसकी विचारधारा थी, जिसका उद्देश्य भारत को विदेशी आक्रमणकारियों व मुगल/अफगान/पुर्तगाली प्रभाव से मुक्त कराना था। यह 1674 में रायगढ़ में स्थापित मराठा साम्राज्य का मूल आधार बना, जिसे आगे चलकर बालगंगाधर तिलक ने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध राष्ट्रवाद के रूप में पुनर्जीवित किया।
श्री पाण्डेय ने कहा कि हिन्दवी स्वराज्य की मूल विचारधारा इसका अर्थ ‘हिन्दुओं का स्व-शासन’ है, यह समावेशी था और इसका उद्देश्य विदेशी राजनीतिक व सैन्य प्रभाव से भारत को मुक्त करना था। छत्रपति शिवाजी महाराज ने रायरेश्वर मंदिर में खून से शिवलिंग पर रक्ताभिषेक कर इस राज्य की शपथ ली थी। मुगलों और बीजापुर के आदिलशाह के अत्याचारों के विरुद्ध उन्होंने स्वतंत्र मराठा साम्राज्य की स्थापना की। इसका उद्देश्य भारतीय संस्कृति, धर्म और किसानों के अधिकारों की रक्षा करना था। शिवाजी महाराज ने कुशल प्रशासनिक व्यवस्था, गुरिल्ला युद्ध नीति और एक मजबूत सेना का गठन किया। 1758 तक, यह साम्राज्य अटक (वर्तमान पाकिस्तान) से कटक (ओडिशा) तक विस्तृत हो गया था। बाल गंगाधर तिलक ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान इसे पुनर्जीवित किया, और इसे पूर्णतः भारतीय स्वराज के रूप में प्रस्तुत किया। हिंदवी स्वराज मात्र एक साम्राज्य नहीं, बल्कि विदेशी शासन के विरुद्ध भारतीय स्वाभिमान और स्वधर्म का प्रतीक था।
इस पर कार्यक्रम आयोजक दुर्गा शंकर मालवीय, कमलसिंह डोडिया, जीतू परिहार, विष्णु कर, हेमंत शर्मा, सोनू हाडा, संजू खराड़ी, नरेंद्र बुज, अनिल कुमावत, पुष्कर कुमावत, राजू भाई सेन, राजू खराड़ी, मनोहर लाल सहित शिवाजी माहराज को प्रेरणा मानने वाले महानुभाव उपस्थित रहे।
श्री पाण्डेय ने कहा कि हिन्दवी स्वराज्य की मूल विचारधारा इसका अर्थ ‘हिन्दुओं का स्व-शासन’ है, यह समावेशी था और इसका उद्देश्य विदेशी राजनीतिक व सैन्य प्रभाव से भारत को मुक्त करना था। छत्रपति शिवाजी महाराज ने रायरेश्वर मंदिर में खून से शिवलिंग पर रक्ताभिषेक कर इस राज्य की शपथ ली थी। मुगलों और बीजापुर के आदिलशाह के अत्याचारों के विरुद्ध उन्होंने स्वतंत्र मराठा साम्राज्य की स्थापना की। इसका उद्देश्य भारतीय संस्कृति, धर्म और किसानों के अधिकारों की रक्षा करना था। शिवाजी महाराज ने कुशल प्रशासनिक व्यवस्था, गुरिल्ला युद्ध नीति और एक मजबूत सेना का गठन किया। 1758 तक, यह साम्राज्य अटक (वर्तमान पाकिस्तान) से कटक (ओडिशा) तक विस्तृत हो गया था। बाल गंगाधर तिलक ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान इसे पुनर्जीवित किया, और इसे पूर्णतः भारतीय स्वराज के रूप में प्रस्तुत किया। हिंदवी स्वराज मात्र एक साम्राज्य नहीं, बल्कि विदेशी शासन के विरुद्ध भारतीय स्वाभिमान और स्वधर्म का प्रतीक था।
इस पर कार्यक्रम आयोजक दुर्गा शंकर मालवीय, कमलसिंह डोडिया, जीतू परिहार, विष्णु कर, हेमंत शर्मा, सोनू हाडा, संजू खराड़ी, नरेंद्र बुज, अनिल कुमावत, पुष्कर कुमावत, राजू भाई सेन, राजू खराड़ी, मनोहर लाल सहित शिवाजी माहराज को प्रेरणा मानने वाले महानुभाव उपस्थित रहे।



