समस्याझालावाड़पचपहाड़ (Pachpahar)

नपा भवानीमंडी़ क्षेत्र में सांडों के आतंक से आम जनता परेशान

नपा भवानीमंडी़ क्षेत्र में सांडों के आतंक से आम जनता परेशान

भवानीमंडी। नगरपालिका क्षेत्र के भवानीमंडी और पचपहाड़ में इन दिनों आवारा सांडों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। हालात ऐसे बन गए हैं कि आमजन का घर से निकलना तक दूभर हो गया है। बाजारों और मुख्य सड़कों पर सांडों की झुंडबंदी के कारण आए दिन हादसे हो रहे हैं, लेकिन पालिका प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कस्बे में कई स्थानों पर सांड खुलेआम घूमते रहते हैं। अचानक आपस में भिड़ जाने से राहगीरों और दुकानदारों में अफरा-तफरी मच जाती है। बीते कुछ महीनों में अनगिनत बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं इनकी चपेट में आकर घायल हो चुके हैं। वहीं सड़क से गुजरते दोपहिया और चारपहिया वाहन भी कई बार इनकी टक्कर का शिकार हो रहे हैं।

मेन बाजार में सांडों की ‘कुश्ती’

पचपहाड़ के मेन बाजार में आधा दर्जन के करीब सांड आपस में भिड़ गए। करीब आधे घंटे तक चले इस ‘सांड युद्ध’ के दौरान बाजार में अफरा-तफरी मच गई। दुकानों के बाहर खड़े वाहन क्षतिग्रस्त हो गए और 3 से 4 लोगों को चोटें आईं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, स्थिति इतनी भयावह हो गई थी कि लोग जान बचाकर दुकानों और घरों के अंदर घुस गए।

आखिरकार व्यापारियों ने साहस दिखाते हुए लकड़ी और डंडों की मदद से सांडों को अलग कर किसी तरह स्थिति को काबू में किया। यदि समय रहते प्रयास नहीं किए जाते तो बड़ा हादसा हो सकता था।

प्रशासन पर लापरवाही के आरोप

स्थानीय लोगों और व्यापारियों ने नगरपालिका प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि कई बार शिकायतें देने के बावजूद न तो सांडों को पकड़ने की कार्रवाई की गई और न ही स्थायी समाधान की दिशा में कोई कदम उठाया गया।

नागरिकों की मांग है कि आवारा सांडों को तत्काल पकड़कर गौशाला या सुरक्षित स्थान पर छोड़ा जाए।

बाजार क्षेत्र में नियमित गश्त और निगरानी की व्यवस्था हो। घायल लोगों को उपचार व मुआवजा दिया जाए।

जनआक्रोश बढ़ा

लगातार बढ़ती घटनाओं से आमजन में रोष व्याप्त है। अब देखने वाली बात यह है कि नगरपालिका भवानीमंडी और संबंधित प्रशासन इस गंभीर समस्या को कितनी गंभीरता से लेते हैं, क्योंकि फिलहाल भवानीमंडी और पचपहाड़ में सांडों का आतंक आमजन की सुरक्षा पर बड़ा प्रश्नचिह्न बन चुका है।

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