झालावाड़पचपहाड़ (Pachpahar)सेवा

ग्रामीण इतिहास में पहली बार: हेमड़ा गांव से हुआ नेत्रदान

पोते की पहल से दादा का नेत्रदान, दो नेत्रहीनों को मिलेगी नई रोशनी

भवानीमंडी | ( जगदीश पोरवाल )

जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में नेत्रदान को लेकर जागरूकता अब व्यवहार में उतरने लगी है। भवानीमंडी उपखंड के हेमड़ा गांव से पहली बार नेत्रदान हुआ है, जहां एक चिकित्सक पोते ने स्वयं पहल करते हुए अपने दादा का नेत्रदान करवा कर समाज के सामने अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया।

शाइन इंडिया फाउंडेशन के नेत्र संयोजक कमलेश दलाल ने बताया कि शनिवार सुबह हेमड़ा गांव निवासी रामप्रसाद गुप्ता का सामान्य बीमारी के कारण निधन हो गया। स्व. गुप्ता ने जीवनकाल में ही परिवारजनों को नेत्रदान की इच्छा जता दी थी। इस संकल्प को पूरा करते हुए उनके पौत्र डॉ. वासु गुप्ता ने तुरंत नेत्रदान की प्रक्रिया शुरू करवाई।

सूचना मिलने पर शाइन इंडिया फाउंडेशन की टीम 140 किलोमीटर दूर कोटा से ज्योति-रथ द्वारा हेमड़ा पहुंची। संस्था के नेत्र उत्सरक डॉ. कुलवंत गौड़ ने घर पर ही परिजनों व ग्रामीणों की मौजूदगी में कॉर्निया प्राप्त किया। पूरी प्रक्रिया शालीन व वैज्ञानिक तरीके से संपन्न की गई।

डॉ. कुलवंत गौड़ ने बताया कि स्व. रामप्रसाद गुप्ता का कॉर्निया उत्तम गुणवत्ता का पाया गया है, जिसे आई बैंक जयपुर भेज दिया गया है। इससे शीघ्र ही दो नेत्रहीनों को दृष्टि मिल सकेगी।

नेत्रदान की प्रक्रिया में डॉ. वासु गुप्ता, दीपक, क्षितिज गुप्ता, राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल भवानीमंडी के प्रिंसिपल मुकेश गुप्ता एवं प्रिंसिपल ज्योति गुप्ता सहित अन्य का सहयोग रहा। नेत्रदान के बाद संस्था की ओर से परिजनों को नेत्रदान गौरव पट्टिका व प्रशस्ति-पत्र प्रदान किया गया।

1090 पर नहीं मिला जवाब, फिर ऐसे हुआ नेत्रदान संभव:-

परिजन शोभाराम गुप्ता ने बताया कि पिता की नेत्रदान की इच्छा पहले से थी। निधन के तुरंत बाद सरकारी टोल-फ्री नंबर 1090 पर संपर्क किया गया, लेकिन वहां से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसके बाद भवानीमंडी निवासी दामाद क्षितिज गुप्ता व समधी मुकेश गुप्ता के माध्यम से नेत्रदान संयोजक कमलेश गुप्ता दलाल से संपर्क किया गया, जिससे समय रहते नेत्रदान संभव हो सका।

ग्रामीणों ने भी जताई नेत्रदान संकल्प की इच्छा :-

नेत्रदान के दौरान मौजूद ग्रामीणों ने इस पहल की सराहना करते हुए स्वयं भी नेत्रदान संकल्प लेने की इच्छा जताई। हेमड़ा गांव से हुआ यह पहला नेत्रदान अब क्षेत्र में जनजागरूकता की नई मिसाल बन गया है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
WhatsApp Icon
Whatsapp
ज्वॉइन करें
site-below-footer-wrap[data-section="section-below-footer-builder"] { margin-bottom: 40px;}