कोटा स्टोन उद्योग को बड़ी राहत, पर्यावरण नियमों में ऐतिहासिक सरलता, ग्रीन कैटेगरी में किया शामिल

कोटा स्टोन उद्योग को बड़ी राहत, पर्यावरण नियमों में ऐतिहासिक सरलता, ग्रीन कैटेगरी में किया शामिल
भवानीमंडी। कोटा स्टोन उद्योग से जुड़े हजारों लघु एवं मध्यम उद्यमियों के लिए पर्यावरणीय नियमों में बड़ी राहत मिली है। केंद्र एवं राज्य सरकार के पर्यावरण विभाग ने कोटा स्टोन उद्योग को ऑरेंज कैटेगरी से हटाकर ग्रीन कैटेगरी में शामिल कर लिया है। यह निर्णय उद्योग जगत के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है।
इस महत्वपूर्ण बदलाव का श्रेय लघु उद्योग भारती के निरंतर, संगठित और प्रभावी प्रयासों को दिया जा रहा है, जिसने लंबे समय से कोटा स्टोन उद्योग को व्यवहारिक पर्यावरणीय मानकों के अंतर्गत लाने की मांग उठाई थी
आजीवन मान्य होगा पर्यावरण प्रमाण पत्र:-
ग्रीन कैटेगरी में शामिल होने के बाद अब कोटा स्टोन उद्योग से संबंधित इकाइयों को पर्यावरण स्वीकृति प्रमाण पत्र केवल एक बार ही लेना होगा, जो आजीवन मान्य रहेगा। इससे हर कुछ वर्षों में नवीनीकरण की जटिल प्रक्रिया से उद्योगों को मुक्ति मिलेगी। साथ ही प्रमाण पत्र की शुल्क राशि भी अत्यंत न्यूनतम रखी गई है।
यह सुविधा पाँच करोड़ रुपये से कम निवेश वाली इकाइयों पर लागू होगी, जिससे लघु एवं मध्यम उद्योगों को सीधा लाभ मिलेगा।
सीए सर्टिफिकेट की बाध्यता समाप्त:-
नई व्यवस्था के तहत अब चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा बनाए जाने वाले प्रमाण पत्र की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है। इसके साथ ही पर्यावरण विभाग द्वारा आवेदन प्रक्रिया को पूरी तरह सरल और पारदर्शी बना दिया गया है। अब उद्योग संचालकों को किसी एजेंट, दलाल या मध्यस्थ की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
1 फरवरी 2026 से लागू हो गया:-
पर्यावरण विभाग का यह उद्योग हितैषी निर्णय 01 फरवरी 2026 से प्रभावी हो चुका है। इससे कोटा स्टोन उद्योग को न केवल प्रशासनिक राहत मिलेगी, बल्कि समय और लागत दोनों की बचत भी होगी।
उद्योग और पर्यावरण में संतुलन:-
लघु उद्योग भारती के अध्यक्ष सीए प्रकाश गुप्ता ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि यह कदम उद्योग को अनावश्यक प्रक्रियाओं से मुक्त करने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और औद्योगिक विकास के बीच संतुलन स्थापित करने वाला है। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए संगठन के शीर्ष नेतृत्व के प्रति आभार व्यक्त किया।
उद्योग जगत का मानना है कि इस फैसले से कोटा स्टोन उद्योग को नई गति मिलेगी, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और राज्य की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्राप्त होगी।
— जगदीश पोरवाल



