रतलामताल

खारवांकला में बिना दहेज की शादी बनी चर्चा का विषय, एक रूपया नारियल लेकर समाज के लिए बनी प्रेरणा

खारवांकला में बिना दहेज की शादी बनी चर्चा का विषय, एक रूपया नारियल लेकर समाज के लिए बनी प्रेरणा

जितेंद्र सिंह चंद्रावत

जड़वासा। दहेज प्रथा भारत में गंभीर सामाजिक बुराई है जहां दूल्हे पक्ष द्वारा विवाह में दुल्हन के परिवार से नगदी संपत्ति या कीमती सामान की मांग की जाती है। वही राजपूत समाज के दूल्हे परिवार ने दहेज में केवल ₹ 01रु और नारियल लेकर शगुन की रस्म अदायगी कर दहेज न लेने की समझ में एक मिसाइल पेश की।

जी हां हम बात कर रहे रतलाम जिले के ताल तहसील क्षेत्र के ग्राम खारवांकला में शगुन के रूप में 01 रुपया और नारियल लेकर शादी की मिसाल दहेज प्रथा के खिलाफ एक सामाजिक संदेश देती हैं। जहां दूल्हे और उनके परिवार दहेज के रूप में लाखों रुपये लेने से इनकार कर देते हैं और केवल शगुन के तौर पर एक रुपया और नारियल स्वीकार करते हैं, जिससे समाज में एक सकारात्मक संदेश जाता है। इसी कड़ी में गांव खारवांकला निवासी अर्जून सिंह चौहान कि पुत्री वधु अनुसिया कुंवर कि शादी में आएं राजस्थान प्रतापगढ़ के ग्राम टांडा के वर लक्कीराज सिंह पिता सुरेन्द्र सिंह ने दहेज में मिलने वाली दो लाख रुपए कि नगद राशि न लेकर दहेज कि कुप्रथा के खिलाफ समाज को सकारात्मकता का संदेश दिया है। यह शादी की समाज में चर्चा का विषय बनीं हुई है।

दुल्हे के पिता सुरेन्द्र सिंह ने कहा कि लडक़ी से बड़ा कोई दहेज नहीं है। भगवान की कृपा से उनके घर वो सबकुछ है, जोकि जीवन में जरूरी है। दोनों बच्चे पढ़े-लिखे हैं और रूढ़ीवादी समाज के लिए इससे बड़ा कोई उदाहरण नहीं हो सकता। वधु पक्ष व रिश्तेदारों ने वर पक्ष की इस शानदार पहल की तारीफ की और समाज को इससे प्रेरणा लेने का आह्वान किया। विवाह समारोह में परिजन रिश्तेदार के साथ करनी सेना प्रमुख जीवन सिंह शेरपुर सहित कार्यकर्ता समाज जन उपस्थित रहे।

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