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किसान का बेटा बना ऑडिटर मेहनत और हौसले से चन्द्र जीत ने रची नई मिसाल

किसान का बेटा बना ऑडिटर मेहनत और हौसले से चन्द्र जीत ने रची नई मिसाल

पीपीगंज (गोरखपुर)। फरदहनी गांव निवासी  किसान श्रीराम प्रसाद के छोटे बेटे चन्द्र जीत ने उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) की परीक्षा पास करके पंचायतीराज विभाग में ऑडिटर (लेखा परीक्षक) के पद पर चयनित होकर गांव, क्षेत्र और परिवार का नाम रोशन किया है।चन्द्र जीत का पूरा परिवार गरीबी और संघर्ष से भरा रहा, लेकिन मेहनत और दृढ़ संकल्प ने उन्हें बड़ी सफलता तक पहुंचाया। उनके पिता श्रीराम प्रसाद छोटे किसान हैं, मां गृहणी हैं और बड़ा भाई चन्द्र शेखर रेलवे सुरक्षा बल (RPF) में कार्यरत हैं। घर की आर्थिक तंगी के बावजूद माता-पिता ने दोनों बेटों की पढ़ाई में कोई कसर नहीं छोड़ी।चन्द्र जीत बताते हैं कि उनका दिन किताबों से शुरू होता था और रात भी किताबों के साथ ही खत्म होती थी। परीक्षा की तैयारी का सफर आसान नहीं था। कई बार असफलता हाथ लगी, मन टूटा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। हर बार और मजबूती से आगे बढ़े। वे कहते हैं, “माता-पिता और बड़े भाई के शब्द याद आते थे—हार मत मानो, मंजिल जरूर मिलेगी। यही हौसला मुझे ताकत देता था।”चन्द्र जीत की मां ने हमेशा आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। वे कहते हैं, “शिक्षा ही असली संपत्ति है। मेरे पिता के पसीने की हर बूंद मेरी इस सफलता में शामिल है।” वे गांव के बच्चों को संदेश देते हैं कि शहरों में साधन ज्यादा हो सकते हैं, लेकिन गांव के बच्चों में लगन और जज्बा कहीं अधिक होता है। अगर दृढ़ निश्चय से मेहनत की जाए तो कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।बड़े भाई चन्द्र शेखर ने खुशी जाहिर करते हुए कहा, “आज मेरा, मेरे माता-पिता का सपना सच साबित हुआ। मैं अपने भाई के उज्ज्वल भविष्य की कामना करता हूं।पिता श्रीराम प्रसाद भावुक होकर कहते हैं, “मैंने अपने बच्चों की पढ़ाई को ही अपनी खेती समझकर मेहनत की। आज दोनों बेटों ने नौकरी हासिल करके मेरा सपना पूरा कर दिया। बड़ा बेटा रेलवे सुरक्षा बल में है और छोटा बेटा ऑडिटर बनकर गांव-क्षेत्र का नाम रोशन किया। मुझे दोनों बेटों पर बहुत गर्व है। पूर्वजों और ईश्वर के आशीर्वाद से उन्होंने साबित कर दिया कि परिस्थितियां सफलता की राह में रोड़ा नहीं बन सकतीं।चन्द्र जीत की यह सफलता सिर्फ व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि उन सभी माता-पिता की मेहनत का फल है जो अपने बच्चों के सपनों को पूरा करने के लिए दिन-रात संघर्ष करते हैं।

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