रीवारीवा संभाग

31 जनवरी को गुढ़ स्थित प्राचीन शिव मंदिर (भैरवलोक) के अभिषेक व लोकार्पण में शामिल होंगे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव,

31 जनवरी को गुढ़ स्थित प्राचीन शिव मंदिर (भैरवलोक) के अभिषेक व लोकार्पण में शामिल होंगे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव,

रीवा जिले की गुढ़ विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत कैमोर पहाड़ श्रृंखला में स्थित ग्राम पंचायत चौड़ियार के ग्राम खाम्हडीह पहाड़ पर स्थित प्राचीन शिवधाम ‘भैरवलोक’ एक बार फिर विंध्य अंचल की धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक चेतना का केन्द्र बनने जा रहा है। लगभग डेढ़ हजार वर्ष प्राचीन भगवान शिव के भैरव स्वरूप की यह विशालकाय प्रतिमा विंध्य क्षेत्र ही नहीं, बल्कि दूर-दूर से आने वाले शिवभक्तों के लिए भी गहरी आस्था का केन्द्र रही है। कैमोर पर्वत श्रेणी में स्थित यह स्थल प्राचीन काल से ही साधना, तपस्या और शक्ति उपासना का प्रमुख केन्द्र रहा है। इतिहासकारों एवं पुरातत्वविदों के अनुसार भैरवनाथ की यह प्रतिमा अपनी विशालता, शिल्पकला और प्राकृतिक चट्टान पर उकेरे गए स्वरूप के कारण अद्वितीय है। यही कारण है कि इस स्थल को मध्यप्रदेश पुरातत्व विभाग एवं मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा अधिसूचित एवं संरक्षित स्मारक का दर्जा प्राप्त है। वर्षों की प्रतीक्षा के बाद अब भैरवनाथ के इस पवित्र धाम पर भव्य एवं विशाल मंदिर का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है। आगामी 31 जनवरी 2026 को विधिवत वैदिक मंत्रोच्चार, पूजा-अर्चना एवं धार्मिक अनुष्ठानों के साथ मंदिर का अभिषेक एवं लोकार्पण संपन्न होगा।

इस ऐतिहासिक अवसर पर मध्यप्रदेश के  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अपने कर-कमलों से मंदिर का लोकार्पण करेंगे। यह धाम आस्था के साथ-साथ क्षेत्रीय विकास और पर्यटन को भी नई दिशा देगा। पर्यटन, रोजगार और विकास की नई संभावनाएं भैरवलोक मंदिर के लोकार्पण के बाद यह स्थल धार्मिक पर्यटन के प्रमुख केन्द्र के रूप में उभरेगा। श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों की बढ़ती संख्या से स्थानीय युवाओं को रोजगार, गाइड सेवा, परिवहन, होटल-धर्मशाला, प्रसाद एवं हस्तशिल्प जैसे क्षेत्रों में स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और कैमर अंचल विकास के नए पथ पर अग्रसर होगा। रीवा जिले एवं गुढ़ क्षेत्र की समस्त जनता- जनार्दन, शिवभक्तों और श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे 31 जनवरी 2026 को आयोजित भैरवनाथ लोक के अभिषेक व लोकार्पण समारोह में अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर इस ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन को सफल बनाएं।

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