श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथ जिनालय पर लहराई धर्मध्वजा

श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथ जिनालय पर लहराई धर्मध्वजा
सीतामऊ।श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथ जैन श्वे. मंदिर की द्वितीय वर्षगाँठ के पावन अवसर पर मंदिरजी के शिखर पर श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथ जैन मंदिर ट्रस्ट की आज्ञा से ध्वजारोहण लाभार्थी स्व.श्रीमती शांताबाई – सज्जनलाल जी पोरवाल के सुपुत्र अरविन्द कुमार पोरवाल (जैन) परिवार द्वारा किया गया। ध्वजारोहण के पूर्व लाभार्थी परिवार के निवास स्थान “शत्रुंजय” से भव्य वरघोड़ा प्रारम्भ हुआ जो नगर के मुख्य मार्गो से होते हुए नीमा मोहल्ला स्थित श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथ जैन मंदिर पहुँचा जहाँ विधि विधान से सत्तरभेदी पूजन व ध्वजा का पूजन सम्पन्न हुआ। जिसके बाद मंदिर जी के शिखर पर प.पु. मुक्तिनिलया श्री जी म.सा की पावनकारी निश्रा में लाभार्थी परिवार द्वारा ध्वजारोहण किया गया। ध्वजारोहण के पश्चात महोत्सव में पावनकारी निश्रा प्रदान करने पधारे प.पू. मननकिर्ती श्रीजी म.सा. एवं प.पू.धैर्यकीर्ति श्रीजी म.सा द्वारा जिनालय परिसर में बड़ी शांति पाठ व मांगलिक उपस्थित श्रावक श्राविकाओ को फरमाई व प्रवचन के माध्यम से साध्वीजी ने कहा कि प्रतिदिन परमात्मा के दर्शन करने से अत्यंत आनंद की अनुभूति होती है व लाभ प्राप्त होता है। मंदसौर रोड स्थित विजय पैलेस में लाभार्थी परिवार द्वारा स्वामीवात्सल्य का आयोजन किया गया।
ऐतिहासिक दृष्टि में जिनालय – देवविमान रूपी जिनालय में शोभायमान है शंखेश्वर पार्श्व प्रभु
सकल जैन श्रीसंघ सीतामऊ के सचिव नयन जैन ने जानकारी देते हुए बताया कि नगर के मध्य नीमा मोहल्ला में स्थित श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथ जैन श्वे. मंदिर जहां मूलनायक के रूप में लगभग 1000 वर्ष प्राचीन श्री पार्श्वनाथ भगवान विराजित है। श्री पार्श्वनाथ भगवान को समर्पित जिनालय के जीर्णोद्धार हेतु वर्ष 2007 में मालव सम्राट आचार्य भगवंत नवरत्नसागर सूरीश्वर जी म.सा. के पावन निश्रा एवं शासनरत्न मनोज कुमार जी हरण की प्रेरणा व मार्गदर्शन में शिलान्यास एवं भूमि पूजन संपन्न हुआ था। देव विमान रूप में धवल पाषाणे से नवनिर्मित जिनालय में तीर्थंकर परमात्मा सहित गणधर भगवंतो एवं अन्य देवी देवताओं की प्रतिमा का प्रवेश वागड़ विभूषण आचार्य श्री मृदुरत्नसागर सूरीश्वर जी म.सा. की पावन निश्रा में 4 जून 2021 के शुभ दिवस हुआ। अत्यंत नयनरम्य श्री पार्श्वनाथ भगवान की लगभग सैकड़ो वर्ष प्राचीन प्रतिमाजी का नामकरण 11 फरवरी 2024 को श्री नव-अपूर्व-अमर कृपा प्राप्त शिष्य बन्धुत्रिपुटी आगम-प्रश्म-वज्र रत्नसागर जी महाराज साहब के निश्रा में भव्यातिभव्य प्रतिष्ठा महोत्सव के दौरान किया गया व प्रतिष्ठा पश्चात मूलनायक श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथ भगवान के रूप में पूजित है। उपर्युक्त जिनालय की द्वितीय वर्षगांठ निमित्त भव्य ध्वजारोहण महोत्सव सम्पन्न हुआ।



