आलेख/ विचारमंदसौरमध्य प्रदेश
1915 में आरएसएस के संस्थापक डॉ. हेडगेवार महाराष्ट्र में विदर्भ प्रांत में कांग्रेस के प्रांतीय सचिव थे

1915 में आरएसएस के संस्थापक डॉ. हेडगेवार महाराष्ट्र में विदर्भ प्रांत में कांग्रेस के प्रांतीय सचिव थे
डॉक्टर हेडगेवार का जन्म 1889 में नागपुर हुआ था। अपनी प्रारंभिक कक्षाएं पूर्ण कर डॉक्टर की पढ़ाई करने कोलकाता चले गए जहां उन्होंने 1914 में LMS(Licentiate in Medicine and Surgery) की परीक्षा पास की और 1915 में डॉक्टर बनकर नागपुर लोटे। उन्होंने एमबीबीएस की पढ़ाई कोलकाता के नेशनल मेडिकल कॉलेज से की थी जहां क्रांतिकारी गतिविधियों में भी भाग लिया और वहां भारत के स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रहे। एमबीबीएस के दौरान कोलकाता में अनुशीलन समिति जैसे क्रांतिकारी संगठन के साथ काम किया, रामप्रसाद बिस्मिल के साथ काकोरी कांड में शामिल हुए बाद में हुए तथा राम प्रसाद बिस्मिल के साथ ही भूमिगत हो गए थे।
1915 में डॉक्टरी पढ़ने के बाद जब वह नागपुर लौटे तो कांग्रेस में पूर्णत: सक्रिय हो गए थे और इस कारण से उन्हें सन 1922 में महाराष्ट्र में विदर्भ प्रांत में कांग्रेस का प्रांतीय सचिव बनाया गया था।
कांग्रेस के निर्देश पर चलने वाले स्वतंत्रता संग्राम में उनकी सक्रिय भागीदारी रही।
1921 में कांग्रेस के द्वारा आयोजित अंग्रेजों के विरुद्ध एक जन जागरण सभा में जबरदस्त भाषण देने के करण करण उन पर “राजद्रोह का मुकदमा” चलाया गया तथा उन्हें एक साल की सश्रम कैद हुई। इस दौरान नागपुर की ही अजनी जेल में रहे और 1922 में रिहा हुए।
जब वह कांग्रेस में काम कर रहे थे, इसी दौरान 1920 में नागपुर में कांग्रेस का एक राष्ट्रीय अधिवेशन आयोजित किया गया जिसकी कर्ताधर्ता टीम में डॉक्टर हेडगेवार प्रमुख थे। उस अधिवेशन में डॉक्टर हेडगेवार ने कांग्रेस में पहली बार “पूर्ण स्वतंत्रता” को लक्ष्य बनाने के बारे में प्रस्ताव प्रस्तुत किया तो यह प्रस्ताव पारित नहीं हुआ, क्योंकि मुस्लिम लीग की पृथक राष्ट्रवाद की नीति के कारण कांग्रेस मुसलमान के सामने नतमस्तक थी।
उक्त अधिवेशन में डॉक्टर हेडगेवार को यह देखने को मिला कि, कांग्रेस मुस्लिम तुष्टिकरण के पक्ष में है और मोहम्मद अली जिन्ना की हर बात मानने के लिए तैयार बैठी रहती है। कांग्रेस किसी भी कीमत पर मुसलमानों को नाराज करना नहीं चाहती थी। यह नीति महात्मा गांधी से लेकर जवाहरलाल नेहरू तक एक जैसी थी।
उक्त स्थिति को देखकर डॉक्टर हेडगेवार ने समझा की जो मुस्लिम लीग इस भारत राष्ट्र को अपना राष्ट्र नहीं मानती इसलिए उनके साथ भविष्य में भी निबाह संभव नहीं है। उन्होंने सोचा कि देश एक न एक दिन आजाद होगा ही किंतु उसके बाद यदि इस देश का मूल निवासी हिंदू संगठित नहीं होता है तो हमारा देश फिर से किसी ने किसी शक्ति का गुलाम हो सकता है? इसलिए उन्होंने विचार किया कि एक ऐसे संगठन की स्थापना की जानी चाहिए जिसमें देशभक्त नागरिकों का निर्माण किया जा सके, जो हिंदुत्वनिष्ठ हो तथा इस भरत भूमि से प्यार करने वाला हो, जो यहां के सांस्कृतिक तथा धार्मिक मान बिंदुओं को सम्मान देता हो, जो यहां की संस्कृति की जड़ों से जुड़ा हो। उक्त विचार आते ही उन्होंने कांग्रेस को धीरे-धीरे तिलांजलि देदी तथा 1925 में उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की।
अर्थात उस समय भी कांग्रेस दोगली थी और आज भी दोगली ही है। इस कांग्रेस को सत्ता से मोह है, राष्ट्र या जन्मभूमि, हिंदुत्व इनसे इनका कोई लेना देना नहीं है। यह सिर्फ शासन करने के स्वप्न देख रही हैं। और आरएसएस को भला बुरा कहना, उसे फासीवादी संगठन के नाम से बदनाम करना। गांधी जी की हत्यारे नाथूराम गोडसे का संघ से कोई संबंध नहीं था पर उसका संबंध आरएसएस से जोड़ना तथा येन केन प्रकारेण आरएसएस को बदनाम करना ताकि फिर से कांग्रेस शासन में आ जाए और अपनी मनमानी करें।
इसलिए सुन लो कांग्रेसियों! राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ विश्व का सबसे बड़ा देशभक्त संगठन है। इस भारत में तुम यदि कोई देशभक्त ढूंढोगे तो वह भी कहीं ना कहीं आरएसएस का ही निकलेगा। इसलिए सुन लो कांग्रेसियों! तुम सत्ता में आओ कोई चिंता नहीं है किंतु राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की देशभक्ति पर प्रश्न खड़ा करना यह तुम लोगों के लिए आत्मघाती कदम होगा।
रमेशचन्द्र चन्द्रे


