
दस्तावेज का सही तरीके से सत्यापन होने पर बड़ा खेल उजागर हों सकता .!
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के नियमों की उड़ाई जा रही धज्जियां….!
✍️ राजेन्द्र देवड़ा
आलोट। आशा कार्यकर्ताओ ममता मालवीय और रीछा सेक्टर सुपरवाइजर शकुन्तला चौहान के बीच चल रहे विवाद में अब नया खुलासा हुआ रीछा सेक्टर सुपरवाइजर शकुन्तला चौहान ने उच्च अधिकारी से लेकर आलोट सिविल अस्पताल बीएमओ को कि गई शिकायत में बताया कि ममता मालवीय पति दयाराम निवासी लुनी तहसील ताल की होकर ग्राम मेघपुरा में आशा कार्यकर्ता के पद पर कार्यरत है सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ममता मालवीय ग्राम लुनी कि निवासरत तो गांव मेघपुरा की जनता को स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ कैसे मिलता होगा क्या मेघपुरा कि जनता को स्वास्थ्य योजनाओं के लिए लुनी जाना पड़ेगा जो मध्य प्रदेश राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के नियमों के विरुद्ध नियुक्ति है। मध्य प्रदेश राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के पत्र क्रमांक/एन एच एम/आशा/2015 में सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारीयों को लिखित आदेश में दिये गये थे किओं के चयन में 200 से 2000 की जनसंख्या पर एक आशा होगी और उसी गांव कि निवासी चिन्हित महिला होनी चाहिए विवाहित/विधवा/तलाकशुदा/अलग रह रहीं महिला ही आशा कार्यकर्ता हो सकतीं हैं। जबकि ममता मालवीय ग्राम लुनी की निवासी होकर गांव मेघपुरा की आशा कार्यकर्ता हैं। जोकि नियुक्ति प्रकिया के अनुसार उसी ग्राम की निवासी होना अनिवार्य है। शासन के आदेशों का उल्लंघन कर आशा कार्यकर्ता ममता मालवीय की नियुक्ति नियम विरुद्ध है।
जब हमने सेक्टर रीछा सुपरवाइजर शकुन्तला चौहान से सम्पर्क किया तो बताया कि आशा कार्यकर्ता ममता मालवीय और उनके पति दयाराम मालवीय उन पर गलत शिकायत कर रहें हैं। सुपरवाइजर शकुन्तला चौहान ने कहां की पिछले एक वर्ष से ममता मालवीय और उसके पति दयाराम मालवीय द्वारा मुझ पर झूठे आरोप लगाकर अपनी पुत्री को सेक्टर में सुपरवाइजर के पद पर बिठाने के लिए मुझे मानसिक तनाव देकर परेशान कर रहें है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार आशा कार्यकर्ता बीपीएल कार्डधारी भी बताई जा रही हैं।
जब इस संबंध में आलोट मुख्य खण्ड चिकित्सा अधिकारी डॉ देवैन्द्र मौर्य से सम्पर्क किया तो उन्होंने बताया कि आशा कार्यकर्ता ममता मालवीय जोकि लुनी कि निवासी होकर मेघपुरा में आशा कार्यकर्ता हैं की शिकायत मेरे कार्यालय को प्राप्त हुई है जांच कर उचित कार्रवाई कि जाएंगी ।



