
स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति सिर्फ नौकरी छोड़ना नहीं, कर्मचारी का अधिकार: हाईकोर्ट
स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) केवल नौकरी छोड़ने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह कर्मचारी का एक वैधानिक अधिकार है, जो निर्धारित सेवा अवधि पूरी होने पर प्राप्त होता है। यह महत्वपूर्ण टिप्पणी न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी एवं न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की पीठ ने एक बैंक की अपील पर सुनवाई करते हुए की।
बैंक ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट द्वारा वर्ष 2017 में पारित दो अलग-अलग आदेशों को चुनौती दी थी। पीठ ने स्पष्ट किया कि यदि कोई कर्मचारी 20 वर्ष की सेवा पूर्ण करने के बाद तीन महीने का नोटिस देकर स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए आवेदन करता है, तो वह इसके लिए पात्र हो जाता है। यदि नियोक्ता नोटिस अवधि के भीतर आवेदन अस्वीकार नहीं करता, तो स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति स्वतः लागू मानी जाएगी।
न्यायालय ने यह भी कहा कि नोटिस अवधि समाप्त होने के बाद की गई अस्वीकृति मान्य नहीं होगी। मामले में कर्मचारी की नियुक्ति सितंबर 1983 में हुई थी और अप्रैल 2006 में उसे पदोन्नत कर प्रबंधक बनाया गया था। जुलाई 2010 में रायपुर शाखा प्रबंधक के रूप में कार्य करते समय बैंक को दो खातों में कुछ संदिग्ध लेन-देन की जानकारी मिली थी।

