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मनरेगा के 9 वर्ष बस्ती के गांवों में बदली तस्वीर, लाखों ग्रामीणों को गांव में ही मिला रोजगार

मनरेगा के 9 वर्ष बस्ती के गांवों में बदली तस्वीर, लाखों ग्रामीणों को गांव में ही मिला रोजगार

बस्ती। पिछले 9 वर्षों में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के प्रभावी क्रियान्वयन ने बस्ती जनपद की ग्रामीण तस्वीर पूरी तरह बदल दी है। इस योजना ने न केवल लाखों परिवारों को उनके गांव में ही रोजगार उपलब्ध कराया, बल्कि गांवों के आधारभूत ढांचे को मजबूत करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा देने का भी काम किया है।जनपद में कुल 20,11,034 जॉब कार्ड धारकों को अब तक 1,83,283.51 लाख रुपये (करीब 1,832.83 करोड़ रुपये) का भुगतान किया जा चुका है। साथ ही योजना के तहत 8,66,91,088 मानव दिवस का सृजन किया गया है। इन आंकड़ों से साफ है कि मनरेगा बस्ती के ग्रामीणों के लिए आजीविका का मजबूत सहारा बनकर उभरा है।इस योजना के माध्यम से गांवों में सड़कों का निर्माण, तालाबों का जीर्णोद्धार, जल संरक्षण संरचनाएं, कृषि संबंधी कार्य और अन्य विकासपरक गतिविधियां संचालित की गईं। इन कार्यों ने न केवल गांवों को बेहतर आधारभूत सुविधाएं प्रदान कीं, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने और स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। पलायन में आई कमी ने ग्रामीणों के जीवन स्तर को सुधारने में बड़ी भूमिका निभाई है।मनरेगा में महिलाओं की भागीदारी विशेष रूप से सराहनीय रही है। बड़ी संख्या में महिलाएं इस योजना से जुड़कर आत्मनिर्भर बनी हैं और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही हैं। इससे न केवल आर्थिक सशक्तिकरण हुआ है, बल्कि महिलाओं के सामाजिक उत्थान को भी नया आयाम मिला है।जिला प्रशासन के प्रभावी मॉनिटरिंग और ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी के कारण मनरेगा बस्ती जनपद में सफलता की नई मिसाल बनकर उभरा है।

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